Wednesday, September 12, 2012

आजाद लड़की -3

आजाद लड़की -3
                          दोस्तों अब ये आजाद लड़की , कहानियों की एक सिरीज़ बन गयी है जिस को जोडकर एक उपन्यास बनाया जा सकता है । समाज के बदलते नजरिये की तस्वीर बनाने बैठा  हु । कोई रंग उपर नीचे  हो जाये तो बताना जरुर ।
हुआ ये की हमारे खाली  समहू के नेता जी ही एस बार फस गए ।फसे तो पिछले 5-6 वर्षो से थे । पर वो लड़की रामपुर जैसे छोटे सहर  की आम घरेलु टाइप लड़की थी जिससे मिलने जाना अब मुस्किल हो चूका था । क्युकी बहुत  पुराना सम्बन्ध था। दिल भी भर गया था । नये पन  की तलाश में मुह मारते  फिरते थे \\ और हा  फसना तो हर पुरुस चहता  है पर हिम्मत कितनो की है ? लड़की थी हमारे बड़े शाब के साले  की खास दोस्त पूजा  जो हरिद्वार में रहती थी और किसी गाव में उसके पिता जी का जमिदाराना था तो  पैसा कोई समस्या नही थी ।बस डॉक्टर बनाने के लिए शहर भेजा था  घर बालो ने ,पर उसने पढाई दिल के डोक्टर के लिए शुरू कर दी थी ... बिलकुल बोल्ड &; बुटिफुल बाले अंदाज में ...शाब के साले  ने उसका नम्बर दिया अपने ग्रुप के बॉस को , उसने दो तीन  मिस काल मार  कर बाते बनाना शुरू कर दिया ( आजकल यही तरीका चल रहा  है मोबाइल से नारी पटाने  का , पता नही क्यों ? बार बार प्रेषण होने पर भी नारी, मिस कॉल बाले से यही पूछती है की आप कोन  बोल रहे है ?आपको किस से बात करनी है ? और दो चार दिन में नारी अपना अकेलापन दूर करने की दवा खा लेती है ) और जब  बता दिया गया  की मोबाइल का नंबर कहा  से लिया है  , तब मामला एकदम फिट हो गया ।साले  शहाब  के रुतवे का असर , और पक्की सरकारी नोकरी बाला लड़का लव मेरिज करने को कहा  मिलते है ? ये बात अलग है की साले सहाब  खुद सविदा पर नोकरी कर रहे थे ,दोनों  दोस्त कभी भी खाली हो सकते थे । दुनिया -जहां की बाते होने लगी ,। face book  पर फेस दिख ही रहे थे , रात दिन चैन नही रहा मानो  दोनों एक दूजे के लिए ही बने है /थे ।पर मिले अब है| जब 5-7 बार लव यु बोल सुन चुके थे  पर उन पुरनी बातो को अब कोन पूछता है जी ? अब तो आज - अभी पर दुनिया चलती है जी ! पल पल में बफादरी बदलती है !लड़की खुबसूरत हो और लड़का सरकारी अधिकारी हो तो कुछ भी हो सकता है ।न जाने कितनी लडकियों की जिन्दगी इन  कनाडा बाले और नकली नोकरी करने बाले लडको ने ख़राब करी है ? फिर भी होती रहेंगी ।सुंदर भविष्य का  लालच आँखों पर पर्दा डाल  देता है ।चाहे  लड़की के माता पिता हो या खुद मोर्डन लड़की !यु तो ठगों में ठगी होती नही है ! पर नुकसान - फायेदा जोड़ा जाये तो हो भी जाती है ।और जब भी ठगी होती है उसके पीछे नही आगे सामने ही लालच साफ साफ दिखाई देता है ।पर देख कोई नही पता है ।

अब हुआ ये की हमारे बॉस को खास आमंत्रण मिला । मिलने आने का , बात चीत के एक सप्ताह के अंदर , शायद पूजा को लगा की लड़का हाथ से न निकल जाये तो ...........कुछ होना जरुरी है !जिस के लिए लडकी  को कुछ तो  खास  करना ही होता है  ?उधर भगवन भी  मेहर वान थे , पुरानी बाली  के घर पर बात खुल गयी थी। सो बातचीत बन्द   थी ।मोबाइल पर उसका फ़ोन नही आता था । दिल उदास था रात को लाइट तो थी । नींद नही थी । तो जी धार्मिक नगरी में अधर्म के लिए पहुच गए बॉस !

गए तो 3 दिन के लिए थे पर " सैर कर दुनिया की ग़ालिब , जिंदगानी फिर कहा ? जिंदगानी भी रही तो ,नोजवानी फिर कहा ?
की तर्ज़ पर 15 दिन तक , हनीमून / लव इन / लाइव इन  मना  डाला । थैंक्स नेट बैंकिंग ! जो उधार लेने देने की लिए बड़ी सुबिदा है ।15 दिनों में दुनिया ही बदल गयी । अरे प्रथम श्रेणी के अधीकारी जो थे !दोस्तों के बैंक खाते भी जब खाली  हो गए तो बापस  आना ही  पड़ा ।पर अब  उनकी सभी रिश्तेदारो के फ़ोन नंबर लड़की पर  थे ।15 दिनों तक सारी  इन्कॉमिंग को खुद पूजा जी ने जाचा था कही लड़का किसी और के साथ भी तो खेल नही रहा उसके तरह ? ।उसके बाद पता चला की उसके घर पर सबको पता था और उन्हें अपनी लड़की की क़ाबलियत पर भरोशा था की गलत सौदा नही करेंगी ।तो पूरी छूट दे दी गयी मनो सगाई हो गयी हो पर खुद अभी तक सामने नही आये ।क्युकी बाद में मन भी करना था न रिश्ते को ,ताकि सस्ती शादी हो जाये । हिंग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा आये ।
10 घंटे के सफ़र पर आकर लड़की उनका होस्टल नुमा  घर देख गयी थी
पर जय बोलो  मोबाइल महराज की !और आपस में इज्ज़त बचाने  बाले दोस्तों की , जिन्होंने सब कुछ अफसरनुमा दिखा दिया । पर लड़की तेज़ थी ,कैलकुलेटर  नही सुपर नानो कंप्यूटर थी !इतनी जल्दी कहा  मानने बाली  थी ?
सो और रस्ते में जिद्द करके उनकी  बड़ी बहन के घर दिल्ही  जाकर , मिल भी आई  !बिलकुल मौसमी चटर्जी की तरह बन कर गयी थी ,  हमारी जेनिफ़र लोपेज़ ।जाते ही पैर भी छु लिए  दीदी  के, अब कोन ना मर जाये एन अदाओ  पर ? तो दिल्ली  बाली  दीदी भी दिल दे बेठी ।माँ - बाप को अब कोन  पुछ  रहा है ? मट्रो शहरो में  रिश्ता अब लड़के बालो की तरफ  से पक्का था । पर लड़की और अच्छा .....की कस्मश में थी ।
हमारे बॉस भी न न करके लव कर बेठे !रात - दिन बस मोबाईल ..........
उधर बड़े शहाब  के साले  महोदय बड़े परेशान  थे । चिड़िया चुग गयी खेत .... अब पचता रहे थे ।सबसे बड़ी बात तो ये थी । की उनकी बात भी उनके इलाके में  , खुल सकती थी की नोकरी अस्थाई और छोटी है । दूसरा जिस लड़की से बॉस से मिलवाया वो हाथ से निकल गयी थी और चुपचाप उनकी दोस्ती पर आरी चला रही थी ,
क्युकी लड़की को डर  ये था की कही  उसकी पुरानी  जिन्दगी के लव इन / लाइव इन सामने न आ जाये ?
और बॉस इसलिए मुह छिपा रहे थे क्युकी उनकी होने बाली पत्नी की सब चरित्र गाथा  सब लडको को पहेले  ही  साले  सहाब ने  सुना दी थी ।
इसलिए बॉस भी अब  साले  सहाब  से दूर होने लगे थे ।और पूछने पर यही कहते की मैंने सब सच बता दिया है उसे नोकरी के बारे में । सबको पता है की जुठ  बोल रहे है ।
लड़की के प्यार का चाकू दोस्ती के धागों पर चल गया ।और अपने बॉस सब दोस्तों से अलग हो गए मोबाइल लव में डूब गए । दारू पार्टी में उनका कपडे फाडू डांस / होटल में खाना खाकर एक सब्जी और मागना  सबको याद आता था । जो काम खुसबू नही कर पाई वो पूजा कर रही थी ।कहा  जाते थे ? कब आते थे ? किसी को पता न चलता ? पर  हा कपडे जरुर नए साफ सुथरे पहन  रहे थे ।
एक दिन अचानक पता चला की पूजा के दूर के जीजा जी का पास का दोस्त , बॉस की नोकरी के बारे में पुच -ताछ करने को हमारे कार्यलय  में आये  थे की वो कितने बड़े अधिकारी है ?
और बस अब खेने को क्या बचा है दोस्तों ..................



 बाकी कल 

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