नीतीश कुमार जी को सत्ता मिलने के मुख्य कारण बी जे पी से अलग होकर उन्होंने अपने राजनेतिक भविष्य दाव पर लगा दिया है | ७ -८ सालों तक सरकार बनाने के बाद उनको टोपी विशेष पहनने की याद आई और बी जे पी साम्प्रदायिक हो गयी | कहा तो उनके प्रधानमंत्री पद पर बेठने की चर्चा चल रही थी पर अब उनकी स्थिति दुबारा विहार का मुख्यमंत्री बनने की भी नही रही |मोदी जी का साथ ना देना उनकी गलती रही , पर जो गया वो हो गया जिसे बदला नही जा सकता | जे डी यु की राजनीतिक मौत उनकी अति म्हात्वकन्षा के कारण आसन्न है|कुछ समय पहेले तक जिनको प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ मे माना जा रहा था और बर्तमान मे उनकी स्थिति मुलायम सिंह ,मायावतीजी और ममता जी , प्रकाश करात जैसे छत्रपो से भी बदतर हो गयी है | तीसरा मोर्चा कांग्रेस की बी टीम ही तो है |जो इतिहास मे , आज या कल जो कांग्रेस के साथ लिए घुटने के बल , रेंग कर चले हो और जो छदम धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जनता को मुर्ख बनाने और गैर कांग्रेसी गैर बी जे पी वोटो को लुभा कर कांग्रेसी सरकार बनवाकर , बक्त आने पर सत्ता मे स्वम् बेठने के लिए बनाई गयी है | आतकबाद के मुद्दे हो या रोजगार की समस्या , लालू जी के पार्टी का पुन्र उदय हो , या कांग्रेस से समर्थन ले कर करी गलती जिससे उनका सत्ता मोह सामने आया है जिस प्रकार उनकी
छवि अब दिन प्रतिदिन धूमिल हो रही है | उससे जापानी पुराणिक योद्धा सामुराई की हारकारी की याद आती है | राजनीति मे सही समय पर सही निर्णय से ही लाल किले तक पहुचा जा सकता है |नही तो आसमान से धूल मे मिलने मे समय नही लगता |
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