मेरी कविता !
काश ! मेरी लेखनी भी चल पाती ,
प्रियेतमा की सुनहरी जुल्फों पर ,
मै भी शब्दों मे कह पाता ,
उसकी प्यारी बातो को ,
उसके आने पर हसना है ।
उसके जाने पर रोना है ,
मुझको भी ये सीख ला दो अब ,
उसने दिल मेरा तोड़ दिया तो ,
जीवन मेरा विफल हुआ
जब उससे नाता जोड़ लिया तो
जीवन मेरा सफल हुआ ।
उसके आचल जी कर मै भी
जीते जीते ही मर जाता ,
पर मुझको तो लिखना आता है ।
अपनी भारत माता पर ,
देश पर जो मर मिट गए ,
ऐसी वीरो की गाथा पर !
मुर्दे भी जो जाग जाये अब
बना दू जिन्दगी की तस्वीर
अपने खून की श्याही बनाकर
लिख दू भारत की तकदीर ,......................
काश ! मेरी लेखनी भी चल पाती ,
प्रियेतमा की सुनहरी जुल्फों पर ,
मै भी शब्दों मे कह पाता ,
उसकी प्यारी बातो को ,
उसके आने पर हसना है ।
उसके जाने पर रोना है ,
मुझको भी ये सीख ला दो अब ,
उसने दिल मेरा तोड़ दिया तो ,
जीवन मेरा विफल हुआ
जब उससे नाता जोड़ लिया तो
जीवन मेरा सफल हुआ ।
उसके आचल जी कर मै भी
जीते जीते ही मर जाता ,
पर मुझको तो लिखना आता है ।
अपनी भारत माता पर ,
देश पर जो मर मिट गए ,
ऐसी वीरो की गाथा पर !
मुर्दे भी जो जाग जाये अब
बना दू जिन्दगी की तस्वीर
अपने खून की श्याही बनाकर
लिख दू भारत की तकदीर ,......................
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