Monday, July 9, 2012

आजाद लड़की -2

                                                                              आजाद लड़की  -2
अब यह  कहानी अलग मोड़ ले लेती है ।क्योकि हमारी हेरोइएन खुशबू  अब ओर भी आज़ाद हो गयी थी पूरी कालोनी में उसकी कहानी सुनी जा चुकी थी ।उसमे भी अब एक अलग ही आत्मविश्वास आ गया था ।कुछ कानाफूसी भी हो रही थी। की बिल्लियों  के झगडे में बंदर रोटी खा रहा है और वो तो बंदर भी तो  बड़ा ताकतवर है पूरा  लंगूर है ।
 हर आजाद नारी को पुरुष बदनाम तो करता ही है ।किसे फर्क पड़ता है इन बातो का ?नारी आजादी बहुत  बड़ी चीज  है 
जैसे - जैसे शिक्षा के साधन बड़े है आजादी भी बड़ी है बच्चो की सोच भी खुली है माँ- बाप की ।आजाद लड़के लडकिया  अब BPO की नोकरी मे मिलने बाली होलीडे में घर नही , किसी टूरिस्ट स्थान पर जाने का प्रोग्राम बनाते है ।अजी  छोड़ो ! अपनी कहानी पर आओ !यही कमी है, इस लेखक में कही  की बात कही जोड़ देता है ।

हा अब खुशबू तो स्वमसिद्ध बन गयी थी कुछ लोगो का अब इंटरेस्ट भी नही रहा ।उस बात के बाद अब कहानी में एक नई कन्या आती है जिसका नाम मनीषा है वो भी कुछ ट्रेनिंग पर आई है । पर बस 3 महीने को ,बिलकुल मेमने जैसी खुबसूरत है ! अब लड़की आई तो बनाने बाले ने उसके लिए एक लड़का भी बनाया होंगा वो लड़का खाली ग्रुप का लम्बू भी तो हो सकता है !कोशिश करना हर लड़के का धरम जो है । जिसका नाम  ऑफिस में सुनील दर्ज था । वो था तो LDC पर बहुत बड़े घर का लड़का था  अरे ! शादी के बाज़ार में सरकारी नोकरी ही तो बिकती है आज भी  ।एक वेतन के बराबर तो पैसा उसके घर से ही आता था ।और जीजा जी यही  पर  बड़े इंजिनियर है फिर डर कहे का ? सो चालू रहते है हर टाइम !
तो भैया , पड़  गए इस घनचक्कर में !कुछ दिन तो अपने आप कोशिश की , बही पुराने तरीके , रस्ते में खड़े होना ,ढूध - कोर्न्फ्लेक्स जैसे  नास्ते के लिए कैंटीन जाना जबकि बहन घर पर आलू के पराठे बना कर रखती थी ।ये बात तो आपको बताने की जरूरत नही है न  ? की मनीषा के लिए ये त्याग हो रहा था ।पर यारो बड़े से बड़ा बदमाश भी प्रेम इजहार से डरता है । वो ही कमी यह भी सामने आरही थी ।
इस काम के लिए कार्यालय की भेंजी टाइप लडकियों से सहायता मांगी गयी ।कुछ हिचकिचाहट के बात सब बड़ी ख़ुशी से सहायता के लिए तेयार हो गयी मानो वो सब इसी बात का इंतजार केर रही थी ।पर अब भी कोई रास्ता नही बना ।
फिर एक खास बहन ने राय  दी की खुशबू  ( बही पुरानी हेरोएन ) की सहायता ली  जाये  ! वो ही अब सब नयी तितलियों की बड़ी अम्मा है !अब मामला फस गया !दोस्तों को पता चला तो स......... मारंगे जरुर गद्दारी पर  !सो चुपचाप  भईयाजी मिलने गए, माता जी से ! ठ्लुया दल के पुराने बॉस को पता चलना ही था ..पर गुस्सा पी  गए। अब हमारी कोई जिम्मेदारी नही है ! पर ये तो आत्महत्या कर  रहा हें  ।" हमसे बोलता तो सीधे बात करवा देते,
facebook.comएक दिन मैस  में बुला या भी था, पर आया ही नही तो हम क्या करे ?  अब खुशबू ने क्या सहयता की? ये तो पता न चला। पर कुछ हुआ भी नही< और मनीषा को पता भी चल गया  और वो मोर्निंग वाक पर जाने लगी ... पर हमारे शेर को खुद कुछ करना नही था तो होता क्या ? धीरे_ धीरे टाइम निकल रहा था उसे जाना था ।तो फिर एक दिन एक बहन जी को उसने अपनी दोस्ती का पैगाम ले कर भेजा ।अब लगता है की मामला इस लिए उलझ रहा है की सुनील भैया ने अपनी होने वाली दोस्त के लिए बहुत  कीमती तोहफा  खरीद लिया था और उस पर मनीषा का नाम लिखा था  तो किसे ओर  को दे भी नही सकते थे । इस लिए अब मामला मोहब्बत का नही तोहफे के अंतिम सस्कार का बना हुआ था।नही तो मनीषा नाम की अब किस लड़की को खोजे ?प्रेम के तोहफे को कहा  फेक दे ? कब तक छुपा कर रखे ? घर बालो से  इस  बात को ? अब उलझे मामले में दो अलग घटनाये हो गयी जिससे कहानी  ही बदलनी पड  गयी  मनीषा का टाइम पूरा हो गया और चुपचाप वो दिल तोडकर निकल गयी . पर उसकी face book प्रोफाइल में दो नये नोजवान अधिकारी जरुर जुड़ गए थे जिनके साथ कभी कभी वो देखि जाती थी ।खबरी लाल ने बताया की जाने की रात को वो खुशबू से भ्रमज्ञान ले रही थी ।जिसमे युवा कन्याओ को दुनिया दारी की विशेस शिक्षा दी गयी ।जिसमे केरियर के लिए  कम कीमत में ज्यादा फायेदा लेने का गुप्त ज्ञान भी था ।और बहुत  कुछ.......... पता भी न चला की  क्या क्या समझाया  था ।  पर अचानक अपनी खुशबू अपना नो - डिमांड प्रपत्र लेकर कार्यालय में देखी गयी ? खास खबरी ने बताया की अपने अधिकारी को गन्दी गन्दी गालिया दे रही थी " मरेंगा ..मोटा ..... बंदर...कुत्ता कीड़े पड़ेंगे उसमे ...और पता नही क्या क्या पर क्यों ? टाइम से पहले बो जा रही है ? उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ गया लगता है । गुमसुम   !क्या खोया क्या पाया ? मे  उलझी हुई ।अब कोई उससे बात भी नही करता।। न तो खुदा मिला न बिसाले यार  ....... शायद आजादी की किमत ..........बहुत जायदा  चुकाई थी उसने ........
. अब तो उसकी यादे ही बाकि रही है ..........पर लडकिया अब आजाद है ....या जाएदा गुलाम हो गयी है इन शोषण यंत्रो की जो सदियों से नारियो को मुर्ख बना कर अपने उल्लू सीधे करते आ रहे है .........................


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