लक्ष्मी आ गयी !
राजू भाई का असली नाम तो है राजकुमार , लेकिन वर्तमान समय के अनुसार नाम सुनने मे प्राचीन लगने की बजह से अपना नाम सबको राजेश बताते है ।खुबसूरत तो बहुत है 3३ की उम्र मे भी अभी तक , पर बालो को रंगीन बनाने के शोंक ने बाल २ ५ की उम्र में ही उड़ा दिए थे । अब पूरा मैदान साफ है । नकली बाल भी लगवाए गए पैसे जोडकर , पर उनमे गर्मी बहुत लगती थी, रोज़ चिपकाने की परेशानी अलग थी ।फिर अब जब सबके समझ मे आ ही जाते है की बाल नकली है तो फायेदा क्या हुआ ? तो वो प्रयोग भी विफल रहे । शादी तो आम निम्न वर्गीय परिवार की तरह 24 साल की उम्र में ही हो गयी थी ।परिवार बिलकुलबाल्मीकि महाराज की रामायण की तरह था । बहुत प्यार था तीनो भाइयो में , वो बीच के भाई थे ।दसरथ मतलब रामप्रकाश जी भी सेवा से निवर्त हो गए थे । शादी को अब 9 साल हो गए है पर उनके घर में अभी तक कोई बच्चा नही हुआ । छोटे भाई के भी दो बच्चे हो गए । बड़े के बच्चे तो जवान हो चले थे ।जिनको वो अपने बच्चो की तरह ही मानते रहे थे अभी तक ,पर बच्चे बस अपने काम , बढ़िया खाना, और पैसे के लिए ही उन्हें अपना मानते थे ।
काम हो जाने पर टा - टा कर देते और वो राजू चाचा के राजू चाचा ही ही रह जाते थे पापा ना कहलाये गए ।और दुसरे की थाली को देख कर अपना पेट नही भरता इसी तरह अभी तक बच्चो के प्यार के लिए राजू चाचा भूके ही थे ।
अपनी छोटी सी प्राइवेट नोकरी मे बहुत पैसा लगा दिया था इलाज़ में ,पर कुछ फायेदा न हुआ ।एक बार तो बड़े भाई के कहने पर उन पर भी दाव लगा दिया की वो तिसरा बच्चा उनके लिए पैदा करेंगे । पर उनकी भाभी ग्रवस्था मे भी करवाचोथ के वर्त पर पूर्ण भूखी थी हर भारतीय नारी के मानिद ।और अपने छोटे से बूटी पार्लर पर होने वाली कमाई के लालच को न छोड़ पाने के कारन , दर्द होने पर भी डोक्टर के पास नही गयी और ५ ० /-रुपे प्रति हाथ के दर से सुबह से शाम तक मेहँदी लगाती रही और अगले दिन अस्पताल मे भर्ती हुई और वहा रे उनकी किस्मत !अगले ही दिन बच्चा हुआ भी तो मरा हुआ ।पर दुःख इसलिए बड गया की वो लड़का था । कुल मिलाकर 70 -80 हज़ार रुपे लग गए भाभी के देखभाल और इलाज़ मे , पर नतीजा कुछ न निकला ।जिन्दगी भर का एहसान भी रह गया बड़े भाई का ।
सहर के डोक्टर कम पड गए, दिल्ही तक हो आये थे ।मेरठ में भोले नाथ का कलिपल्टन ,मथुरा, बन्दाबन , बद्रीनाथ - केदारनाथ मन्दिर तो क्या ? रूडकी के प्रान कलियर की दरगह ,सरधना का बेगम समरू का चर्च ,शीसगंज के गुरु जी सब को तो मनाया पर , किसी को दया नही आई , कोई नही माना ।अब भी बहुत सारे साधू - संत ,दरवेश ,पीर - मुनीर आशीर्वाद के नाम पर धन लीला का खेल रहे थे ।
यारो - दोस्तों का कहना ये था , की जवानी के दिनों में बहुत लडकियों को प्यार के नाम पर धोका दिया था । राजकुमार जी ने इसलिए उन लडकियों की बददुया से ही ये सब हो रहा है ।
अरे ! उन के साथ खाना ,पीना, घूम- फिर चुके थे ।पर दिल्लगी ही रही । दिल की लगी नही बनी कोई ।या समाज और घरवालो का डर बहुत था उस समय ।चहा कर भी लव मेरिज नही कर पाए ।पर इसी काल मे एक दो बार मन ही मन दूसरी शादी का विचार बनाया भी पर घर मे किसी को बोल पाने की हिम्मत ही न हुई ? साली पर बहुत डोरे डाले पर बड़ी बहन को तलाक देकर छोटी से शादी करने को कोन तैयार होता ? सो मामला शुरूहोने से पहेले ही ख़तम ।
एक दिन पता चला की पास के कसबे के छोटे से हॉस्पिटल की नर्से , बच्चा दिलवा सकती है । बहा बिन बिहाई लडकिया और लड़के की चाहत में 2 -3 लडकियो को जन्म दे चुकी महिलाये , अपने पाप कर्मो को और बढाने आती है ।काफी इंतजार के बाद ,बहा भी कोई लड़का नही मिला ।बहा भी लडकियों का मौसम चल रहा था ।20 हज़ार अग्रिम पानी में गया ।नर्से भी काम न आई ।नही तो उसे दोनों तरफ से कमाई होनी थी ।
कई राज्यों के अनाथ आश्रमो से संपर्क किया गया पर उनकी सरकारी नोकरी न होना , स्थायी सम्पति की आवश्यकता और बहुत सारी प्रक्रिया पूर्ण न कर पाने के कारण , बहा भी काम नही बना । बच्चा गोद लेना कितना मुस्किल है ? गरीबो के लिये ,अब पता चला उनके चहने वालो को ।हमारे देश से विदेशियों को आराम से बच्चे मिल जाते है ।गोद लेने के नाम पर ,उट दोड़/ घर का काम और बाकी कामो के लिए, पर जरुरत मंदों को कभी नही ।
रोज़ अखवार भी देखे जाते थे पर लावारिश बच्चो में भी सब लडकिय ही होती थी । लगता तो ये था की पुलिस भी लडको को कुछ ले दे कर कही ठिकाने लगा देती है । या बस भारत में लडकिय ही लावारिस होती है ।लडको के वारिस तो हर जाति धर्म समाज और घर मे होते है
अचानक ,आशा की एक किरण नही , पूरा सूरज दिखाई दिया । जब शहर मै एक नई लेडी डोक्टर लन्दन से पड़ कर आई और पड़ोस के एक दोस्त के यहा एक तपस्वी स्वामी जी के असिर्वाद से लड़की हीपैदा हुई , शादी के 5 सालो के बाद ।अब बड़े उत्सह से दोनों टोटके साथ ही चले । दोनों ने ही साधारण इलाज़ किया और लगभग 6 महीने में ही खुसखबरी मिल गयी ।एक साल मै बालक हो गया और जादू हो गया । असंभव भी संभव हो गया ,पर भगवान की लीला बड़ी नियारी है ! राजकुमार जी के यहा लक्ष्मी आ गयी ।
पर बड़े खुस थे ! यारो को दारू / मुर्गा की पार्टी दी गयी और महोल्ले बालो को माता के जागरण के साथ भंडारा टाइप दावत । बिना पूछे वो बोलते थे, चलो अच्छा है ! लड़की हुई !..........सच में उनके घर मे लक्षमी आ ही गयी ।जय लक्ष्मी माता की !!!
लेखक - रोहित ,
ग्राम - खानपुर
पोस्ट - थानाभवन
जिला -शामली (ऊ ,प्र )