Friday, May 17, 2013

मेरी लेखनी भी चल पाती ,....

मेरी कविता !
काश ! मेरी लेखनी भी चल पाती ,
प्रियेतमा  की सुनहरी जुल्फों पर ,
मै  भी शब्दों मे कह पाता ,
उसकी प्यारी बातो को ,
उसके आने पर हसना है  ।
उसके जाने पर रोना है ,
मुझको  भी ये  सीख ला  दो अब  ,
उसने दिल मेरा तोड़ दिया तो ,
जीवन मेरा विफल हुआ
जब उससे  नाता जोड़ लिया तो
जीवन मेरा सफल हुआ ।
उसके आचल जी कर  मै भी
जीते जीते ही मर जाता ,
  पर  मुझको तो  लिखना   आता है ।
अपनी भारत  माता पर ,
देश पर जो मर मिट गए ,
ऐसी  वीरो की गाथा पर !
मुर्दे भी जो जाग जाये अब
बना दू जिन्दगी की तस्वीर
अपने खून की श्याही बनाकर
लिख दू भारत की तकदीर ,......................

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