Monday, February 25, 2013


फतवे की राजनीती !कश्मीरियत पर भारी 

खामोश की लब  गुलाम है तेरे , ( अंक २ ० फरबरी  )
घाटी मे जब महिला बेंड " प्रगाश " (पहली रौशनी ) के विरुद्द फतवा जारी  हुआ तो दुनिया भर के युवा  मुस्लिमो को सोच मे  जरुर डाल  दिया होंगा की  घाटी  मे मुस्लिम  समाज का विकास किस दिशा मे  हो रहा है ? मुफ़्ती बशीरुद्दीन सहाब ने  संगीत  को गैर इस्लामी बोलकर कश्मीर ही नही दुनिया भर की सूफी परंपरा  को नकार दिया वे  पाकिस्तान मे  क्यों नही झाख कर देखते  जहा फिल्मे भी बनती है और  जनून जैसे बेंड  भी है और अदनान सामी जेसे गायक भारत आकर गाने गाते  है । इस्लामी फतवे नारी उद्दार के लिए क्यों नही होते ?जो लोग मानव व्यापार मे लगे है उनके विरुद कोई  फतवा नही आता क्यों ?हा उमर अब्दुल्ला जैसे लोग बधाई के पात्र है जो इन 
सरफिरो के विरुद बोलने की हिम्मत रखते है । ये  भारत है जहा लाखो मुस्लिम महिलाये अपनी  हर अभिव्यक्ति के पर्देर्शन के लिए आजाद है ।उन महिलायों को सुरक्षा देना  अब सरकार की जिम्मेदारी है ।प्रगतिशील मुस्लिमो के बयान का इंतजार रहेंगा   । 
     
                                                                                अमन अन्गिरिशी 
                                                                                            मेरठ उ प्र 

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