Wednesday, April 10, 2013

                                                      आशांति की और  है घाटी !                ( अंक १७ अप्रैल २०१३ )
  हमारे देश के सिरमौर राज्ये जम्मू - कश्मीर को आरम्भ  से ही  लालच की क्षुद्र  राजनीती ने बर्बाद किया है । अभी तक 
 देश के हर दल हर नेता ने समस्या के हल को नही , समस्या को बनाये रखने मे  अपने लाभ को देखा है । उमर अब्दुल्ला  आने वाले २० १ ४  के चुनावो को आते देख ,अब दिल्ली  पर पक्षपात का आरोप लगा कर  जनता को दिल्ली से  नाराजगी   दिखा  रहे है ।जबकि चुनाव मे  कांग्रेस को साथ रखते है । सासत्र सेना विशेस अधिकार अधिनियम को हटाने की मांग हो या अफजल गुरु की फासी  से जुड़े मामले  या लियाकत साह की गिरफ़्तारी के कारण  विफल होती आतंकवादी पुनर्वास निति  तो चलो ठीक हो सकती है पर उस से होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होंगी ? या इतने वर्षो मे  उनके या उनके दल या अन्य दलों के पास कश्मीर समस्या का  सर्वमान्य हल है ? अब गेंद जनता के पाले  मे  है उन्होंने शांति और अशांति दोनों को देखा है । 

Sunday, March 24, 2013

मंदिरों और घरो मे  जय माता ! जय माता !की ढोंग करते लोग !
अपने घर मे  जा माता , जा माता,की गाली  देते लोग ! 

जो अपने माँ - बाप   न हुआ , उसके बच्चे उसके कैसे होंगे ?
आदर्श बनने  से ही आदर्श जीवन प्राप्त होता है .....नही तो सारे  क्लैश बने रहेते है ...

जब हम छोटो पर वार  करते है।  तो उसे अपने से बड़ा हो जाने के लिए मजबूर कर देते  है 
जिसमे हमारा ही नुकसान होता है ......छोटो को छोटा रहेने दो अपने को बड़ा बनायो .....

जब हम कोई गलत- सही  काम करते है । तो उस समय बड़ा अच्छा  लगता है पर । 
एक बक्त के बाद जब गलती समज आती है तो ठीक नही हो सकती ....... बस पछता  सकते है 

 अपनी परेशानियों के लिए ,हम दुसरो को दोष देते है । पर सारे  दुखो का कारण .......
अपना लालच ही तो है .....

छोटे लालच मे लोग लड़ते है , और अपने बड़े फायेदे का नुकसान कर
 बैठते है । सोने का अंडा देने बलि मुर्गियों को मारा  नही जाता ।

सच्चा प्यार माँ-बाप का ........बाकि सब लालच है |
मकान ; दुकान पैसा सब आना जाना है ।
जहा  आज माँ -बाप खड़े है बहा  तक सबको जाना है ।
बहा  से बच  कर  निकल भी गए तो खुद के दर तक तो  सबको जाना है ।

जूठे  सच्चे बहाने बनाकर , लड़ाई  झगडे करने बाले ,
खुद गुलामी करते है ,माँ - बाप का का प्यार तोलते है !
अगर आपका कोइ एक रिश्ता भी कमजोर होता है तो
कमी किसकी ?
 अगर कोई एक ही रिश्ता जिन्दा हो बाकि सब
खत्म  ,तो गलती किसकी ,
 अपना काम निकल जाने पर
एहसान को मानने के जगहे आँखे दिखाकर , कोन  से रिश्ते जिन्दा रहे सकते है ?
लालची लोग अपने कर्म पर नही दुसरो की सम्पति के लिए जीते  है ।
जागो लोगो जागो ...........