Thursday, December 12, 2013

अभी मत जायो नेल्सन .........

नेल्सन मंडेला का 6 दिसंबर, 2013 को निधन हो गया। .
एक और गाँधी बादी नही रहे | जिनके बारे मे ये जाना जाता था की उन्होंने गाँधी जी के सिद्दांतो का जीवन भर पालन किया |
जो दक्षिण अफ्रीका के प्रथम अश्वेत भूतपूर्व राष्ट्रपति थे।उनके देश मे उनको प्यार से मदीबा के नाम से जाना जाता है. यह उनके कबीले का नाम है |राष्ट्रपति बनने से पूर्व वे दक्षिण अफ्रीका में सदियों से चल रहे रंगभेद का विरोध करने वाले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस और इसके सशस्त्र संगठन उमखोंतो वे सिजवे के अध्यक्ष रहे। रंगभेद विरोधी संघर्ष के कारण उन्होंने 27 वर्ष रॉबेन द्वीप के कारागार में बिताये जहाँ उन्हें कोयला खनिक का काम करना पड़ा था।आज वो स्थल रंगभेद की लड़ाई का धर्मिक स्थल बन चूका है 1990 में श्वेत सरकार से हुए एक समझौते के बाद उन्होंने नये दक्षिण अफ्रीका का निर्माण किया। वे दक्षिण अफ्रीका एवं समूचे विश्व में रंगभेद का विरोध करने के प्रतीक बन गये।
राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला का जन्म 18 जुलाई 1918 को केप प्रांत के मवेजो गांव में हुआ। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद नीति की नीत‍ि के खिलाफ और अफ्रीका के लोगों के स्वराज्य के लिए लड़ाई लड़ी। इसके लिए उन्हें 27 वर्ष रॉबेन द्वीप की जेल में बिताने पड़े। मंडेला का पूरा नाम नेल्सन रोहिल्हाला मंडेला था ।
यह नाम उनके पिता ने उन्हें दिया। रोहिल्हाला का अर्थ होता है पेड़ की डालियों को तोड़ने वाला या प्यारा शैतान बच्चा। नेल्सन के पिता गेडला हेनरी गांव के प्रधान थे। नेल्सन के परिवार का संबंध शाही परिवार से था।तब भी उनकी रूचि आम समाज में थी | नेल्सन की मां एक मेथडिस्ट ईसाई थीं। नेल्सन ने क्लार्क बेरी मिशनरी स्कूल से अपनी आरंभिक पढ़ाई की थी। छात्र जीवन में ही उन्हें रंगभेद नीति का सामना करना पड़ा। स्कूल में उन्हें याद दिलाया जाता कि उनका रंग काला है। अगर वे सीना तानकर चलेंगे तो उन्हें जेल तक जाना पड़ सकता है।महात्मा के जीवन की ट्रेन बाली घटना का उनपर बड़ा प्रभाव पड़ा था |
इस रंगभेद नीति के चलते उनमें एक क्रांतिकारी का जन्म बालक पन मे ही हो रहा था। नेल्सन ने हेल्डटाउन से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। यह अश्वेतों के लिए बनाया गया एक स्पेशल कॉलेज था। यहीं पर उनकी मुलाकात ऑलिवर टाम्बो से हुई जो उनके जीवनभर दोस्त और सहयोगी रहे। उन्होंने अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ फोर्ट हेयर के अलावा, लंदन की यूनिवर्सिटी एक्सटर्नल सिस्टम, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ अफ्रीका और यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटरर्सरैंड में पढ़ाई की।
1940 तक नेल्सन और ऑलिवर अपने राजनीतिक विचारों के कारण कॉलेज में काफी चर्चित हो गए। इस गतिविधि के कारण दोनों को कॉलेज से बाहर कर दिया गया। इसके बाद वे घर लौट आए। घरवाले उनकी शादी की तैयारी करने लगे, लेकिन नेल्सन के मन तो विद्रोह चल रहा था।
वे घर से भागकर जोन्हानसबर्ग आ गए। यहीं पर उनकी मुलाकात वाल्टर सिसलू और वाल्टर एल्बर टाइन से हुई। अश्वेत होने के कारण नेल्सन को नौकरी पर हर रोज अपमानित होना पड़ता। 1944 में उन्होंने मित्र वाल्टर सिसुलू की बहन इवलिन एनतोको मेस से शादी की। बाद में उन्होंने विनी मंडेला और अंत में ग्रेसा माशेल के साथ विवाह किया। अंत में उनकी तीसरी शादी ग्रेसा माशेल से हुई जोकि एक अफ्रीकी देश के पूर्व राष्ट्रपति की पत्नी थीं।
मंडेला ने अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग की स्थापना की और अफ्रीका के अश्वेत युवाओं को एक नेतृत्वकर्ता दिया। जब पूरे विश्व पर गांधीजी का प्रभाव था, नेल्सन पर भी उनका प्रभाव पड़ा। अश्वेतों को उनका अधिकार दिलाने के लिए 1991 में कनवेंशन फॉर ए डेमोक्रेटिक साउथ अफ्रीका (कोडसा) का गठन किया जो देश में शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन करने की अगुवा बनी। श्वेत नेता डी क्लार्क और मंडला ने इस काम में अपनी समान भागीदारी निभाई। 10 मई 1994 को दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदरहित चुनाव हुए।
भारत सरकार की ओर से उन्हें 23 जुलाई 2008 को गाँधी शांति पुरस्कार इससे पहले उन्हें 1979 में जवाहर ‘लाल नेहरु अंतर राष्टीय सदभावना पुरूस्कार’ से भी नवाजा गया था| , 1990 में भारत रत्न पुरस्कार दिया गया।1993 में नेल्सन मंडेला और डी क्लार्क को संयुक्त रूप से शांति के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।
उनकी पुस्तक ; Mandela, Nelson. Nelson Mandela Speaks: Forging a Democratic, NonracialSouth Africa. New York: Pathfinder, 1993.
Mandela, Nelson. Long Walk to Freedom. The Autobiography of Nelson Mandela. 1994.
Mandela, Nelson. The Struggle Is My Life. , 1986.विश्व भर में बड़ी प्रसिद्ध है |
संयुक्त राष्ट्रसंघ ने उनके जन्म दिन को नेल्सन मंडेला अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।दक्षिण अफ्रीका की संसद एक विशेष सत्र बुलाकर नेल्सन मंडेला को श्रद्धांजलि देगी. इस विशेष सत्र में मंडेला परिवार से सदस्य संसद दीर्घा में मौजूद रहेंगे.
दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय के अनुसार 91 देशों के राष्ट्र प्रमुख नेल्सन मंडेला को श्रद्धांजलि देने के लिए दक्षिण अफ्रीका आये हैं. इसके अलावा 10 पूर्व-राष्ट्रप्रमुख, 86 प्रतिनिधि मंडलों के प्रमुख और 75 गणमान्य लोग आये हैं. स्मृति सभा को दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने संबोधित भी किया |
मंगलवार को होने वाली स्मृति सभा में शामिल होने वालों में अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद, क्यूबा के राष्ट्रपति राउल कास्त्रो और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन शामिल हैं. अमरीका के तीन पूर्व-राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बिल क्लिंटन और जिमी कार्टर भी इस सभा में शामिल हुए .
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून, यूरोपीय संघ के अध्यक्ष जोसे मैनुएल बारोसो, ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ, फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास और भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी स्मृति सभा में शामिल एवं सम्बोथित करने वालों की सूची में हैं.|
इस स्मृति सभा में करीब 95,000 लोगों के शामिल होने अंदाजा है. यह स्मृति सभा दक्षिण अफ्रीका के सोवेटो स्थित एफएनबी स्टेडियम में हुई . नेल्सन मंडेला ने वर्ष 2010 के फ़ुटबॉल विश्व कप के दौरान इसी स्टेडियम में आखिरी बार सार्वजनिक रूप से देखे गए थे.


रंगभेद विरोधी आंदोलन के प्रमुख नेता पीटर गैब्रिएल और बोनो के भी उनके निधन पर शोक प्रकट किया |
भारत देश उनको सदा सम्मान और प्रेम से आदर देता था |उनका भी भारत से विशेष प्रेम था क्युकी दोनों देशो ने रंगभेद की लड़ाई सफलता से लड़ी थी |और दुनिया मे मानवाधिकार की लड़ाई के सफल जिन्दा योद्धा वो ही थे |दुनिया भर मे images (1) उनको पद त्याग के बाद भी ” रास्त्रपति” जी ही कहा जाता था |जैसे भारत मे महात्मा को बापू कहा जाता है |

Wednesday, December 4, 2013

लिव इन नही! नही !

भारत एक विशेष सामाजिक स्थिति बाला देश है | जहा एक तरफ तो एक पीढ़ी ,परिवार ,समाज ,धर्म अभी तक पुरातनपंथी है बही दसरी और नई जनरेशन  नोकरी रोजगार  शिक्षा के लिए बहुत बड़ी संख्या मे  घर शहर से दूर है और पूर्ण  आजादी से जीवन जी रहे है |जिस कारण शादी सस्था  और सामाजिक सम्बन्ध बदल रहे है | जिस कारण विपरीत सेक्स के युवा घर परिवार और आर्थिक  और मनोविज्ञानिक कारणों से आसरा तलाश रहे है जिस कारण  लिव-इन रिलेशनशिप  जैसी नई धारणाये सामने आई है और अभी तक शादी से पहले सेक्‍स को केवल बड़े शहरों तक ही सीमित करके देखा जाता है, लेकिन परंपराओं के गढ़ छोटे शहरों में भी अब यह आम बात बनती जा रही है.|   सेक्स अब पहले की तरह विबाह  के बाद  किया जाने वाला पवित्र अनुष्‍ठान नहीं रह गया | यह सब पिछले 10-15 सालों में बदल गया है.'|'कॉलेज की तो क्या  अब तो स्‍कूल के बच्‍चों में भी ये संबंध आम होने लगे है . चाहे वो माध्‍यमिक स्‍कूल हों या सेकेंडरी, ब्‍वॉयफ्रेंड्स और गर्लफ्रेंड्स होना आम बात है. वे जब मिलते हैं तो सिर्फ हाथ नहीं मिलाते, वे एक दूसरे को गले लगाते हैं | एकांत मे मिलने पर वर्जनाये नही रहेती | आज का युवा प्‍यार के इस उन्‍मुक्‍त तरीके का आनंद ले रहा है.जिसमे बहुत सारी समस्यों का हल भी है |और नई समस्याए भी है | जहां सार्थक संबंध पिछड़ रहे हैं, वहीं थोड़े समय के लिए बनाए गए रिश्‍ते ज्‍यादा पनप रहे हैं.' इस सम्बन्ध मे रिश्तेदारी परिवार योजना  की चिंता और हर चीज की मल्कियत का झगड़ा  करने जैसी आम समस्या  भी नहीं होती है। इस रिलेशनशिप में कपल के सामाने एक दूसरे की जिम्मेदारियों को बांटने जैसी मजबूरियां भी नहीं होती है। .
  • लिव-इन रिलेशनशिप में रहने जोडियों में धोखा, बेवफाई और व्यभिचार की आशंका कम होती है।पर डर जायदा होता है |
  पैसों के मामले में ये  स्वतंत्र होते हैं। इसमें अपने पार्टनर के साथ अपनी कमाई को देने या जोड़ने जैसी बाध्यता नहीं होती है। अपने पैसों का इस्तेमाल पूरी आजादी होता  है ।. लिव इन रिलेशनशिप को  जोड़े के बीच सामंजस्य को परखने के तौर पर भी देखा जा सकता है। ताकि सही जोड़ी होने पर शादी सफल हो  कि क्या आप  साथ रह कर उनसे तालमेल बिठा पा रहे हैं नहीं। कुछ आधुनिक  लोग लंबे समय तक एक ही जोड़ीदार के साथ ऊब जाते हैं। और रोज़ कुछ नया खोजते है | लिव इन रिलेशनशिप ऐसे लोगों के लिए ही है। अगर उन्हें लगे कि वह अब ऊब रहें हैं तो पार्टर बदलने के लिए स्वतंत्र हैं।शादी के उलट इस रिलेशनशिप को तोड़ना ज्यादा आसान होता है। अलग होने से पहले किसी भी तरह की कानूनी पचड़े और उनकी  खानापूर्ति नहीं करनी होती है। अलग होने आपको बस सामान लेकर जाना है और  भावनात्मक पहलू से निपटना होता है। इसमे में आप खुद नियम बनाने के लिए स्वतंत्र होते हैं। इसमें समाज के द्वारा तय किए गए मानक नहीं होते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि इसे  कैसे आगे बढ़ाते हैं।.
  • दोनों पार्टनर अपनी जिम्मेदारियां बिना किसी दबाव ‌के निभाते हैं।
 लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल को शायद ही कभी एक दूसरे के लिए त्याग करना पड़ता है। इस रिलेशनशिप में आप सिर्फ अपने बारे में सोचने के लिए स्वतंत्र होते हैं। आपको अपने पार्टनर के अनुसार अपने स्वभाव में बदलाव करने की मजबूरी भी नहीं होती है।  लिव इन रिलेशनशिप को आप बड़ी आसानी से खत्म कर सकते हैं। यही कारण है कि इसे काफी लोकप्रियता मिल रही है। जब भी आपको लगे कि आप अपने पार्टनर के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं, तो मामला ख़त्म !
  • इस रिश्ते में रहते-रहते आप विवाह के बंधन में भी बंध सकते हैं।अगर कोई पक्ष राज़ी हो |या दुसरे साथी की साथ एक ही समय मे लिव इन कर सकते है 
 छोटे शहरों में भी अब लिव-इन रिलेशशिप्‍स की तादाद बढ़ रही है. प्रेम विवहा पर घरवालों की नापसंदगी  से परेशान आज का युवा अपने  प्‍यार की कुर्बानी देने को तैयार नहीं है, जिसके चलते लिव-इन रिलेशशिप्‍स के प्रति उनका रुझान बढ़ता जा रहा है.|बिना शादी के साथ मिल जाता है |हालांकि  दुनिया के सारे देशों में लिव इन रिलेशनशिप को स्वीकृति नहीं मिली है और इसके लिए कानून बनाए जा रहे हैं। बिना शादी किए दो लोगों का एक साथ रहना पूरब के देशों में अभी भी वजिर्त माना जाता है। वहीं पश्चिम के ज्यादातर देशों में इसको स्वीकृत  किया गया है और वहां के युवाओं नेकाफी समय पूर्व से ये अपनाया है । जिसके दुष्परिनाम भी सामने है जैसे बिन बाप के बच्चे , अल्प आयु मे गर्भधारण , आत्महत्या , पागलपन आदि |
  • उच्चतम न्यायालय ने हॉल ही मे  कहा कि लिव इन रिलेशनशिप  मे  कानून बनाए जाने की जरूरत है क्योंकि इस तरह के संबंध टूटने पर महिलाओं को भुगतना पड़ता है। इसने कहा कि बहरहाल हम इन तथ्यों से मुंह नहीं मोड़ सकते कि इस तरह के संबंधों में असमानता बनी रहती है और इस तरह के संबंध टूटने पर महिला को कष्ट उठाना पड़ता है।
 सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले मे  उलटे चेतावनी दी कि पहली पत्नी और बच्चे उस महिला के खिलाफ मुआवजे का दावा ठोंक सकते हैं,जिसके साथ पुरुष लिव इन सम्बन्ध मे था  क्यूँकि वो उनकी वजह से पति और पिता के प्यार से  वे  वंचित रहे। लेकिन साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा इस तरह के मामलों में अभी तक कोई कानून नहीं है और लिव-इन रिलेशनशिप के ऐसे मामलों में पीड़ित महिला को भी न्याय मिले, इस बारे में नए सिरे से कानून बनाने पर सरकार को सोचना होगा। अब ये सरकार को सोचना होगा की बदलते समाज में बढ़ते लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों के मद्दे नजर नए सिरे से कानून बनाये, जिससे किसी भी पक्ष के प्रति अन्याय न हो।लिव इन रिलेशनशिप आज के समय मे तेज़ी  से बढ़ रहा है। एक समय था जब ऐसे संबंधों पर लोग खुलकर बात करना पसंद नहीं करते थे। लेकिन आज लोग खुलकर लिव इन रिलेशन शिप में रहते हैं और इस बात को जगजाहिर भी करते हैं। लिव इन रिलेशनशिप के जहां कुछ फायदे हैं वही इसके कुछ नुकसान भी हैं। यानी जैसे हर सिक्के के नकारात्मक और सकारात्मक पहलू होते हैं, इस रिश्तें में भी कुछ ऐसा ही है। आइए जानें लिव इन रिलेशन के पहलूओं को।परन्तु इस रिश्तो मे ,ये  इश्क  नहीं  आसां , इतना  तो  समझ  लीजिये एक  आग  का  दरिया  है , और  डूब  के  जाना  है इसमे  बंधन में न बंधने की आजादी तो होती है, पर लाइफ में पूरी तरह से एन्जॉय नहीं कर पाते, क्योंकि अविश्वास की भावना पनपने का डर बना रहता है।
  • कहीं आपका पार्टनर आपको छोड़ न दे इस तरह का डर मन में हमेशा बना रहता है, जिससे तनाव की स्थितियां भी उत्पन्न हो जाती है।
  • एक दूसरे के वर्क स्टाइल या कल्चर को ना समझ पाने के कारण भी दिक्कतें आने लगती हैं।
  • लिव इन रिलेशनशिप में आप परिवार की खुशी का मजा नहीं ले सकते। 
  • परिबार समाज के उत्सव , समारोह आदि से दूरी बन जाती है |
  • आप शुरूआत में प्यार और भावनात्मक रूप से तो जुड़ते है पर शारीरिक संबंधो से ऊब हो जाने के बाद लड़ाई झगडे बहुत बड़ते है और फूलो के कांटे दर्द देने लगते है | जिससे बोरियत होने लगती है। 
  • थी  हमारी  क़िस्मत  के  विसाले  यार  होता 
अगर  और  जीते  रहते , यही   इंतज़ार  होता  उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष की पीठ  ने कहा कि वित्तीय और घरेलू इंतजाम, परस्पर जिम्मेदारी का निर्वाह, यौन संबंध, बच्चे को जन्म देना  उनकी बेधता और उनकी परवरिश करना, लोगों से घुलना-मिलना तथा संबंधित लोगों की नीयत और व्यवहार कुछ ऐसे मापदंड हैं जिनके आधार पर संबंधों के स्वरूप के बारे में जानने के लिए विचार किया जा सकता है।अत भारत जैसे सामाजिक निर्भरता बाले देश मे एस प्रकार के सम्बन्ध एक सीमा तक ही प्रचालन मे आ सकते है | सर्वलोकपिर्ये  और स्वीक्रत  नही  हो सकते |और अभी कितने जोड़े होंगे ?जो सामने आकर बोल सके ? यहा पर अधिकतम  आवादी गावो मे बस्ती है जहा के सामाजिक कानून बड़े कड़े होते है |वहा तो अभी तक प्रेम विबाह तक को मान्यता नही मिल  पाई है |

Tuesday, December 3, 2013

बलात्कार अब राजनीतिक मुद्दा !

आजकल अखबारों मे दो खबरों पर बहुत शोर मच रहा है ! एक तो मोदी जी के विरुद्ध एक महिला की जासूसी के आरोप दुसरे तरुण तेजपाल की विरुद्ध यौन अपराध का आरोप !
अगर प्राप्त अखबारों के अनुसार उनपर विश्वास किया जाये तो अधिकतर इस बात पर जोर दे रहे है की मोदी ने बहुत बड़ा अपराध किया है जो गुजरात शासन के अधिकारियो ने किसी लाचार पिता के कहेने पर बेटी को सुरक्षा देने की बात करी है और मोदी जी के विरुद्ध ना सबूत है ना खुद महिला और तेजपाल जी को गोवा सरकार मुजरिम बना रही है | नही तो वो तो अपराध कर ही नही सकते | सरकारी पत्रकार जो है |जिन्होंने देश की मुख्य गैर कांग्रेसी पार्टी बी जे पी को हनी ट्रेप मे फसाकर बदनाम करने मे काला धन का इस्तमाल किया था |और सत्ता मे आकर देश का बंटाधार करने और खुद मस्ती मारने की छुट इनको दी गयी थी |
बहुत बड़े बड़े लोग जो मोदी जी विरुद्ध ज्वालामुखी बने हुए थे ,गिरगिट की तरह रंग बदल गए और अचानक तेजपाल के लिए बकालत करने उतर पड़े है !मानो उनके सत्ता खेल को किसी ने विगाड़ दिया हो | ये कैसी राजनीति है और कैसा कानून ?जिसकी कोई भी मजाक बना ले सत्ता मे बेठ कर |
बाल की खाल निकलने मे माहिर , बक्तायो को तेजपाल पर बोलने का बक्त ही नही मिल रहा है |अभी सोच मे है की केसे उस महिला को जूठा साबित करे |या उसके चरित्र का हनन किया जा सके | बड़े बकील साहब सत्ता के ठेकेदार जिन्होंने पैसा दिया ( काला या सफेद ) और देते रहे तहलका मचाने को विपक्षी दलों के खात्मे के लिए , उनसे कोई कुछ नही पूछ रहा की क्या क्या होता है ? पैसे का इन पत्रकारों की अय्याशियों मे |
कोन है ये तेजपाल ? किसके पैसे से अय्याशिया करते है ये सत्ता के दलाल ? जनता को समझ आ गया है …..
और भारतीय मिडिया तो पूरी तरहा पीले रंग मे रंग गया है | पीत पत्रकरिता के
कारण ही तो सही खबरों के लिए जनमत का रुझान इन्टरनेट की तरफ हो रहा है | जिस कारण अब खरीदे गए लोग सोशल मिडिया पर भी रोक लगाने के लिए तड़फ रहे है |पर अब जाएदा दिन नही बचे है इनके पास , ये इन्हे भी पता है | इसलिए सारे एकमत होकर देश हित मे लगे सारे तत्वों को गलत सिद्ध करना चाहते है
| इसी काले धन से पैदा पीले रंग को केसरिया रंग पर सुनियोजित तरीके से चडाने का असफल
प्रयास कर रहा है मिडिया | एक तरफ तो कहेते है लोकतंत्र है फिर .. मोदी जी के पीछे क्यों पड़ गये है सारे एक होकर | जहा महिला या किसी पक्ष के तरफ से शिकायत भी दर्ज नही है तो भी मोदी जी का नाम महिला की जासूसी
मे बिना सबूत के लिया जा रहा है | और प्रयोजित प्रदर्शन भी होने लगे है
तथाकथित नारी संगठनो के अनेक स्थानों पर ,
और जहा तेजपाल के विरुद्ध ? कोई नही गया अभी तक इण्डिया गेट पर मोमबत्ती जलाने के लिए ? नारी शोषण के विरुद्ध ?
खुले सबूत होने पर भी लोग जाँच की बात करते है | पीड़ित सामने है पर उस पर दबाब बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है | और बेशर्म होकर कुछ सत्ता के दलाल राज्य
सरकार पर अतिरिक्त तेज़ी दिखाने का आरोप भी लगा रहे है | जबकि भारत सरकार के ग्रहमंत्री मोदी जी के विरुद्ध जाच के लिए रो रहे है | और तेजपाल पर चुप्पी है |
मानो तेजपाल के विरुद्ध मामला दर्ज करने के लिए गोवा की बी जे पी सरकार ने ही दबाब डाला हो उक्त महिला पर | अभी इंतजार करिये कुछ भी बयान आ सकते है तेजपाल के पालनहारो के …
ये किस्सा असल मे राजनीति – पैसा -सत्ताहड़प – अयाशी का दिख रहा है
| जनता एस सरकार
के सारे खेलो को समझ रही है और उससे रोष मे है | इस तरह के हथकंडे अपना कर सरकार मोदी जी को नही रोक सकते | ये देश अब मन बना चूका है मोदी जी को देश की प्रधानमंत्री पद के कुर्सी के लिए| और इससे भी कांग्रेसी केंद्र सरकार को
अन्तोगत्वा राजनितिक नुकसान ही होंगा |जिसका असर राज्य चुनावो मई पता चल जायेंगे |

माँ तुम कहा कहा हो ?

मैंने कभी तुझे चाहा   हो , दिल ने ऐसा कहा भी नही था |
फिर तेरे आने पर ख़ुशी और जाने पर गम क्यों होता है ?

  माँ तुम कहा कहा  हो ?
 सितारों मे ,जो रात मे चमकते है
 राह दिखाने को                                  
सूरज सी हो
 जो जीवन आधार है                                      
तुम तो  रात मे भी  रहेती हो |
मुझे लोरी सुनाने को
सारे  फूलो की खुशबू ,
तुम्हारे आचल मे
 मेरी सारी आशाये उम्मीदे
सब तुम से  रही थी
तुम भगवान हो
जो जन्म देता है /
पालनहार हो
 जो अपना आँचल देती हो .
तुम हो मेरे अंतर्मन मे ,
मेरे कण कण मे , मेरे जीवन मे ....