हड़ताल का मतलब !
अभी भारत की जनता शोषित बर्ग ये नही समझ पाया है की मात्र हड़ताल से होना क्या है । केवल उनके जैसे दुसरे लोगो को परेशानी ही होनी है । जिन तक आवाज़ जानी चहिये थीबहा तक तो बस राजनितिक फ़ायेदे और नुकसान के आकड़े ही पहुचते है । नक्कारखाने मै तूती की आवाज़ के जैसे कुछ नही होने वाला पर गरीब की मार गरीब के उपर बाली बात जरुर हो जाती है । मजदूरों की लड़ाई मे मजदूर ही भूखा रहे जाता है । लोकतंत्र मे सबसे बड़ी ताकत होती है मताधिकार !अगर उसका प्रयोग सही तरीके से किया जाये तो हड़ताल की जरुरत ही नही पड़े । जाति धर्म, लिंग रंग, निवास को भूलकर होकर जिस दिन भारत मे मतदान होंगा संसद बास्तव मे लोकतंत्र का मन्दिर बन जायेंगा ।और किसी हड़ताल की जरूरत न होंगी
अभी भारत की जनता शोषित बर्ग ये नही समझ पाया है की मात्र हड़ताल से होना क्या है । केवल उनके जैसे दुसरे लोगो को परेशानी ही होनी है । जिन तक आवाज़ जानी चहिये थीबहा तक तो बस राजनितिक फ़ायेदे और नुकसान के आकड़े ही पहुचते है । नक्कारखाने मै तूती की आवाज़ के जैसे कुछ नही होने वाला पर गरीब की मार गरीब के उपर बाली बात जरुर हो जाती है । मजदूरों की लड़ाई मे मजदूर ही भूखा रहे जाता है । लोकतंत्र मे सबसे बड़ी ताकत होती है मताधिकार !अगर उसका प्रयोग सही तरीके से किया जाये तो हड़ताल की जरुरत ही नही पड़े । जाति धर्म, लिंग रंग, निवास को भूलकर होकर जिस दिन भारत मे मतदान होंगा संसद बास्तव मे लोकतंत्र का मन्दिर बन जायेंगा ।और किसी हड़ताल की जरूरत न होंगी
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