भईया - 2 ,
हा तो अब घर की बड़ी बहु रूचि बहुत सेवा भाव से माता -पिता और भाइयो की सेवा करने लगी थी । पर आखिर कब तक ? इधर रघु जी भी नोकरी से सेवा निवर्त हो गए थे ।पेंसन थी नही और जमा सारे पैसे पहेले लड़की की शादी में लगा दिए फिर प्रकाश जी की शादी में सारे खाते खाली हो गए बड़ा लड़का जो था ।जिसके होने पैर भी बहुत बड़ी दावत होई थी अब तो खैर शादी हुई थी , दारू की नदिया बहा दी थी ।मुर्गे कई दिन तक घर से न निकले कही शहीद न होना पड़े ।अब फण्ड तक के पैसे मकान मै लगा दिए सोचा अब करना क्या है ? पैसो का 4-5 लाख बचेये और दोस्तों को बियाज पर दे दिया जहा से महीने बार आमदनी होने लगी ।और अब दुसरे लड़के की भी नोकरी लग गयी थी बैंक मै मेनेजर जिस कारण कोई समस्या न रही ।
इधर प्रकाश जी की प्रथम पुत्र हुआ फिर 3 सालो बाद एक लड़की हुई और एस बीच एक लड़की की जन्म लेने से पहेले ही हत्या भी करवा दी गयी रूचि जी के डोक्टर आंटी की मदद से
।जब की वे देश की सेवा कर रहे थे और हर बार सारा काम पुष्प जी ने ख़ुशी - ख़ुशी सभाल लिया और अपनी लड़की को बुला लिया सुसराल से मदद के लिए । परिवार में नया जीवन आ गया मानो रघु जी तो बस मानो जवान ही हो गए ।हस्पताल का सारा काम सभाल लिया ।खुल कर खर्च किया ।मनो भविस्ये के लिए निवेश कर रहे हो ।पर भविस्ये देखा किसने है ? पर अब बक्त गुजर रहा था , बच्चे हो गए थे घर की राजनीती में सत्तापरिवर्तन का असर होने लगा था । पुष्पा जी को सेवा की आदत हो गयी थी और बहु को सेवा की कीमत पता चल गयी थी धीरे - धीरे खाने के समय पर ही बच्चे रोने लगे थे जिससे खाने बालों को खाना जहर लगने लगता था । और किस के दिल में क्या है भगवन ही जान सकते है और सेवा होने कब तक थी ?
, जब तक की उनके बच्चे बड़े हो न जाये ।नही तो बहुत परेशानी होने वाली थी । प्रकाश जी ( भईया ) की नोकरी सेवा सदा दुर्गम इलाकों में रहेने बलि थी जहा न स्कूल होने थी और ना परिवार के आवास , अच्छा खाना मिलना भी मुस्किल था । यहा दोनों बच्चे खुशी - ख़ुशी अपने चचाओ के साथ अपनी शिक्षा ले ही रहे थे । उन्हें लाना ले जाना पिता के सारे सब काम अब चचाओ की मुख्य जिम्मेदारी थी ।प्रकाश जी का लड़का पाचवी मै आ गया और लड़की प्रथम कक्षा मै ।अब खेल बदल गया था ।
हा तो अब घर की बड़ी बहु रूचि बहुत सेवा भाव से माता -पिता और भाइयो की सेवा करने लगी थी । पर आखिर कब तक ? इधर रघु जी भी नोकरी से सेवा निवर्त हो गए थे ।पेंसन थी नही और जमा सारे पैसे पहेले लड़की की शादी में लगा दिए फिर प्रकाश जी की शादी में सारे खाते खाली हो गए बड़ा लड़का जो था ।जिसके होने पैर भी बहुत बड़ी दावत होई थी अब तो खैर शादी हुई थी , दारू की नदिया बहा दी थी ।मुर्गे कई दिन तक घर से न निकले कही शहीद न होना पड़े ।अब फण्ड तक के पैसे मकान मै लगा दिए सोचा अब करना क्या है ? पैसो का 4-5 लाख बचेये और दोस्तों को बियाज पर दे दिया जहा से महीने बार आमदनी होने लगी ।और अब दुसरे लड़के की भी नोकरी लग गयी थी बैंक मै मेनेजर जिस कारण कोई समस्या न रही ।
इधर प्रकाश जी की प्रथम पुत्र हुआ फिर 3 सालो बाद एक लड़की हुई और एस बीच एक लड़की की जन्म लेने से पहेले ही हत्या भी करवा दी गयी रूचि जी के डोक्टर आंटी की मदद से
।जब की वे देश की सेवा कर रहे थे और हर बार सारा काम पुष्प जी ने ख़ुशी - ख़ुशी सभाल लिया और अपनी लड़की को बुला लिया सुसराल से मदद के लिए । परिवार में नया जीवन आ गया मानो रघु जी तो बस मानो जवान ही हो गए ।हस्पताल का सारा काम सभाल लिया ।खुल कर खर्च किया ।मनो भविस्ये के लिए निवेश कर रहे हो ।पर भविस्ये देखा किसने है ? पर अब बक्त गुजर रहा था , बच्चे हो गए थे घर की राजनीती में सत्तापरिवर्तन का असर होने लगा था । पुष्पा जी को सेवा की आदत हो गयी थी और बहु को सेवा की कीमत पता चल गयी थी धीरे - धीरे खाने के समय पर ही बच्चे रोने लगे थे जिससे खाने बालों को खाना जहर लगने लगता था । और किस के दिल में क्या है भगवन ही जान सकते है और सेवा होने कब तक थी ?
, जब तक की उनके बच्चे बड़े हो न जाये ।नही तो बहुत परेशानी होने वाली थी । प्रकाश जी ( भईया ) की नोकरी सेवा सदा दुर्गम इलाकों में रहेने बलि थी जहा न स्कूल होने थी और ना परिवार के आवास , अच्छा खाना मिलना भी मुस्किल था । यहा दोनों बच्चे खुशी - ख़ुशी अपने चचाओ के साथ अपनी शिक्षा ले ही रहे थे । उन्हें लाना ले जाना पिता के सारे सब काम अब चचाओ की मुख्य जिम्मेदारी थी ।प्रकाश जी का लड़का पाचवी मै आ गया और लड़की प्रथम कक्षा मै ।अब खेल बदल गया था ।