Tuesday, September 30, 2014

देहिक समझोते

मेरा प्रश्न यह है की जो औरते आज पुरुष पद पर है अर्थात उनके समान धन , बल , शोहरत प्राप्त कर चुकी है कभी किसी ने उनके जीवन का चित्रण किया गया है की वो पुरुष से कितना अलग अपना पुरुषत्व प्रदर्शित करती है , उनका मानक विचलन नही मद्द्य विचलन ही होता है ... उनके योन खुलेपन या पुरुष शोषण के तरीके कुछ अलग होते है क्या पुरुष से ??नोकरी , रोजगार , हर स्थान पर अपनी छदम आजादी के लिए देहिक समझोते करती नारी , आम बात है , कोन और कितने पुरुष उसे मजबूर कर रहे है , देह को वस्तु की तरह उपयोग करने की आजादी को किस प्रकार से तर्कसंगत बनाया जा सकता है .....

Monday, September 29, 2014

बाढ़ में बहा अलगाव वाद का नारा .. जम्मू काश्मीर

बाढ़ में बहा अलगाव वाद का नारा ..
जम्मू काश्मीर की यही नियति है आजादी के बाद से बनने बाली  सारी सरकारे
राज्य हित में नही अपितु स्वं हित में कुर्सी लाभ लेने में ही लगी रही है
, इस बार की बाढ़ ने सारी  पोल खोल दी है |
राज्य प्रशासन अपने लोगो और अपने को बचाने में ही लगी रह गयी निवासी राहत
और बचाव के लिए पूरी तरह केंद सरकार पर निर्भर नजर आये ,
और ये आपदा देश हित में एक सन्देश दे गयी , सम्पूर्ण देश ने एक होकर
कश्मीर  के लोगो का साथ दिया और आपदा से लड़ाई लड़ी और दिल जीते !स्थानीय
नागरिको ने भी खुले दिल से प्रेम स्वीकार किया और अलगाववादी विचार धारा
इस बाढ़ के पानी के साथ मानो बह गयी |
अब राज्य और केंद सरकार पर भरपूर मोका है की , देश प्रेम और अखंडता की
जड़े पुनर्वास, विकास ,रोजगार और राहत की जमी में मजबूती से लगा दी जाये ,
ताकि कोई विदेशी ताकत फिर एक फूलो की घाटी में तेजाब की दुकान न खोल सके |देश एक भाव से तरक्की करे , शांत रहे !आतकवाद समाप्त हो |

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अमन अन्गिरिशी ..

अमन अन्गिरिशी