| RAKSHA SUTRA . LOVE OF SISTERS... रक्षाबंदन एक ऐशा उत्सव है जो हिन्दू धर्म की एक विशिष्ट भावना को दिखाता है !शास्त्रों के अनुसार पहेली बार देवता इन्र्द को उनकी पत्नी ने रक्षा सूत्र बंधा था दानवो से बचने के लिए । फिर माध्य काल में गुजरात की रानी कर्णावती ने मुग़ल बादशा हुमायु को राखी बेजी और उसने भी उसकी लाज रखी ।ये धागा विस्वास और रक्षा का प्रतीक है ।रिश्ते ही तो है जो हमें सब कुछ देते है ये भाई -बहेन के बीच पवित्र रिस्ते को मजबूत करता है ! दूरिया कितनी भी हो पर भावना तो रहेती ही है । यु तो हर रिश्ते का अपना महत्व होता है पर जब बहेन बेटी की बात आती है तो सबका दिल भर जाता है । माँ के साथ बहेन ही तो होती है जो घर को संभालती है ,याद !!..........है जब हम छोटे थे ! हम सोती हुई बहेन को बार बार परेशान करने को बोलते की " बना ले " फिर थोरी देर में हलके से हिला देते " की बना ले ! वो कहेती मम्मी ............... देख लो !!इनको, अब चाए की तो मम्मी भी शोकिन है हमारी ...तो वो बस पेले पीले दंत दिखाती रहती। पर कहती कुछ नही थी ! बैसे आमतोर पर चाय का नाम लेने की जरुरत नही पड़ती थी । बस चाये तैयार !और हर घर में इडली डोसा , छोले -भटूरे ,चाट, दाल मखनी ,चोव्मीन ,मेग्गी , हलवे, दाल बाटी- पानी पूरी , आलू की टिक्की, बेसन के चीले , पिज्जा कोल्ड, कॉफ़ी , मांगो शेक , मिक्स -जूस ,पनीर टिक्का ,पनीर कबाब , ICE -CREME जैसी चीज़े बहेने ही बनती है । मम्मी तो बस खाना बनाने में ही निपुण होती है । पापा जी को पहली बार उसकी शादी में ही आंसू भरे देखा था मैंने ! आज मै कही भी हो पर गर्मियों की छुट्टियों में उसका इंतजार तो रहेता ही है उसके हाथ का खाना 15 -20 साल पुरानी यादे ताज़ा कर देती है ।एक बार लड़ाई भी होती है में कभी माफ़ी नही मांगता किसी से, पर उससे मांगने मे कभी शर्म नही आती !पिछली बार भी उसका हमारे "भैया " को फ़ोन करने के कारन लड़ाई हुई ! उससे पिछली बार "मै " के कारण बहस हुई ।हमारी लड़ई को बच्चे नही समझ पाते तो सब मुझ से ही लड़ने लगते है । बच्चे , बीबी , मम्मी और पापा सब उस तरफ थे मे अकेला टक्कर ले रहा था ! पर कहा तक ? मेरी बकालत के सामने कोन आता ? फिर वो रोने लगी में ये केस बिना सबूत हार गया । माफियो - सॉरी का दोर हुआ और में बहा से निकल गया नही तो ..........सब मुझे जान से ही मर देते । शाम को बाहर पार्टी का जुरमाना मुझे देना पड़ा गोल मार्केट में!आज भी हम रोज़ बाते करते फ़ोन पर .....सच iहै बचपन बापस नही आता बड़ी याद आती है वो लड़ाईया ! हैप्पी रक्षा बंदन बहेनो - भाईओ .......................... |
Thursday, August 2, 2012
रक्षाबंदन - उत्सव
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