Thursday, November 21, 2013

शिक्षार्थीयो की आत्मघाती प्रवत्ति - जिम्मेदार कोन ?

हर बर्ष आई आई टी जैसे बड़े सस्थानो मे पड़ने बाले बच्चो के आत्महत्या की खबरे आम होती थी |
जिसका कारण था परिवार से दुरी , स्वाभाविक स्नेह और प्रेम का आभाव , पढाई का दबाब , भविष्य की अनिश्चितता , धन की कमी , जीवन शेली की असमानताए आदि | परन्तु अब अन्य प्रतियोगी महोल बाले नगरो और स्थानों पर भी एस तरह के मामले
बड रहे है | जिसका साफ साफ कारण है अभिभवको की सोच,बड़ी जनसँख्या के कारण
अत्यधिक प्रतिस्पर्धा , रोजगार अवसरो की कमी ,सुंदर भविष्य की चिंता, बालक के अच्छे
कैरियर का लोभ | जिसके कारण खेलने- खाने के उम्र मे बच्चे ,पढाई की अंधी दौड़ मे शामिल हो
गए है | यह तक की छठी कक्षा से बच्चे बड़ी प्रवेश प्रतियोगिता की कठिन पढाई कर रहे है | स्कूल और कॉलेज मे जहा बिना किसी बड़े दबाब के पढाई करके युवा व्यक्तित्व का बिकास करते थे | अब पढाई की भाग दौड़ मे जीवन काट रहे है | और अच्छी टुसन कोचिंग की तलाश मे शहर से बहार जाने और पड़ने की सोच आम हो गयी है |कुछ बालक तो घर मे रहकर भी परिवार से दूर ही हो गए है क्युकी उनकी पास समय ही कहा है परिवार समाज के लिए | और कोटा , दिल्ली,बैंगलोर कलकत्ता जैसे नगरो मे तादात बाद रही है | जहा कम उम्र मे घर से अलग रहेने पर और अनेको सामाजिक और मानसिक समस्यायो के सामना करने मे असमर्थ हो जाने पर और मानसिक दबाब मे बहक कर आत्मघाती कदम उठाते है | जिसके अन्य घातक परिणाम भी हो सकते है | मानसिक अवसाद ,और अन्य मनोविकार स्थायी रूप से उसके जीवनभर साथ रह सकते है | शराब , अपराध , अन्य मानवीय चरित्र के अवगुण आ सकते है |
माता – पिता को भी अब समझना होंगा की उनको क्या मिलेंगा और उसको पाने के लिए बे क्या खो सकते है |कही मानव का मशीनीकर्ण तो नही किया जा रहा ?
प्राक्रतिक प्रकिर्या से बड़ने बाले बच्चे ही जीवन मे सही रूप से सफल हो
सकते है |सफलता का अर्थ विदेश मे नोकरी ,या उच्च आय ही नही है | इसमे सभी पक्ष संतुलन जरूरी है| परिबार – समाज के लिए समर्पण कहा से सीखा जा सकता है ?भारत मे बड़ते ओल्ड होम यही दर्शाते है कही ना कही माँ – बाप से रही दूरी ही आज भावनायो , जिम्मेदारी और प्रेम से बिलग करती रही होंगी | जो आज ये स्थिति बन रही है |सबसे जरूरी है युवा होते बच्चो को सही मार्गदर्शन,जिसके के लिए माता – पिता से बढकर कोई नही होता अगर इस उम्र मे उनका साथ और संबल मिले तो जीवन मूल्य की स्थापना स्थायी होंगी और परिवार – समाज देश के लिए भी सम्मान और प्रेम की भावना होंगी , नही तो अच्छा करियर भी सफल जीवन की गारंटी नही है |

Thursday, November 14, 2013

नीतीश कुमार की राजनेतिक हाराकेरी !

नीतीश कुमार जी को सत्ता मिलने के मुख्य कारण बी जे पी से अलग होकर उन्होंने अपने राजनेतिक भविष्य दाव पर लगा दिया है | ७ -८ सालों तक सरकार बनाने के बाद उनको टोपी विशेष पहनने की याद आई और बी जे पी साम्प्रदायिक हो गयी | कहा तो उनके प्रधानमंत्री पद पर बेठने की चर्चा चल रही थी पर अब उनकी स्थिति दुबारा विहार का मुख्यमंत्री बनने की भी नही रही |मोदी जी का साथ ना देना उनकी गलती रही , पर जो गया वो हो गया जिसे बदला नही जा सकता | जे डी यु की राजनीतिक मौत उनकी अति  म्हात्वकन्षा के कारण आसन्न है|कुछ समय पहेले तक जिनको प्रधानमंत्री पद के लिए दौड़ मे माना  जा रहा था  और  बर्तमान मे उनकी स्थिति मुलायम सिंह ,मायावतीजी  और ममता जी , प्रकाश करात जैसे छत्रपो  से भी बदतर हो गयी है | तीसरा मोर्चा कांग्रेस की बी टीम ही तो है |जो इतिहास मे , आज या कल जो कांग्रेस के साथ  लिए घुटने के बल , रेंग कर चले हो और   जो  छदम  धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जनता को  मुर्ख बनाने और गैर कांग्रेसी गैर बी जे पी  वोटो को लुभा कर कांग्रेसी सरकार बनवाकर  , बक्त आने पर सत्ता मे स्वम् बेठने  के लिए बनाई गयी है | आतकबाद  के मुद्दे हो या रोजगार की समस्या , लालू जी के पार्टी का पुन्र उदय हो , या कांग्रेस से समर्थन ले कर करी गलती जिससे उनका सत्ता मोह सामने आया है जिस प्रकार उनकी 
 छवि अब दिन प्रतिदिन धूमिल हो रही है | उससे जापानी पुराणिक योद्धा सामुराई की हारकारी की याद आती है | राजनीति मे सही समय पर सही निर्णय से ही लाल किले तक पहुचा जा सकता है |नही तो आसमान से धूल मे मिलने मे समय नही लगता |