Thursday, February 21, 2013

हड़ताल का मतलब !
अभी भारत की जनता शोषित बर्ग ये नही समझ  पाया है की मात्र हड़ताल से होना क्या है । केवल उनके जैसे दुसरे लोगो को परेशानी ही होनी है । जिन  तक आवाज़ जानी चहिये थीबहा तक तो बस राजनितिक फ़ायेदे  और नुकसान के आकड़े  ही पहुचते है । नक्कारखाने मै  तूती की आवाज़ के जैसे कुछ नही होने वाला पर गरीब की मार गरीब के उपर बाली  बात जरुर हो जाती है । मजदूरों की लड़ाई मे मजदूर ही भूखा रहे जाता है । लोकतंत्र मे  सबसे बड़ी ताकत होती है मताधिकार !अगर उसका प्रयोग सही तरीके से किया जाये तो हड़ताल की जरुरत  ही नही पड़े । जाति  धर्म, लिंग   रंग, निवास को भूलकर  होकर जिस दिन भारत मे  मतदान होंगा संसद बास्तव मे लोकतंत्र का मन्दिर बन जायेंगा ।और किसी हड़ताल की जरूरत न होंगी  

Wednesday, February 20, 2013

दिल्ली का रास्ता अयोध्या से  प्रवीण तोगड़िया ( इंडिया टुडे  २ ७ फरवरी अंक )
दिल्ली का रास्ता अयोध्या  से नही है न  कभी हो सकता है । दिल्ली की सत्ता तो आर्थिक सुधारो ,सभी छेत्रो मै  दुनिया के साथ कदमताल रखने की हिम्मत , इमानदारी से काम  करने की भावना , नारी सुरक्षा , राजनीतिक  सुचिता और नेताओ के अपने चरित्र प्रदर्शन पर और सभी धर्मो जातियों को साथ लेकर चलने बालो को ही मिलने बाली  है । अगर दिल्ली का रास्ता अयोध्या से होता तो देश की हर पार्टी इसी रास्ते  पर खड़ी  होती ।



                                                                                अमन कुमार अंगीरिशी
                                                                                     मेरठ