खिड़की !
रोहित आज भी बही से गुजरा जहा से वो रोज़ अपने कॉलेज जाता है ।पतली सड़क पर मस्त मोबिल पर दोस्तों से बाते करता हुआ । गली के मोड़ पर , खाली पड़ी पीली कोठी आज साफ सुथरी सी लगी जिसमे कुछ दिनों पहेले तक एक बुजर्ग दम्पति रहते थे और अचानक पता चला की कही अपने लड़के के कहेने पर ओल्ड होम मे रहेने चले गए है ।पर अचानक उसे लगा की कोई उसे देख रहा है वो असहज हो गया उपर देखा तो खिड़की मे एक बहुत सुंदर लड़की दिखाई दी ।गुलाबी कपड़ो मे लिपटी मानो परी हो ।उसकी नज़रे बही अटक गयी दिल धड़कना भूल गया वो भी उसे की तरफ देख रही थी
रोहित आज भी बही से गुजरा जहा से वो रोज़ अपने कॉलेज जाता है ।पतली सड़क पर मस्त मोबिल पर दोस्तों से बाते करता हुआ । गली के मोड़ पर , खाली पड़ी पीली कोठी आज साफ सुथरी सी लगी जिसमे कुछ दिनों पहेले तक एक बुजर्ग दम्पति रहते थे और अचानक पता चला की कही अपने लड़के के कहेने पर ओल्ड होम मे रहेने चले गए है ।पर अचानक उसे लगा की कोई उसे देख रहा है वो असहज हो गया उपर देखा तो खिड़की मे एक बहुत सुंदर लड़की दिखाई दी ।गुलाबी कपड़ो मे लिपटी मानो परी हो ।उसकी नज़रे बही अटक गयी दिल धड़कना भूल गया वो भी उसे की तरफ देख रही थी
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