कावड मेला .
दोस्तों ये वो उत्सव है वो उत्तर भारत में बहुत जोर -शोर से मनाया जाता है ।N H -58 सड़क पर
दिल्ही से हरिद्वारसे गोमुख लगभग 160KM तक भोले बम भोले ही रहेते हे !आस--पास के राज्यों से लगभग 1.75 करोड़ भोले ( कावड लाने बाले ) हरिद्वार आकर गंगा जल उठाते है।कुछ उत्सहाई तो गंगोत्री ,गोमुख ,यमनोत्री तक से गंगा जल उठाते है ।और मुजफरनगर के शिव चौक से होकर .मेरठ के औगरनाथ कालिपल्तन के मन्दिर बागपत के पूरा महादेव तक ये यात्रा पहुचती है। इसके बाद अपने बोले गए मंदिर में भी जल अर्पित किया जाता है । और कावड में लाये गए .
,या अन्य साधनों से जल को पूर्वं निर्धरित शिवलिंग पर अर्पित करते है ।ये परम्परा पुर्वएतिहासिक बताई जाती है । पर असली प्रसिद्धी 90 के दसक में मि ली अब बडती जा रही है ।
सावन के महीने के आरभ से शुरू होकर शिवरात्रि तक ये भोलेमय महोल बना रहता है सारे रास्ते में तेज़ आवाज में बम बम भोले के भजन, जो हिट हिंदी हरियाणवी और पंजाबी गानों की तर्ज़ पर होते है ।जिस पर खूब नाच चलता है बाकी बम बम भोले !!!सच में बड़ा कठिन कार्य है इतनी गर्मी , कभी तेज़ बारिश .हवा में नमी ,तेज़ धुप , नंगे पैर 100-250 km तक की दुरी बोल बम 15 दिन में अपने पेरो से नाप लेते है ।
नियम बड़े कड़े होते है ।घर भी में खाना छोक के नही बनता ।मास मच्छी लहसुन प्याज बंद !खड़ी कावर रख नही सकते !बबूल ,गुलर ,कीकर के पैड के नीचे से नही निकलना। हर मंदिर मे माथा टेकना ,कपडे सात्विक हो !पर कुछ भक्त भोले का प्रसाद लेकर मस्त रहते है ,
मेडिकल की सुविधा बहुत अच्छी रहती है ।पर अधिकतर भोले कीमत देकर ही सेवा लेते है !अपनी भक्ति बेचते नही । प्राय :बहुत छोटे बच्चे ,बिकलाग ,अन्य धर्म के लोगो को भी इस सेवा को करते देखा जाता है ।
आजकल मोटर साइकिल स्कूटर साइकिल आदि से भी यही सेवा होने लगी है जो दो दिन पहेले आरम्भ होते है इसमे जल लाने से जायदा नीलकंठ ऋषिकेश तक आना जाना ही रहेता है इसमे अधिकतर नवयुबक होते है जो बाज़ार और निजी कार्यलय बंद हो जाने के कारन खाली होते है अंतिम एक सप्ताह में ।
एक होती है डाक कावर , इसमे अदिकतर हरियाना ,राजस्थान और बहारी देल्ही के बालीबाल ,होकी ,फूटबाल के टीम खिलाडी होते है ये अपनी टीम बर्दी में होते है और फिक्स टाइम में 24 घंटे से 72 घंटे या भोले की इच्छा तक जल पहुचाने का बेनर लगा कर भाग कर , रास्ता पूरा करते है ।साथ में एक-2 मोटर साइकिल बाले होते है जो TATA 407
या छोटे ट्रक में बैठे लोगो को मदत करता है ,MIKE ! म्यूजिक !हट जायो भोले !का तेज़ शोर ..........
कुछ लोग लेटकर भी दूरी पूरी करते है ।साथ में परिवार भी होते है ।
कुछ लोगो की जेब कट जाती है ।मोबाइल खो जाते है .......वो क्या करे ? ये तो होता ही है ।
बड़ी बड़ी सुंदर भोले की झाकिया चलती है जिनका अपना मजा होता है छबि देखते बनती है जिनके साथ 100 तक लोग होते है !इन की भी प्रतियोगिता होती है इनाम होते हे ।
अंगोछे /बनियान /टोपी/कावर /डंडे / त्रिशूल//इनका बाज़ार लगभग 1000 करोड़ का हो जाता है ।
रास्ते में लगने बाले मौसमी ढाबो / होटलों की कमाई अदिकतर गरीब तबको को मिलती है ।10 दिन तक सेवा शिविर में फल, मिठाई, दूध ,आलू ,पूरी,डोसा ,चोवमिन , जलेबी चाये आदि आदि का मज़ा आस--पास रहने बाले लोग भी लेते है।
लोग भोलो के सेवा करने को अपना भाग्य समजते है ।पर कुछ लोग बिना किसी भावना के आते है ।
और बदनामी पुरे उत्सव की होती है ।
मोटर साइकिल-डाक कावर जैसे साधनों के कारण दुर्घटना होती है जबकि रेल की भीड़ के कारण छत पर बेठ क्र यात्रा करने में खतरा बना रहेता है जो दुखद है ।
facebook.comनवुवक अगर इसकी गरिमा बनाये रखे तो ये मेला और भी सुहावना बन जाये !
में भी अपने मित्र राजकुमार के साथ 16/07/12 को हरिद्वार को चल दिया सुबह ही इतनी भागमभाग हो रही थी की बस।....पर पूरे मार्ग पर इतनी उर्जा थी की सरिर के रोंगटे खड़े हो गए ।पसीने में भीगे . तेज़ गर्मी में भागते युवा ,........कभी 100 मीटर भी न चल पाने वाले लोग इनकी बुराई करते है ।ये 1 .75 करोड़ लोग अगर डंडे से भी पाक पर हमला केर दे तो 2 दिन में धुल में मिला दे ये ही वो लोग है जो देश की सीमा पर जान देते है 1आँखों में आंसू आ गये ! भक्ति - शक्ति -हिम्मत -उर्जा देखकर ।जय भोले की !
दुनिया में युवाओ के इतने बड़े समागम को देख कर सरकार भी याद आ गयी की इतने लोग .......बेरोजगार है इतनी उर्जा ,जो देश के निर्माण में लगती तो भारत आज इंडिया बन जाता ।पर क्या करे ?
हां तो हम 11 बजे पहुचे सती मंदिर कनखल में , यह माँ पार्वती ने अपने पिता द्रस्क के हवन कुण्ड में कूद केर इसलिए जान दे दे थी बहा भोले नाथ को सम्मान नही दिया गया था ?फिर भोले के क्रोध के आगे कोन बचता ? सब हवन पूजा नाथ ने मिटटी में मिला दे द्र्स्क का घमण्ड धुल में मिला दिया ?
यहा बहुत लम्बी लाइन थी । सावन का सोमबार भी था ना, तो लोकल लोग भी आये हुए थे ।2 घंटे में अंदर गए ।पता नही क्यों अंदर पुजारी ने मेरे बहुत देर तक टिका लगाया ।पर कुछ पुजारी टाइप लोग धर्म का धंधा कर रहे थे । शायद ये भी जरुरी है पब्लिक भी पैसे खर्च कर हल्का महसूस करती है। पापं से मुक्ति का अहसास !
सब मंदिरों में माथा टिका कर हम चले अपने घर के लिए ! पर हमारा भोला राजकुमार भी सच्चा - पक्का हिन्दू था ।मोटर साइकिल मोड़ दी पिरान कलियर को और धुप बहुत तेज़ थी बाते और जोश ख़तम हो रहा था !पर सबीर सहाब की जियारत करे बिना हम कहा बापस आते ? पहले बड़े मामू जान की दरगह !पर पहुचे ।बहा भी पैसे की मांग धर्म के ठेकेदार कर रहे थे ।दोनों धर्म में ये बात कॉमन है वो है ठेकेदार ! जिन्हें बस पैसा ही दीखता है ।फिर सबीर सहाब के दर पर पहुचे ! मुस्लिम भाई भी भोला - भोला कह रहे थे अच्छा लगा ।कोई दीवार सी गिरती लगी ! अंदर बहुत सारे भोले थे ।लाल - हरे रंग को एक साथ देख कर अपना भारत याद आया ।काश ........अगर ये रंग हर जगह साथ हो जाये तो।......
बाहर कोई सज्जन जकात में बिरयानी बितरण कर रहे थे । गरीबो की लम्बी लाइन यह भी लगी थी। बहा से चलकर हम 3 बजे घर पहुचे सार रास्ते खाली थे ।पर निशान बाकि थे .........भोलो के कदमो के
दोस्तों ये वो उत्सव है वो उत्तर भारत में बहुत जोर -शोर से मनाया जाता है ।N H -58 सड़क पर
दिल्ही से हरिद्वारसे गोमुख लगभग 160KM तक भोले बम भोले ही रहेते हे !आस--पास के राज्यों से लगभग 1.75 करोड़ भोले ( कावड लाने बाले ) हरिद्वार आकर गंगा जल उठाते है।कुछ उत्सहाई तो गंगोत्री ,गोमुख ,यमनोत्री तक से गंगा जल उठाते है ।और मुजफरनगर के शिव चौक से होकर .मेरठ के औगरनाथ कालिपल्तन के मन्दिर बागपत के पूरा महादेव तक ये यात्रा पहुचती है। इसके बाद अपने बोले गए मंदिर में भी जल अर्पित किया जाता है । और कावड में लाये गए .
| काँवर | एक विशेष प्रकार की बहँगी जिसमें बाँस के टुकड़े के दोनों सिरों पर पिटारियाँ बँधी रहती हैं और जिसमें सामान रखकर काँवाँरथी तीर्थ-यात्रा करने निकलते हैं। |
सावन के महीने के आरभ से शुरू होकर शिवरात्रि तक ये भोलेमय महोल बना रहता है सारे रास्ते में तेज़ आवाज में बम बम भोले के भजन, जो हिट हिंदी हरियाणवी और पंजाबी गानों की तर्ज़ पर होते है ।जिस पर खूब नाच चलता है बाकी बम बम भोले !!!सच में बड़ा कठिन कार्य है इतनी गर्मी , कभी तेज़ बारिश .हवा में नमी ,तेज़ धुप , नंगे पैर 100-250 km तक की दुरी बोल बम 15 दिन में अपने पेरो से नाप लेते है ।
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| कावारिया |
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| बम बम भोले |
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| पूरा महादेव बागपत मेरठ |
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| भोले ! |
दूर दूर तक भगवा रंग दिखाई देता है ।खास बात तो ये है की हर इंसान को" भोले; कहकर ही पुकारा जाता है बस यही पहचान रहती है बाकी सब बम भोले !बैसे अब तो भोली भी आनेलगी है ।दिमाग से सब बते हट कर बस भोले ही भोले रहेते है ।इस यात्रा में अनेक रोचक प्रसंग होते है ,जैसे इस में खाने -पीने और रुकने की कही कोई कमी नही होती ,राजस्थान ,मध्य प्रदेश, दिल्ही, उत्तेर प्रदेस MP जैसे अनेको राज्यों से लोग सेवा के सिविर लगते है ।जहा हर बस्तु निशुल्क मिलती है ।नहाने के नल, नाचने को DJ !खाने को आलू पेरी से लेकर , डोसा इडली तक सम्पूर्ण भारत के खाने और नास्ते !
नियम बड़े कड़े होते है ।घर भी में खाना छोक के नही बनता ।मास मच्छी लहसुन प्याज बंद !खड़ी कावर रख नही सकते !बबूल ,गुलर ,कीकर के पैड के नीचे से नही निकलना। हर मंदिर मे माथा टेकना ,कपडे सात्विक हो !पर कुछ भक्त भोले का प्रसाद लेकर मस्त रहते है ,
मेडिकल की सुविधा बहुत अच्छी रहती है ।पर अधिकतर भोले कीमत देकर ही सेवा लेते है !अपनी भक्ति बेचते नही । प्राय :बहुत छोटे बच्चे ,बिकलाग ,अन्य धर्म के लोगो को भी इस सेवा को करते देखा जाता है ।
आजकल मोटर साइकिल स्कूटर साइकिल आदि से भी यही सेवा होने लगी है जो दो दिन पहेले आरम्भ होते है इसमे जल लाने से जायदा नीलकंठ ऋषिकेश तक आना जाना ही रहेता है इसमे अधिकतर नवयुबक होते है जो बाज़ार और निजी कार्यलय बंद हो जाने के कारन खाली होते है अंतिम एक सप्ताह में ।
एक होती है डाक कावर , इसमे अदिकतर हरियाना ,राजस्थान और बहारी देल्ही के बालीबाल ,होकी ,फूटबाल के टीम खिलाडी होते है ये अपनी टीम बर्दी में होते है और फिक्स टाइम में 24 घंटे से 72 घंटे या भोले की इच्छा तक जल पहुचाने का बेनर लगा कर भाग कर , रास्ता पूरा करते है ।साथ में एक-2 मोटर साइकिल बाले होते है जो TATA 407
या छोटे ट्रक में बैठे लोगो को मदत करता है ,MIKE ! म्यूजिक !हट जायो भोले !का तेज़ शोर ..........
कुछ लोग लेटकर भी दूरी पूरी करते है ।साथ में परिवार भी होते है ।
कुछ लोगो की जेब कट जाती है ।मोबाइल खो जाते है .......वो क्या करे ? ये तो होता ही है ।
बड़ी बड़ी सुंदर भोले की झाकिया चलती है जिनका अपना मजा होता है छबि देखते बनती है जिनके साथ 100 तक लोग होते है !इन की भी प्रतियोगिता होती है इनाम होते हे ।
अंगोछे /बनियान /टोपी/कावर /डंडे / त्रिशूल//इनका बाज़ार लगभग 1000 करोड़ का हो जाता है ।
रास्ते में लगने बाले मौसमी ढाबो / होटलों की कमाई अदिकतर गरीब तबको को मिलती है ।10 दिन तक सेवा शिविर में फल, मिठाई, दूध ,आलू ,पूरी,डोसा ,चोवमिन , जलेबी चाये आदि आदि का मज़ा आस--पास रहने बाले लोग भी लेते है।
लोग भोलो के सेवा करने को अपना भाग्य समजते है ।पर कुछ लोग बिना किसी भावना के आते है ।
और बदनामी पुरे उत्सव की होती है ।
मोटर साइकिल-डाक कावर जैसे साधनों के कारण दुर्घटना होती है जबकि रेल की भीड़ के कारण छत पर बेठ क्र यात्रा करने में खतरा बना रहेता है जो दुखद है ।
facebook.comनवुवक अगर इसकी गरिमा बनाये रखे तो ये मेला और भी सुहावना बन जाये !
में भी अपने मित्र राजकुमार के साथ 16/07/12 को हरिद्वार को चल दिया सुबह ही इतनी भागमभाग हो रही थी की बस।....पर पूरे मार्ग पर इतनी उर्जा थी की सरिर के रोंगटे खड़े हो गए ।पसीने में भीगे . तेज़ गर्मी में भागते युवा ,........कभी 100 मीटर भी न चल पाने वाले लोग इनकी बुराई करते है ।ये 1 .75 करोड़ लोग अगर डंडे से भी पाक पर हमला केर दे तो 2 दिन में धुल में मिला दे ये ही वो लोग है जो देश की सीमा पर जान देते है 1आँखों में आंसू आ गये ! भक्ति - शक्ति -हिम्मत -उर्जा देखकर ।जय भोले की !
दुनिया में युवाओ के इतने बड़े समागम को देख कर सरकार भी याद आ गयी की इतने लोग .......बेरोजगार है इतनी उर्जा ,जो देश के निर्माण में लगती तो भारत आज इंडिया बन जाता ।पर क्या करे ?
हां तो हम 11 बजे पहुचे सती मंदिर कनखल में , यह माँ पार्वती ने अपने पिता द्रस्क के हवन कुण्ड में कूद केर इसलिए जान दे दे थी बहा भोले नाथ को सम्मान नही दिया गया था ?फिर भोले के क्रोध के आगे कोन बचता ? सब हवन पूजा नाथ ने मिटटी में मिला दे द्र्स्क का घमण्ड धुल में मिला दिया ?
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| साईं बाबा सिर्डी |
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| द्रस्क मन्दिर में गंगा जल का अर्पण , सूर्य देव को . |
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| स्नान करने उचित घाट |
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| विशाल प्रतिमा भोले नाथ माँ के शव को उठा कर क्रोध मुद्रा में ! |
सब मंदिरों में माथा टिका कर हम चले अपने घर के लिए ! पर हमारा भोला राजकुमार भी सच्चा - पक्का हिन्दू था ।मोटर साइकिल मोड़ दी पिरान कलियर को और धुप बहुत तेज़ थी बाते और जोश ख़तम हो रहा था !पर सबीर सहाब की जियारत करे बिना हम कहा बापस आते ? पहले बड़े मामू जान की दरगह !पर पहुचे ।बहा भी पैसे की मांग धर्म के ठेकेदार कर रहे थे ।दोनों धर्म में ये बात कॉमन है वो है ठेकेदार ! जिन्हें बस पैसा ही दीखता है ।फिर सबीर सहाब के दर पर पहुचे ! मुस्लिम भाई भी भोला - भोला कह रहे थे अच्छा लगा ।कोई दीवार सी गिरती लगी ! अंदर बहुत सारे भोले थे ।लाल - हरे रंग को एक साथ देख कर अपना भारत याद आया ।काश ........अगर ये रंग हर जगह साथ हो जाये तो।......
बाहर कोई सज्जन जकात में बिरयानी बितरण कर रहे थे । गरीबो की लम्बी लाइन यह भी लगी थी। बहा से चलकर हम 3 बजे घर पहुचे सार रास्ते खाली थे ।पर निशान बाकि थे .........भोलो के कदमो के
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