Friday, December 7, 2012

भईया - 2 ,

भईया  - 2 ,
हा तो अब घर की बड़ी बहु रूचि बहुत  सेवा भाव से माता -पिता और भाइयो की सेवा करने लगी थी । पर आखिर कब तक ? इधर रघु जी भी नोकरी से सेवा निवर्त हो गए थे ।पेंसन थी नही और जमा  सारे  पैसे पहेले  लड़की की शादी में  लगा दिए फिर  प्रकाश जी की शादी में  सारे खाते खाली  हो गए बड़ा लड़का जो था ।जिसके होने पैर भी बहुत  बड़ी दावत होई थी अब तो खैर शादी हुई थी  , दारू की नदिया बहा  दी थी ।मुर्गे कई दिन तक घर से न निकले कही शहीद  न होना पड़े ।अब फण्ड तक के पैसे मकान मै  लगा दिए सोचा अब करना क्या है ? पैसो का 4-5 लाख बचेये और दोस्तों को बियाज पर दे दिया जहा  से महीने बार आमदनी होने लगी ।और अब दुसरे लड़के की भी नोकरी लग गयी थी बैंक मै मेनेजर जिस कारण कोई समस्या  न रही ।
 इधर प्रकाश जी की प्रथम पुत्र हुआ   फिर 3 सालो बाद एक लड़की हुई और एस बीच एक लड़की की जन्म लेने से पहेले ही हत्या भी करवा दी गयी रूचि जी के डोक्टर आंटी  की मदद  से
।जब की वे देश की सेवा कर रहे थे और हर बार  सारा काम पुष्प जी ने ख़ुशी - ख़ुशी  सभाल लिया और अपनी लड़की को बुला लिया सुसराल से मदद के लिए । परिवार में नया  जीवन आ गया मानो  रघु जी तो बस मानो  जवान ही हो गए ।हस्पताल का सारा काम सभाल लिया ।खुल कर खर्च किया  ।मनो भविस्ये के लिए निवेश कर रहे हो ।पर भविस्ये  देखा किसने है ?  पर अब बक्त गुजर रहा था , बच्चे हो गए थे  घर की राजनीती में सत्तापरिवर्तन का असर होने लगा था । पुष्पा जी को सेवा की आदत हो गयी थी और बहु को सेवा की कीमत पता चल गयी थी धीरे - धीरे खाने के समय पर ही बच्चे रोने लगे थे जिससे खाने बालों को खाना जहर लगने लगता था । और किस के दिल में क्या है भगवन ही  जान सकते है और सेवा होने कब तक थी ?
,  जब तक की उनके बच्चे बड़े हो न जाये ।नही तो बहुत  परेशानी  होने वाली थी । प्रकाश जी ( भईया ) की नोकरी सेवा सदा दुर्गम इलाकों में  रहेने बलि थी जहा  न स्कूल होने थी और ना  परिवार के आवास , अच्छा खाना मिलना भी मुस्किल था । यहा  दोनों बच्चे खुशी - ख़ुशी अपने चचाओ के साथ अपनी शिक्षा ले ही  रहे थे । उन्हें लाना ले जाना पिता के सारे  सब  काम  अब चचाओ  की मुख्य जिम्मेदारी थी ।प्रकाश जी का लड़का पाचवी मै आ गया और लड़की प्रथम कक्षा मै ।अब खेल बदल गया था ।

Thursday, November 22, 2012

आजाद लड़के ! दोस्ती की कसम ..

आजाद लड़के ! दोस्ती की कसम


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आजाद लड़के !दोस्ती की कसम ….


आजाद लड़के !दोस्ती की कसम
बात कुछ पुरानी है । लगभग 10 साल पुरानी हमारे आजाद लड़की की कहानी बाले सब दोस्त छोटे थे । पर बहुत खोते थे । समीर पहलवान अपने रिश्तेदारी में गए थे।ये महान बालक था जो जन्म से ही भाग्येशाली था ।पूरे खानदान में दो ही भाई थे ।बड़ा भाई दही बड़ा बना रह गया और जीवन में मस्त बना रहा । आम तौर पर पैसे बाले खानदानो के बड़े लड़के ऐसे ही होते है ।अब सारे खानदान को सचिन से ही उम्मीद थी ।उसकी उचाई 6 फीट से निकलती थी और शरीर दारा सिंह के लड़के बिंदु जैसा था ।उस टाइम में भी वुडलैंड के जूते और सोने की चैन थे उसपर ,जब अधिकतर हमउम्र लड़के रबर की चप्पल , और 5 रुपए बाले लोकेट पहन कर हीरो बनते थे, पहनते थे ।कभी ऐसा न हुआ की उसने जो चीज़ सोची हो, न मिली हो ।वो साईकिल खोने के बाद भी हस्ता हुआ घर आ सकता था ।उस दिन भी भाग्य से वो बहा नही था ”
तो बोद्धी यानि विशाल गलती से साथ हो गए ।ये बोद्धि सहाब हर लड़के के समहू में होते है हर सहर मै . इनकी पहेचन ये है की सदा समय का पालन करते है सबका काम दिल से करते है । अपनी कोई बात नही करते सबकी सुनते है कई बार तो एक सब्द भी होता पुरे दिन बस चुप ! हर कोई इनका शोषण करता है हर तरीके से पर ये ख़ुस रहेते है ।नीरज को अपने घर पर बहुत काम होता था वो घर के वर्तन , पोछा सब करते ,उनकी माता जी का रोब तो उनके पिता जी भी मानते थे ।इसलिए वो खाना बनाने में निपुण थे ।पर उस दिन त्यौहार की छुट्टी थी दोनों की , दो -3 घंटे की ।सो वो भी साथ थे ।
बोंस जब भी बोंस ही थे ।घर मै छोटे , बिगड़े लड़ाकू , हर लड़ाई में आगे ,सहर की राजनीति पर पकड़ के लिए लोकल नेताओ के आगे पीछे चमचागिरी रहेते थे ।स्थानीय M .P . के लोकल घर तक आना जाना था । जिस कारण कम उम्र में ही पुलिस तक से पंगा ले लेते थे सबसे बड़ी बात ये थी उनके साथ 20 -25 खाली लडको की फौज थी जो राजनीति में बड़ी काम आती थी , उससे भी बड़ी बात ये की उनके पास पैदल और साइकिल के ज़माने में बाइक थी वो भी याहामा , जिस पर हर टाइम 4 लड़के लटके रहेते थे ।पर असली बात ये थी की गाड़ी उनके फौजी भाई की शादी मै मिली थी और वो देश की रक्षा मै गया था ।पट्रोल तो 10/- का भी मिल जाता था । सबके दाता राम !एक बार अपने खेल के मैदान मै दुसरे मोहल्ले के लडको को अकेले ही खेलने से रोकने पहुच गए !पिटते रहे पर खेलने न दिया , विकेट पर ही बैठ गए अपने लडको के आने तक , तब से सब लड़के बॉस मनाने लगे थे ।अगर एक बार बोल दिया तो लड़के अच्छी से अच्छी शादी बारात का बहिष्कार कर देते थे ।लड़ने मै कभी छोटे – बड़े का फर्क नही किया ।किसी के लिए भी कहि भी लड़ जाते ।
दो जुड़वाँ भाई थे ।राजीव- संजीव एक गोरा था तो एक काला था ।पिता जी अपने बिभाग में पेंशन देखते थे ।जहा की कमाई घर में फली नही ,रिश्वत के मामले में फ़स गए मुकदमा चलता रहा , और लड़के 9 वी से आगे पड ही नही पाए अपने आप ही जागरण पार्टी मै जाने लगे थे ।आवारा नही थे पर पढाई मै दिल नही लगा
जन्मास्टमी की रात थी 8-10-लड़के दल बनाकर चल दिए झाकी देखने रात के 11 बजे ।एस दिन पूरा शहर 12-1 बजे तक सडको और मन्दिर में मिलता था। इस रात के सफ़र में दादागिरी दिखाना और लडकियों को टपना ,फब्ती कसना ,और एक दो चालू लडको को सिगरेट भी पीनी होती थी कुछ गुटके खा लेते थे वर्त मई भी ।आदि मुख्य उदेश्य रहेते थे ।उस टाइम अगर लड़की किसी को देख भर ले तो बस …..15-20 दिनों तक नहा धोकर साफ दिखना . उसके पीछे रहना , इंतजार करना ,उसका कोई और आशिक हो तो महाभारत होता ही था ।और लडकिय रहेती भी तो साइकिल पर ही थी , उनका पीछा करना आशान था । अब तो सारी माइकल
सुमेकर की चाची बनी रहेती है अपनी स्कूटी पर । और पुलिस बाले भी नही रोकते उन्हें ? चाहे हेलमेट पहेने या नही ? और लाइसेंस तो आज तक पुरे भारत में किसे लड़की का चेक नही हुआ। क्यों जी ?
हा तो रात बारह बजे सब के सब बापस आ रहे थे की एक साथी परमोद को निशानेबाज़ी सूझी ।ये साथी बड़े चैंपियन टाइप थे ।डंडे से खेल कर भी शतक बना देते थे हर खेल मै आगे ।पर पता नही क्यों डेरी के काम मै बड़ी रूचि थी ।3 – 4 भेसो के देख भाल अकेले करते थे ।पढाई मै जरुर हलके रह गए थे । कुछ दिनों से दातों के पेइरिया बीमारी के देशी इलाज़ (शायद तम्बाकू का मंजन ) के कारण कुछ नशे में रहेते थे ।
सब ने रस्ते में पड़ने वाले नाम के बोर्ड पर पत्थर मारने शुरू कर दिये ।फिर अचानक ……. वो हुआ जो नही होना था ।परमोद का एक पत्थर सीधा बिजली के खम्बे पर हलोज़ेन की लाइट पर लगा और …अब की आखो के सामने अँधेरा छा गया ।ऐसी आवाज़ आई।।।। मानो कुए में कोई गिर गया हो । लाइट फूट गयी थी ।
अचानक पास के घर से चिलाने की आवाज़े आने लगी ।वो घर GIC के अध्यापक यादव जी का था ।जो सब लडको को क्लास सहित जानते थे ।सब भागने लगे मानो ओलंपिक फाइनल का रेस मुकाबला हो रहा हो !सब के सब भाग कर बॉस के छत पर चढ़ गए थे ।अभी इतना खतरा नही था मास्टरजी के दो लड़के थे जिनको धमकाया जा सकता था ।और मोहल्ले के सब लड़के उनके स्कूल में नही थे ।अपने दिल को दिलासा देते सब घर जाकर सो गए ।
पर सुबह ही क्लेस हो गया ।सचिन भाग कर आया और कहेने लगा की सरकारी पुलिस का एक मुखबिर एस घटना के बारे में पुच – ताछ कर रहा है।उनके मामा जी से जो खुद पुलिस में दरोगा
थे ।की रात मै किसने लाइट फोड़ी थी ।और नाम पता होने पर FIR भी होंगी । बातो बातो में पता चला की वो बहार नही गया था बाज़ार गया था तभी हँसकर सारी बाते बता रहा था\।अब सबको अपने घरबालो की प्रतिकिर्या याद आने लगी जो पुलिस से भी जाएदा खतरनाक हो सकती थी ।
कमजोर दिल वाले रोने लगे। पुलिस की मार से ड र कर ।प्रमोद का नाम नफरत से लेने लगे ।
पर बोस ने कहा “की हमें किसे का नाम नही लेना “सबको दोस्ती की कसम है ।चाहे जान चली जाये ।उन्हें अपनी नेतागिरी पर भरोसा था ।पर मम्मी की मार से कोन सा नेता बचा सकता है ?
अब उस पुलिस के मुखबिर की खोज शुरू की गयी ।किस तरह उसे चुप करना है ।पर पता चला वो सिदांत बादी टाइप है नही मानेगा ।और जाएदा कोशिश की तो सब को पहचान भी लेंगा ।
शाम तक जान गले में अटकी रही ।सारे इलाके में बात हो रही थी ।परमोद के पिताजी ने गद्दारी कर दी ।और गुरु जी को ये समझा आये की उनका लड़का बहा नही था ।यही से फूट पड गयी ।आपात बैठक में तय हुआ की सब परमोद का ही नाम लेंगे । और आगे से उसका बहिष्कार होंगा ।अब गुरु जी के लड़के को धमकी दी गयी की उसके पिता जी ने मास्टरी दिखाई तो ठीक न होंगा !और रही बात लाइट की तो वो ठीक जल्दी ही करवा दी जाएँगी ।वो थोरा डरपोक था सो उसने पता नही क्या किया गुरु जी गवाही देने से मुकर गए ।सब लडको के नाम भूल गए ।पर पुलिस के घर आने का डर अभी बाकि था सो सचिन के मामा के पास जाकर थाने की फील्डिंग लगवा दी गयी ।उन्हें पटाने मै माफ़ी – रोना -धोना- रिश्ते नाते , सब चला ।बाकि तो MP सहाब है ही …. बहुत पोस्टर /नारे लगाये थे चुनाव मै , सबने उनके दो टाइम के आलू -पूरी और आम के आचार के लिए ।दारू भी थी, पर अभी लड़के इतने बड़े नही हुए थे ।घर का डर दिल में था ।
अचानक पता चला की वो मान गया , जो पहला इमानदार आदमी था जिसने देश के बारे मै सोचा था । सचिन के मामा ने अपना काम कर दिया ।
सब ने आराम की सास ली ।
पर प्रमोद अब सब से अलग रहने लगा था ।और मोका मिलते ही सबने उससे बदला ले ही लिया !पिटाई भी करी ।और 6 सालो के बाद हुई शादी मै भी कोई नही गया । आज तक उसका बहिष्कार है ।हां लाइट जरुर 7 दिनों में बदलवा दी गयी ।
तो बोद्धी यानि नरेश गलती से साथ हो गए ।ये बोद्धि सहाब हर लड़के के समहू में होते है हर सहर मै . इनकी पहेचन ये है की सदा समय का पालन करते है सबका काम दिल से करते है । अपनी कोई बात नही करते सबकी सुनते है कई बार तो एक सब्द भी होता पुरे दिन बस चुप ! हर कोई इनका शोषण करता है हर तरीके से पर ये ख़ुस रहेते है ।राजू को अपने घर पर बहुत काम होता था वो घर के वर्तन , पोछा सब करते ,उनकी माता जी का रोब तो उनके पिता जी भी मानते थे ।इसलिए वो खाना बनाने में निपुण थे ।पर उस दिन त्यौहार की छुट्टी थी दोनों की , दो -3 घंटे की ।
बोंस जब भी बोंस ही थे ।घर मै छोटे , बिगड़े लड़ाकू , हर लड़ाई में आगे ,सहर की राजनीति पर पकड़ के लिए लोकल नेताओ के आगे पीछे रहेते थे ।स्थानीय M .P . के लोकल घर तक आना जाना था । जिस कारण कम उम्र में ही पुलिस तक से पंगा ले लेते थे सबसे बड़ी बात ये थी उनके साथ 20 -25 खाली लडको की फौज थी जो राजनीति में बड़ी काम आती थी , उससे भी बड़ी बात ये की उनके पास पैदल और साइकिल के ज़माने में बाइक थी वो भी याहामा , जिस पर हर टाइम 4 लड़के लटके रहेते थे ।पर असली बात ये थी की गाड़ी उनके फौजी भाई की शादी मै मिली थी और वो देश की रक्षा मै गया था ।पट्रोल तो 10/- का भी मिल जाता था । सबके दाता राम ! अपने खेल के मैदान मै दुसरे मोहल्ले के लडको को अकेले ही खेलने से रोकने पहुच गए !पिटते रहे पर खेलने न दिया , विकेट पर ही बैठ गए अपने लडको के आने तक , तब से सब लड़के बॉस मनाने लगे थे ।अगर एक बार बोल दिया तो लड़के अच्छी से अच्छी शादी बारात का बहिष्कार कर देते थे ।लड़ने मै कभी छोटे – बड़े का फर्क नही किया ।किसी के लिए भी कहि भी लड़ जाते ।
जन्मास्टमी की रात थी 8-10-लड़के दल बनाकर चल दिए झाकी देखने रात के 11 बजे ।एस दिन पूरा शहर 12-1 बजे तक सडको और मन्दिर में मिलता था। इस रात के सफ़र में दादागिरी दिखाना और लडकियों को टपना ,फब्ती कसना ,और एक दो चालू लडको को सिगरेट भी पीनी होती थी कुछ गुटके खा लेते थे वर्त मई भी ।आदि मुख्य उदेश्य रहेते थे ।उस टाइम अगर लड़की किसी को देख भर ले तो बस …..15-20 दिनों तक नहा धोकर साफ दिखना . उसके पीछे रहना , इंतजार करना ,उसका कोई और आशिक हो तो महाभारत होता ही था ।और लडकिय रहेती भी तो साइकिल पर ही थी , उनका पीछा करना आशान था । अब तो सारी माइकल
सुमेकर की चाची बनी रहेती है अपनी स्कूटी पर । और पुलिस बाले भी नही रोकते उन्हें ? चाहे हेलमेट पहेने या नही ? और लाइसेंस तो आज तक पुरे भारत में किसे लड़की का चेक नही हुआ। क्यों जी ?
हा तो रात बारह बजे सब के सब बापस आ रहे थे की एक साथी परमोद को निशानेबाज़ी सूझी ।ये साथी बड़े चैंपियन टाइप थे ।डंडे से खेल केर भी शतक बना देते थे हर खेल मै आगे ।पर पता नही क्यों डेरी के काम मै बड़ी रूचि थी ।3 – 4 भेसो के देख भाल अकेले करते थे ।पढाई मै जरुर हलके रह गए थे । कुछ दिनों से दातों के पेइरिया बीमारी के देशी इलाज़ (शायद तम्बाकू का मंजन ) के कारण कुछ नशे में रहेते थे ।
सब ने रस्ते में पड़ने वाले नाम के बोर्ड पर पत्थर मारने शुरू कर दिये ।फिर अचानक ……. वो हुआ जो नही होना था ।परमोद का एक पत्थर सीधा बिजली के खम्बे पर हलोज़ेन की लाइट पर लगा और …अब की आखो के सामने अँधेरा छा गया ।ऐसी आवाज़ आई मानो कुए में कोई गिर गया हो । लाइट फूट गयी थी ।
अचानक पास के घर से चिलाने की आवाज़े आने लगी ।वो घर GIC के अध्यापक यादव जी का था ।जो सब लडको को क्लास सहित जानते थे ।सब भागने लगे मानो ओलंपिक फाइनल का रेस मुकाबला हो रहा हो !सब के सब भाग कर बॉस के छत पर चढ़ गए थे ।अभी इतना खतरा नही था मास्टरजी के दो लड़के थे जिनको धमकाया जा सकता था ।और मोहल्ले के सब लड़के उनके स्कूल में नही थे ।अपने दिल को दिलासा देते सब घर जाकर सो गए ।
पर सुबह ही क्लेस हो गया ।सचिन भाग कर आया और कहेने लगा की सरकारी पुलिस का एक मुखबिर एस घटना के बारे में पुच – ताछ कर रहा है।उनके मामा जी से जो खुद पुलिस में दरोगा
थे ।की रात मै किसने लाइट फोड़ी थी ।और नाम पता होने पर FIR भी होंगी । बातो बातो में पता चला की वो बहार नही गया था बाज़ार गया था तभी हँसकर सारी बाते बता रहा था\।अब सबको अपने घरबालो की प्रतिकिर्या याद आने लगी जो पुलिस से भी जाएदा खतरनाक हो सकती थी ।
कमजोर दिल वाले रोने लगे। पुलिस की मार से ड र कर ।प्रमोद का नाम नफरत से लेने लगे ।
पर बोस ने कहा “की हमें किसे का नाम नही लेना “सबको दोस्ती की कसम है ।चाहे जान चली जाये ।उन्हें अपनी नेतागिरी पर भरोसा था ।पर मम्मी की मार से कोन सा नेता बचा सकता है ?
अब उस पुलिस के मुखबिर की खोज शुरू की गयी ।किस तरह उसे चुप करना है ।पर पता चला वो सिदांत बादी टाइप है नही मानेगा ।और जाएदा कोशिश की तो सब को पहचान भी लेंगा ।
शाम तक जान गले में अटकी रही ।सारे इलाके में बात हो रही थी ।परमोद के पिताजी ने गद्दारी कर दी ।और गुरु जी को ये समझा आये की उनका लड़का बहा नही था ।यही से फूट पड गयी ।आपात बैठक में तय हुआ की सब परमोद का ही नाम लेंगे । और आगे से उसका बहिष्कार होंगा ।अब गुरु जी के लड़के को धमकी दी गयी की उसके पिता जी ने मास्टरी दिखाई तो ठीक न होंगा !और रही बात लाइट की तो वो ठीक जल्दी ही करवा दी जाएँगी ।वो थोरा डरपोक था सो उसने पता नही क्या किया गुरु जी गवाही देने से मुकर गए ।सब लडको के नाम भूल गए ।पर पुलिस के घर आने का डर अभी बाकि था सो सचिन के मामा के पास जाकर थाने की फील्डिंग लगवा दी गयी ।उन्हें पटाने मै माफ़ी – रोना -धोना- रिश्ते नाते , सब चला ।बाकि तो MP सहाब है ही …. बहुत पोस्टर /नारे लगाये थे चुनाव मै , सबने उनके दो टाइम के आलू -पूरी और आम के आचार के लिए ।दारू भी थी, पर अभी लड़के इतने बड़े नही हुए थे ।घर का डर दिल में था ।
बाकि कल ……..DSC00946

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Wednesday, October 10, 2012

मुख्या परीक्षा राज्य सेवा 2012 के इतिहास विषय प्रथम प्रश्न पत्र


  1.          मुख्या परीक्षा राज्य सेवा  2012 के इतिहास विषय प्रथम प्रश्न पत्र 

  2. सिन्धु घाटी का नागरिक जीवन एवं नगर नियोजन की विवेचना 
  3.  सिन्धु घाटी का वेदेशी संपर्क एवं पतन के कारण 
  4. वैदिक युग की आर्थिक  एवं सामाजिक दशा ( आश्रम ) 
  5. भारत पर वेदेशी आक्रमण कुषाण 
  6. बुद्ध  का दर्शन एवं प्रसार 
  7. समुंद गुप्त की राज निति 
  8. अशोक का धम्म 
  9. गुप्तोतेर भारत  सामंतवाद उदय एवं प्रभाव 
  10. चोल का शासन एवं ग्राम प्रसाशन 
  11. त्रिकोण संघर्ष 
  12. हर्ष का राज्यकाल 
  13. भारत में धार्मिक आन्दोलन 
  14. पल्लव की निर्माण कला एवं पतन 
  15. सक्ति  धर्म 
  16. टिप्पणी ------
  17. वेदेशी विवरण 
  18. गुज्जर / प्रतिहार 
  19. इस्लाम का उदय 
  20. अशोक के अभिलेख 
  21. कश्मीर का इतिहास राज्तारंगिनी कल्हण 
  22. राजपूतो की उत्पत्ति 
  23. चालुक्य बादामी 



  1. सल्तनत कल में भक्ति एवं सूफी  आन्दोलन एवं धार्मिक एकता 
  2. खिलज़ी की बाज़ार निति 
  3.  मुहम्मद तुगलग की असफलताए 
  4. फिरोज तुगलक की शासन नीतिया 
  5. विजय नगर 
  6. अकबर की धार्मिक निति , भूमि कर  वेवस्था मनसबदारी की तुलना शेर शहा  सूरी के साथ 
  7. मुग़ल काल की कला ( निर्माण एवं अन्य )
  8. शिवाजी की शासन वेवस्था एवं मराठा विस्तार एवं उथान 
  9. औरंजेब की धार्मिक नीतिया 
  10. टिप्पणी -----
  11. अक्ता 
  12. बलबन का राजतत्व सिद्धांत 
  13. दिन - इ - इलाही 





Tuesday, October 9, 2012

लक्ष्मी आ गयी !

लक्ष्मी आ गयी !
राजू भाई का असली  नाम तो है राजकुमार , लेकिन वर्तमान समय के अनुसार  नाम सुनने मे  प्राचीन लगने की बजह  से अपना नाम सबको  राजेश बताते है ।खुबसूरत तो बहुत  है 3३  की उम्र मे भी  अभी तक , पर बालो को रंगीन बनाने के शोंक  ने बाल २ ५ की उम्र में  ही उड़ा  दिए थे  । अब पूरा मैदान साफ है । नकली बाल भी लगवाए गए पैसे जोडकर , पर उनमे गर्मी बहुत  लगती थी, रोज़ चिपकाने की परेशानी अलग थी ।फिर अब जब  सबके समझ मे  आ ही जाते है की बाल नकली है तो फायेदा क्या हुआ ? तो वो प्रयोग भी विफल रहे । शादी तो आम निम्न वर्गीय परिवार की तरह 24 साल की उम्र में ही हो गयी थी ।परिवार बिलकुलबाल्मीकि महाराज की  रामायण की तरह था । बहुत प्यार  था तीनो भाइयो में , वो बीच के भाई थे ।दसरथ मतलब रामप्रकाश जी भी सेवा से निवर्त हो गए थे  । शादी  को अब 9 साल हो गए है  पर उनके घर में अभी तक कोई बच्चा नही हुआ  । छोटे भाई के भी दो बच्चे हो गए । बड़े के बच्चे तो जवान हो चले थे ।जिनको वो अपने बच्चो की तरह ही मानते रहे थे अभी तक ,पर बच्चे बस अपने काम , बढ़िया खाना, और पैसे  के लिए ही उन्हें अपना मानते थे ।
काम हो जाने  पर टा - टा  कर देते और  वो राजू चाचा के राजू चाचा ही  ही रह जाते थे पापा ना  कहलाये गए  ।और दुसरे की थाली को देख कर  अपना पेट नही भरता इसी तरह अभी तक बच्चो के प्यार के  लिए राजू चाचा   भूके ही  थे ।
अपनी छोटी सी प्राइवेट नोकरी मे  बहुत  पैसा लगा दिया था इलाज़ में ,पर कुछ फायेदा  न हुआ ।एक बार तो बड़े भाई के कहने  पर उन पर भी दाव लगा दिया की वो तिसरा  बच्चा उनके लिए पैदा करेंगे  ।  पर उनकी भाभी  ग्रवस्था मे  भी  करवाचोथ के वर्त पर पूर्ण भूखी थी हर भारतीय नारी के मानिद  ।और अपने छोटे से  बूटी पार्लर पर होने वाली कमाई  के लालच को न छोड़ पाने  के कारन , दर्द होने पर भी  डोक्टर के पास नही गयी और  ५ ० /-रुपे  प्रति हाथ के दर से सुबह  से शाम तक मेहँदी लगाती रही और अगले दिन अस्पताल मे  भर्ती  हुई  और  वहा  रे उनकी  किस्मत !अगले ही दिन  बच्चा हुआ भी तो मरा  हुआ ।पर दुःख इसलिए बड  गया की वो लड़का था । कुल मिलाकर 70 -80 हज़ार रुपे  लग गए भाभी के देखभाल और इलाज़ मे  , पर नतीजा कुछ  न निकला ।जिन्दगी भर का एहसान भी रह गया बड़े  भाई का ।
सहर  के डोक्टर कम पड  गए, दिल्ही तक हो आये  थे ।मेरठ में  भोले नाथ का   कलिपल्टन ,मथुरा, बन्दाबन , बद्रीनाथ - केदारनाथ  मन्दिर  तो क्या ? रूडकी के  प्रान कलियर की दरगह ,सरधना का बेगम समरू का  चर्च ,शीसगंज के गुरु जी सब को तो मनाया पर , किसी को दया नही आई , कोई नही माना ।अब भी बहुत सारे साधू - संत ,दरवेश ,पीर - मुनीर  आशीर्वाद के नाम पर धन लीला का खेल रहे थे ।
यारो - दोस्तों का कहना  ये था , की जवानी के दिनों में बहुत लडकियों को प्यार के नाम पर  धोका दिया था । राजकुमार जी ने इसलिए उन लडकियों की बददुया से ही  ये सब हो रहा है ।
अरे !  उन के साथ खाना ,पीना, घूम- फिर  चुके थे ।पर दिल्लगी ही रही । दिल की लगी नही बनी कोई ।या समाज और  घरवालो का डर  बहुत था उस समय ।चहा  कर भी लव मेरिज  नही कर पाए ।पर इसी काल मे  एक दो बार मन ही मन दूसरी शादी का विचार बनाया  भी पर घर मे  किसी  को बोल पाने की हिम्मत ही न हुई ? साली पर बहुत    डोरे डाले पर  बड़ी बहन को तलाक देकर  छोटी से शादी करने को कोन  तैयार होता ? सो मामला शुरूहोने से पहेले  ही  ख़तम ।
एक दिन पता चला की पास के कसबे के छोटे से हॉस्पिटल की नर्से , बच्चा दिलवा सकती है । बहा बिन बिहाई लडकिया और  लड़के की चाहत में 2 -3 लडकियो को जन्म दे   चुकी महिलाये , अपने पाप कर्मो को  और बढाने   आती है ।काफी इंतजार के बाद  ,बहा  भी कोई लड़का नही मिला ।बहा  भी लडकियों का मौसम चल रहा था ।20 हज़ार अग्रिम पानी में गया ।नर्से भी काम न आई ।नही तो उसे दोनों तरफ से कमाई  होनी थी ।
कई राज्यों के अनाथ आश्रमो से संपर्क किया गया पर  उनकी सरकारी नोकरी न होना , स्थायी सम्पति की आवश्यकता   और बहुत  सारी प्रक्रिया पूर्ण न कर पाने के कारण ,  बहा  भी काम नही बना । बच्चा गोद लेना कितना मुस्किल है ? गरीबो के लिये ,अब पता चला उनके  चहने वालो को ।हमारे देश से विदेशियों को आराम से बच्चे मिल जाते है ।गोद लेने के नाम पर ,उट  दोड़/ घर का काम  और बाकी  कामो के लिए, पर जरुरत मंदों को कभी नही ।
रोज़ अखवार भी देखे जाते थे पर लावारिश बच्चो में  भी सब लडकिय ही होती थी । लगता तो ये था की पुलिस  भी लडको को कुछ ले दे कर   कही  ठिकाने लगा देती है । या बस भारत में लडकिय ही लावारिस होती है ।लडको के वारिस तो हर जाति धर्म समाज और  घर मे होते है
अचानक  ,आशा की एक  किरण नही , पूरा सूरज दिखाई दिया । जब शहर  मै एक  नई लेडी  डोक्टर लन्दन से  पड़ कर  आई  और पड़ोस के एक दोस्त के यहा  एक तपस्वी  स्वामी जी के असिर्वाद से लड़की हीपैदा   हुई  , शादी के 5 सालो के बाद ।अब बड़े उत्सह से  दोनों टोटके साथ ही चले । दोनों ने ही साधारण इलाज़ किया और लगभग 6 महीने  में ही खुसखबरी  मिल गयी ।एक साल मै  बालक हो गया  और जादू हो गया । असंभव भी संभव हो गया ,पर भगवान की लीला बड़ी नियारी है ! राजकुमार जी के यहा लक्ष्मी आ गयी ।
पर बड़े खुस थे ! यारो को दारू / मुर्गा की पार्टी दी गयी और महोल्ले बालो को माता के  जागरण के साथ भंडारा टाइप दावत । बिना पूछे वो  बोलते थे, चलो अच्छा है ! लड़की हुई !..........सच में  उनके घर मे लक्षमी आ ही गयी ।जय लक्ष्मी माता की !!!

                                                                                                                         लेखक -   रोहित ,
                                                                                                                          ग्राम - खानपुर
                                                                                                                          पोस्ट - थानाभवन
                                                                                                                           जिला -शामली (ऊ ,प्र )



Wednesday, September 12, 2012

आजाद लड़की -3

आजाद लड़की -3
                          दोस्तों अब ये आजाद लड़की , कहानियों की एक सिरीज़ बन गयी है जिस को जोडकर एक उपन्यास बनाया जा सकता है । समाज के बदलते नजरिये की तस्वीर बनाने बैठा  हु । कोई रंग उपर नीचे  हो जाये तो बताना जरुर ।
हुआ ये की हमारे खाली  समहू के नेता जी ही एस बार फस गए ।फसे तो पिछले 5-6 वर्षो से थे । पर वो लड़की रामपुर जैसे छोटे सहर  की आम घरेलु टाइप लड़की थी जिससे मिलने जाना अब मुस्किल हो चूका था । क्युकी बहुत  पुराना सम्बन्ध था। दिल भी भर गया था । नये पन  की तलाश में मुह मारते  फिरते थे \\ और हा  फसना तो हर पुरुस चहता  है पर हिम्मत कितनो की है ? लड़की थी हमारे बड़े शाब के साले  की खास दोस्त पूजा  जो हरिद्वार में रहती थी और किसी गाव में उसके पिता जी का जमिदाराना था तो  पैसा कोई समस्या नही थी ।बस डॉक्टर बनाने के लिए शहर भेजा था  घर बालो ने ,पर उसने पढाई दिल के डोक्टर के लिए शुरू कर दी थी ... बिलकुल बोल्ड &; बुटिफुल बाले अंदाज में ...शाब के साले  ने उसका नम्बर दिया अपने ग्रुप के बॉस को , उसने दो तीन  मिस काल मार  कर बाते बनाना शुरू कर दिया ( आजकल यही तरीका चल रहा  है मोबाइल से नारी पटाने  का , पता नही क्यों ? बार बार प्रेषण होने पर भी नारी, मिस कॉल बाले से यही पूछती है की आप कोन  बोल रहे है ?आपको किस से बात करनी है ? और दो चार दिन में नारी अपना अकेलापन दूर करने की दवा खा लेती है ) और जब  बता दिया गया  की मोबाइल का नंबर कहा  से लिया है  , तब मामला एकदम फिट हो गया ।साले  शहाब  के रुतवे का असर , और पक्की सरकारी नोकरी बाला लड़का लव मेरिज करने को कहा  मिलते है ? ये बात अलग है की साले सहाब  खुद सविदा पर नोकरी कर रहे थे ,दोनों  दोस्त कभी भी खाली हो सकते थे । दुनिया -जहां की बाते होने लगी ,। face book  पर फेस दिख ही रहे थे , रात दिन चैन नही रहा मानो  दोनों एक दूजे के लिए ही बने है /थे ।पर मिले अब है| जब 5-7 बार लव यु बोल सुन चुके थे  पर उन पुरनी बातो को अब कोन पूछता है जी ? अब तो आज - अभी पर दुनिया चलती है जी ! पल पल में बफादरी बदलती है !लड़की खुबसूरत हो और लड़का सरकारी अधिकारी हो तो कुछ भी हो सकता है ।न जाने कितनी लडकियों की जिन्दगी इन  कनाडा बाले और नकली नोकरी करने बाले लडको ने ख़राब करी है ? फिर भी होती रहेंगी ।सुंदर भविष्य का  लालच आँखों पर पर्दा डाल  देता है ।चाहे  लड़की के माता पिता हो या खुद मोर्डन लड़की !यु तो ठगों में ठगी होती नही है ! पर नुकसान - फायेदा जोड़ा जाये तो हो भी जाती है ।और जब भी ठगी होती है उसके पीछे नही आगे सामने ही लालच साफ साफ दिखाई देता है ।पर देख कोई नही पता है ।

अब हुआ ये की हमारे बॉस को खास आमंत्रण मिला । मिलने आने का , बात चीत के एक सप्ताह के अंदर , शायद पूजा को लगा की लड़का हाथ से न निकल जाये तो ...........कुछ होना जरुरी है !जिस के लिए लडकी  को कुछ तो  खास  करना ही होता है  ?उधर भगवन भी  मेहर वान थे , पुरानी बाली  के घर पर बात खुल गयी थी। सो बातचीत बन्द   थी ।मोबाइल पर उसका फ़ोन नही आता था । दिल उदास था रात को लाइट तो थी । नींद नही थी । तो जी धार्मिक नगरी में अधर्म के लिए पहुच गए बॉस !

गए तो 3 दिन के लिए थे पर " सैर कर दुनिया की ग़ालिब , जिंदगानी फिर कहा ? जिंदगानी भी रही तो ,नोजवानी फिर कहा ?
की तर्ज़ पर 15 दिन तक , हनीमून / लव इन / लाइव इन  मना  डाला । थैंक्स नेट बैंकिंग ! जो उधार लेने देने की लिए बड़ी सुबिदा है ।15 दिनों में दुनिया ही बदल गयी । अरे प्रथम श्रेणी के अधीकारी जो थे !दोस्तों के बैंक खाते भी जब खाली  हो गए तो बापस  आना ही  पड़ा ।पर अब  उनकी सभी रिश्तेदारो के फ़ोन नंबर लड़की पर  थे ।15 दिनों तक सारी  इन्कॉमिंग को खुद पूजा जी ने जाचा था कही लड़का किसी और के साथ भी तो खेल नही रहा उसके तरह ? ।उसके बाद पता चला की उसके घर पर सबको पता था और उन्हें अपनी लड़की की क़ाबलियत पर भरोशा था की गलत सौदा नही करेंगी ।तो पूरी छूट दे दी गयी मनो सगाई हो गयी हो पर खुद अभी तक सामने नही आये ।क्युकी बाद में मन भी करना था न रिश्ते को ,ताकि सस्ती शादी हो जाये । हिंग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा आये ।
10 घंटे के सफ़र पर आकर लड़की उनका होस्टल नुमा  घर देख गयी थी
पर जय बोलो  मोबाइल महराज की !और आपस में इज्ज़त बचाने  बाले दोस्तों की , जिन्होंने सब कुछ अफसरनुमा दिखा दिया । पर लड़की तेज़ थी ,कैलकुलेटर  नही सुपर नानो कंप्यूटर थी !इतनी जल्दी कहा  मानने बाली  थी ?
सो और रस्ते में जिद्द करके उनकी  बड़ी बहन के घर दिल्ही  जाकर , मिल भी आई  !बिलकुल मौसमी चटर्जी की तरह बन कर गयी थी ,  हमारी जेनिफ़र लोपेज़ ।जाते ही पैर भी छु लिए  दीदी  के, अब कोन ना मर जाये एन अदाओ  पर ? तो दिल्ली  बाली  दीदी भी दिल दे बेठी ।माँ - बाप को अब कोन  पुछ  रहा है ? मट्रो शहरो में  रिश्ता अब लड़के बालो की तरफ  से पक्का था । पर लड़की और अच्छा .....की कस्मश में थी ।
हमारे बॉस भी न न करके लव कर बेठे !रात - दिन बस मोबाईल ..........
उधर बड़े शहाब  के साले  महोदय बड़े परेशान  थे । चिड़िया चुग गयी खेत .... अब पचता रहे थे ।सबसे बड़ी बात तो ये थी । की उनकी बात भी उनके इलाके में  , खुल सकती थी की नोकरी अस्थाई और छोटी है । दूसरा जिस लड़की से बॉस से मिलवाया वो हाथ से निकल गयी थी और चुपचाप उनकी दोस्ती पर आरी चला रही थी ,
क्युकी लड़की को डर  ये था की कही  उसकी पुरानी  जिन्दगी के लव इन / लाइव इन सामने न आ जाये ?
और बॉस इसलिए मुह छिपा रहे थे क्युकी उनकी होने बाली पत्नी की सब चरित्र गाथा  सब लडको को पहेले  ही  साले  सहाब ने  सुना दी थी ।
इसलिए बॉस भी अब  साले  सहाब  से दूर होने लगे थे ।और पूछने पर यही कहते की मैंने सब सच बता दिया है उसे नोकरी के बारे में । सबको पता है की जुठ  बोल रहे है ।
लड़की के प्यार का चाकू दोस्ती के धागों पर चल गया ।और अपने बॉस सब दोस्तों से अलग हो गए मोबाइल लव में डूब गए । दारू पार्टी में उनका कपडे फाडू डांस / होटल में खाना खाकर एक सब्जी और मागना  सबको याद आता था । जो काम खुसबू नही कर पाई वो पूजा कर रही थी ।कहा  जाते थे ? कब आते थे ? किसी को पता न चलता ? पर  हा कपडे जरुर नए साफ सुथरे पहन  रहे थे ।
एक दिन अचानक पता चला की पूजा के दूर के जीजा जी का पास का दोस्त , बॉस की नोकरी के बारे में पुच -ताछ करने को हमारे कार्यलय  में आये  थे की वो कितने बड़े अधिकारी है ?
और बस अब खेने को क्या बचा है दोस्तों ..................



 बाकी कल 

Monday, September 3, 2012

महगाई की अर्थनीति !


महगाई की अर्थनीति  !

महगाई की अर्थनीति !


महगाई की अर्थनीति !
जनता महगाई से करहा रही है | हम सरकारी नोकर भी बहुत परेशान है कल सुबह जब में १३ रुपे लेकर छोटी डबल रोटी लेने गया तो उसने कहा की” बाबु जी १५ रुपे दो” ! अब ये १५ की है ! मैंने जिन्दगी में पहली बार पूछा
की ये कितने बजन में आती है | दुकानदार बोला 300gm मुझे फिर अचरज हुआ | ३०० gm पर २ रुपे बड गए है तो …….1000gm पर लगभग ६.६० पैसे बड गए क्यों भाई क्या कारन है ? हा ! ये सही है की , सरकारी गेहू बरसात में सड़ गया हर साल की तरह पर खुले बाज़ार में नही आया | ६ महीनों में ही आलू आधिक उत्पादन के बाद

सडको पर पड़ा सड गया | पर उठाने बाले नही थे | आज २५/- का दाम है क्यों ?
पियाज का भी अब टाइम आने बाला है सर्दी के साथ ही बाज़ार से पियाज गायब होना ही है फिर खायो ४०-५०/- की दर से ! | भण्डारण की जगह न होने पर भी गेहू की सरकारी खरीद होती है | जबकि भण्डारण करने के लिए गोदाम बनाना इतना महेगा नही है |भारत का सारा गेहू भी भण्डारण के लिये कम होंगा अगर भंडार न हो पाने के कारन ख़राब गेहू की कीमत का २०% भी इस काम में लगा दिया जाता |या भण्डारण का काम निजी लोगो को दे दिया जाता |
हम पर आपातकाल के लिए गेहू भी होता और जमाखोर भी खरीद कर जमा न करते |पर अब तो जमाखोर ही सरकारी है |
पर अब लगता है की सारी सरकारी योजनाये ही पैसा खाने के लिए बनती है ? मानव की पहली जरुरत है भोज़न अब सरकारी दलालों की गीध द्रस्थी उस पर भी पढ़ गयी है | पहले तो सरकार के दलाल बाज़ार को नियत्रित करते थे अब वो सरकार को ही चला रहे है |उनकी अपनी सरकारे चलती है राजेय
और केंद्र स्तर पर | उनकी हिसाब से नीतिया बनती है |
सरकार” को कमीसन दिया जाता था अब सरकार सारा अपने पास रखती है दलालों /गुंडों को कमीसन/ बेतन ही मिलता है |
प्रधानमत्री जी ने कहा है की महगाई का कारन भी विपक्ष ही है ……..अब हम हसे या रोये ? “बर्बादे गुलिस्ता करने को बस एक ही उल्लू काफी था ! हर साख पर उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्ता क्या होंगा ?”
अगर ……..काश ये हो पाता ….

१ .खाना / भोज़न अगर , इसमें सब्जी /गेहू /इधन/मसाले सस्ते हो तो भारत के 7० करोर
लोगो पर जादा पैसा होंगा बाकि के कपडे / मकान /यात्रा / टीवी/फ्रिज/कार / स्कूटर /मोटर साइकिल /कोस्मटिक /इलेक्ट्रोनिक्स सामान /मोबिल /बीमा /बैंक निजी बिजनिस/मनोरंजन /बच्चो की सिक्षा / स्वास्थ्य जैसे चीजो के लिए जादा पैसा होंगा बाकि के लोगो पर अब भी जाएदा ही है , जिन पर अगर वो महीने में ५००/- भी अगर जायदा खर्च करेंगा तो 3५,०००/- करोर का धन अर्थ
के पहिये को चलने के लिए बाज़ार में होंगा ? मंदी दूर ….

२.सोना /चांदी/कॉस्मेटिक्स/वेदिशी कपडे / कार /फ़ूड चेन /बड़े होटल /AC /महेंगे टीवी LCD /LED /टूर ओपेरटर
पर कर लगाकर महंगे किये जा सकते है |

३. आयकर / बिक्रीकर / सेवाकर अन्ये सभी करो की दर कम , हो पर दायरा बढाया जाये |अभी भी लाखो – करोरो लोग है जो अंधी कमाई करते है पर कर नही देते | बसूली के तरीके सही किये जाये ताकि कर बसूली में लगे , सरकारी कर्मचारी को कोई घूस लेकर/ देकर छूट न दे पाए , खजाना को ही भरे !अभी कर को जमा करने और उसको सरकारी खजाने तक पहुचने में ही इतना खर्च होता है की सुद्ध आमदनी बहुत कम होती है |ये तो वित् मंत्री जी ने ३/०९/१२ को माना ही है की कॉर्पोरेट टैक्स जो ३०% तक है उसमे केवल २४% तक की बसूली हो पाती है |
४,कृषि पर असली कायशील योजनाये बने ! जिससे वास्तव में परिवेर्तन आये, कागजो में नही | खाली , बंजर भूमि विकास के लिये ऋण मिले और विरोजगारो को ,इसे समूह बना कर २०- २५ सालो के लिये, दे जाये | उनको
जरुरी कृषि सामान कम दामो में मिले ताकि कृसी उत्पाद बड़े , महेगाई कम हो | नए भूमि विकास करने जरुरी है | सिचाई एव पीने के पानी के लिए नदियों को जोडकर उपलब्द पानी का संपूरण वेगानिक उपयोग जरुरी है |अभी भी कृषि क्षेत्र में बहुत कुछ होना बाकि है | अनुसन्धान / प्रोत्सहान /छूट /गोदाम/उत्पादों का सरक्षण / बाज़ार तक पहुच /उचित दाम ………की आवश्यकता है |अगर बर्तमान की उत्पाद दर को ही सही तरीके से ९०% तक बाज़ार मिल जाये| सड़ने , गलने ,और दलालों से बचा ले तो तो सारे के सारे उत्पाद २५% तक सस्ते हो जायेंगे |

५.उर्जा एवं विधुत क्षेत्र में बड़े सुधार होने बाकि है ……. चोरी रोको .वितरण सुधारो , समय बद्ध उत्पादन निति बने | सौर उर्जा पर भी धयान दे | पट्रोल में एथेनोल मिला कर , गन्ना किसान /मिल /उत्भोक्ता को फायेदा होंगा | सरकार की वेदेशी मुद्रा भी बचेंगी !पट्रोल के जुडी सब चीज़े सस्ती होंगी ! पर बड़ी तेल कम्पनी होने नही देंगी !अरे भाइयो ! अभी कोन सा सुद्ध तेल हमारी गाड़िया पीती है ? २५ – ५५ % तक तो कम तोली / साल्वेंट / मिटटी तेल होता ही है फिर १० % तक एथेनोल मिलाने से कोन सी तेल कंपनी बंद हो रही है ?हा थोरा बहुत घाटा जरुर होंगा बड़े लोगो को |
६. भारत में हजारो सरकारी दफ्तर है जो कुछ काम नही करते कागजो का पेट भरने के अलावा , उन सबको जोडकर -घटा दिया जाये तो ….उनको जाने बालीधन राशी / बेतन / पेंसन /और न जाने क्या क्या बच सकता है | उदाहरण -
(१) केंद्र – राज्ये स्तर की समितिया जिनमे पार्टी चमचो को सरकारी धन से मज़े दिलवाए जाते है |काम जीरो……
(२) जाच आयोगों से क्या फायदा हो रहा है देश को ?
(३) कितने हॉस्पिटल /संसथाओ ने टैक्स से बचने को अनुसधान केंद्र का नाम दिया है उनकी जाच का कोई साधन – नियम है या नही ?
(४ ) सरकारी घाटे बाले सब उपक्रमों को बंद कर दिया जाये या निजी बाजारों में खुली नीलामी हो |
(५) जितने भी सरकारी अनुसन्धान केंद्रे है अगर कोई काम नही होता तो बंद हो |………………………..आदि |
(६) कर से बचने के फंडे ख़तम हो |
(७) NGO के धंदे जो बड़े लोगो के पैसा, नाम कमाने के सौक बन गए है बंद हो !
(८) सरकार के नाम पर चलने बाले काफिले जिनका खर्च करोरो में होता है |

अगर भारत सरकार से पूछा जाये तो उनको भी नही पता होंगा की कितने दफ्तर काम करते
है सरकारी पैसे पर ?और उनकी जिम्मेदारी क्या है ? सबकी समयबद्ध जिम्मेदारी तय हो , न करने पर सजा
हो ……
७.भारत की समस्त जमीन का रिकॉर्ड की जाच हो ,बेनामी संपत्ति जप्त की जाये , हर नयी खरीद पर , धन का स्रोत्र भी बताया जाये ?यही प्रक्रिया सोना चांदी हिरा धातुयो पर भी हो
८ काला धन बाज़ार में आये उसकी नयी योजना लागु करे जाये |सक्ख्ती से काले धन पर कर्येबाही हो |
९. आयकर के रूप में प्राप्त धन में से अदिकतर सरकार का अपना ही पैसा होता हैजी सरकारी कर्मचारी और सस्थायो से मिलता है | निजी लोगो और सस्थायो को कर से बचने के लाखो साधन हमारे कानून में लिखे है कानून की समीक्षा हो !
१०. एस देश में लाखो लोग है जिन्होंने कभी खेत देखे नही है पर अनाज – सब्जियों वः अन्य उत्पादों की दलाली से ही करोरपति बने है ? खानधानी पेशा है ये पसीना किसान का बहता है गाडियों में दलाल घूमते है |
११. फसलो के दामो की “सट्टेबाजी” कितने लोग जानते है ? एक -२ मंडियों में मैंने खुद देखा की आने वाले महीनों में किस चीज़ का दाम क्या होंगा ? कैसे तय होता है ? भारत की बड़ी मंडियों में , कुछ लोग एक मकान में चारो तरफ दिवार के साथ इस तरह बैठते है मानो कोई नवाब मुजरा सुन रहे हो | फिर महिना और दाम बोला जाता है बोलिया लगती है | किसे बोली पर सहमति होती है फिर उस पर बस्तु की मात्र तय कर ली
जाती है | अब है असली खेल , निर्धारित तारीख पर दम के अन्तर का भूगतन होता हैबोली लगाने बाले को |अब क्रिकेट के खेल की सट्टेबाजी की तरह ही खिलाडी को भी पैसा देना होता है यानि वास्तव में जमाखोर ही दाम उतने पर ले जाते है जितने की बोली लगी थी |
हमें लगता है की दाम किसान के बजह से बड़ते है | और हां ! आप याद करे कभी कभी अचानक २-३ दिन तक दाम कम भी होते है सट्टेबाजी के कारन |

१२ . एक बार ही सही सबको अपनी संपत्ति घोषित करने का आदेश हो , ताकि अघोषित संपत्ति जप्त हो ,
बाकि कल ………………..
                                

Tuesday, August 21, 2012

जनता बिकल्प की नही ,अपनी रोज़ी रोटी की तलाश में

जनता बिकल्प की नही ,अपनी रोज़ी  रोटी की तलाश में  है । अब राजनीति में राय देने की अलावा जनता करती क्या है ? वोट तो अपने फायदे बालो को ही देती है .। और हा कांग्रेस 2014 में फिर सरकार बना ले तो कोई बड़ी बात नही है !सब राजनीतिग पंडितो को जुठ्लाते  हुए मेरा ये दावा है की अगली सरकार  कांग्रेस की ही बननी है !कारण :--
1.
 कोई विकल्प नही है ।
2.
 भ्रष्टअचार पर इतनी राजनीति  और नाटक हो चुके है  की जनता को अब ये विश्वास हो रहा है कुछ नही होने बाला ।इस मुद्दे में इतनी जान  नही की वोट को हिला सके ।
3.
 अन्ना जी की टीम ,बाबा रामदेव मिलकर भी 10 सीट नही निकल सकते , इनका हाल भारतीय किसान यूनियन ( बाबा  टिकेत ) बाला है। जो किसानो की लड़ाई में तो सफल थे ।पर अभी तक कोई लोकसभा  चुनाव नही जीत पाए ।और छोटे चुनावो में भी खास प्रदशन नही कर पाये ।पर अन्ना और रामदेव तो अभी एक भी सफल आन्दोलन नही चला पाए ।जबकी भारत में केवल किसान ही अगर एक पार्टी को वोट  दे तो वो पार्टी आराम से सत्ता पा  सकती है ।पर ये भी कहा  हो सका ?आजतक । चोधरी चरण सिंह का जादू फिर कब चला ??पर सरकारी तौर पर समस्या केवल वो ही मानी जाती है | जिससे कमाई हो या वोट बैंक बड़े …… यह दोनों ही नही है फिर क्यों कोई सोचेंगा ?
4
महगाई की अब आदत हो गयी है लोगो को , जिस पर सरकार कुछ कर पायगी ? सबको इसका जबाब पता है की नही ! ।अब  ये मुद्दा भी नही है ।फिर चुनाव के टाइम तो पट्रोल / गैस/चीनी / आलू /तेल /सब्जी सबके दाम कम हो जायेंगे ।ये सब सरकार के अपने साधन है उनके एक इशारे पर  कभी भी कम जाएदा हो जाते है ।आयात - निर्यात में , अनाज के दामो के सट्टेबाजो ने जो कमाया है ।जमा किया है बहार  भी तो निकलना है और कमाने के लिये लगाना भी होता है  जी ।उनका भंडार सरकारी थोरे है जो खुले में सड़  जाये !
5.
 सारी छोटी पार्टिया को  सरकार  खरीद ही लेंगी ।नही तो C .B .I  तो है ही जिनके पास सबका हिसाब किताब है चुनाव लड़ाने में बहुत सहायक होती है । सब छोटे सरदार /कुवारियो/माता /बहेनजी /नेता जी  के मामले इनकी कोर्ट में रहेते ही है जब इशारा हो , नकेल लगा दी जाये !तो छोटे दल  बीजेपी को कभी समर्थन नही देंगे ।
6.
 तीसरा गठबंदन कुछ शोर जरुर करेंगा पर उसका हाल  भी बेमेल खिचड़ी बाला रहेंगा 4-6 महीने की सरकार बना सकते है पर प्रधानमत्री कोन होंगा ? मुलायम सिंह / ममता दीदी /करात /पवार /नीतीश /या कोई साउथ का हीरो /.हेरोएन / जयललिता /नायडू सहाब /अजित सिंह / माया मेम  सहाब  कभी भी .........अपना समर्थन किसी को भी दे सकते है .। नही तो गुजराल /देवगौड़ा /वी .पी सिंह /चंद्रशेखर समान वर्तमान नेता  लोगो को भी मोका मिल सकता है
7
 दुखी मत होना दोस्तों ! जब तक सब वोट डालने नही जायंगे तब तक कुछ भी नही होंगा इस देश का ..
8
अभी तो कोयेले  की खानों की पोल खुली है अभी सोना / हीरे / चांदी / कोपर /लोहा /ताबा / मइका / सीसा ............................... आदि हजारो तरह की खाने है । जिनका हिसाब बाकि है ।जिनकी डोल की पोल अभी नही खुली है क्या कभी खुलेंगी ?
9.
2 G तो क्या है ? पता नही कितने लाइसेंस होते है भारत में काला धन पैदा करने वाले ?उनके बारे में तो कैग या औडिट को भी नही पता होंगा ।
10.
 ससद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष जोशी  जी है पर बिलकुल निस्प्रभाबी दिख रहे है क्यों ? क्या अब कांग्रेस में जाने की सोच रहे है ?
11
.देश में काला धन कमाने वाले जाएदा है जो न कमाने वालो की आवाज़ को दवा  रहे है । उनकी ताकत बहुत  जाएदा है ।पर लड़ाई कमाने वालो की न कमा  पाने वालो से है ।

12.
चीनी का निर्यात  हो रहा है देश मै दाम 42/-k g हो गए है ।पता है क्यों ? क्यों की चीनी निर्यात\करने\में 10/-k g की सरकारी मदद मिलती है ताकि विदेश में दाम कम रहे ।और मुद्रा प्राप्त हो , दरअसल बहुत  बड़ा खेल होता है इसमे सारा आयत-निर्यात केवल कागजो में ही होता है अरबो रुपए कमाए जाते है .....अब आप सोचे की कितने प्रकार के आयत - निर्यात होते है ? सरकारी ठेकेदारों के ।ये खेल हर सरकार  ने खेले है ।
13
इतनी महगाई बडती है पर जमाखोरों पर कोई राज्ये की सरकार कर्येवाही नही करती क्यों ? मिलावट करके ही  तो अब सब को उपलब्द्ता हो प् रही है खाद्य सामग्री की ,नही तो उत्पादन ही  कहा  है ?इतना, लोग मरते हो तो मरने दो ..... किसी का क्या जा रहा है ।दवाईयो की कमी कहा  है ? अरबो रुपे का धन्दा है
14 .
देश में गरीबी काफी हद तक हटा दी गयी है । 32 /- में खाना खिला कर । पर सरकार ने मंरेगा योजना से टैक्स देने वाली जनता के पैसे से वोट  खरीद ली  है।उपर से नीचे  तक सब को खूब मिल रहा है पैसा । तो कांग्रेस को कोन जाने देंगा ? बीजेपी पर कोई भरोषा नही है ? कब आकर पेट पर लात मार  दे ?  मजदूर को बिना काम 100/- मिल जाये तो काम क्यों करे ?भले ही उनका सारा हिस्सा प्रधान जी ले जाये ! फिर D M सहाब तक जाना है ।अब किसान को मजदूर नही मिले तो क्या ? देश का निर्माण तो हो रहा है ।
इस मनरेगा में कितने लोगो के वोट जुड़े है सोचो ........कोन  वोट नही देंगा इनको?
15
बीजेपी को बहुमत मिलना ही मुस्किल है अगर एक दो दंगे हुए तो कुछ सीट बड  जाएँगी पर मोदी / सुषमा /जेटली /राजनाथ/गडकारी  सब प्रधानमंत्री है ।
लिखने को तो बहुत  कुछ है पर मुर्दे कभी जिन्दा नही होते .........फिर सब ठीक ही चल रहा है देश डूबता है तो डूबने दो .......और ये देश है भी कहा ?बस नाम  है ...








Friday, August 17, 2012

आसमान ..........

                                                   हर एक का एक अलग आसमान होता है ........
                                                                   युवा होती लडकियों के लिए आसमान गुलाब सा गुलाबी होता है ...
                                                                  जवान हो गयी औरतो को नोकरी में  आसमा दीखता है ।                                   अधेड़ो को बच्चो के आँखों से आसमा दीखता है ।                                                                                                          तो लडको को खून सा लाल -लाल  लगता है .....
                                             सरकारी नौकरी दिन के उजाले में कहा  दिखती है ?
                                             रात को सपने में द्रुव तारा सी लगती है ।

                                                गरीब के आसमान मे  सूखी  रोटिया लटकती है .
                                               तो अब भी आमिरो के आसमान से पैसा बरसता है !...
                                                         नेताजी को  पाव मे जनता, सर पर पार्टी, आसमान मे कुर्सी दीखती है !
                                                         बचपन से सीधे बुद्धे होते आदमियों को हर महा का target आसमा से ऊचा लगता   है ....
                        सबसे अच्छा आसमान तो बच्चो का होता है जहा अब भी चंदा मामा, चमकते तारे देखते है, ( किताबो मे ).........
" अमन कुमार"

Monday, August 13, 2012

हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

Monday, August 6, 2012

blog writing problem

आज कोई कहानी का मन नही है ।
                            आज तो एक मौत की बात करनी है आप से । भारत के सबसे जरुरी आन्दोलन की मौत हो गयी है । आज हमारे देश में  रोटी  कपडा और  माकान की
समस्या  है। शिक्षा , स्वाथ्य , बेरोजगारी , कृषि ,हवा ,पानी , बिजली ,अपराध , आतकवाद , ये तो बहुत दूर की कोड़ी है !
  राजनीती के चलते ये सब बहुत दूरहै हम  गरीबो से , क्या अब भी ? 66 साल के आज़ादी के बाद भी , समझ नही आता की लोकतंत्र भारत मे सफल नही हो पाया क्या दिया है ?अब किस बात का और इंतजार है ?अन्नाजी भी भटकहए है  अब कुछ गलती समझ गएहै की टीम अन्ना केवल सत्ता  सुख के लिए बनायीं गयी जिसमे अन्ना जी को प्रयोग  किया गया है अब क्या करे जनता अब कहा  जाये ? हर आदमी सत्ता की तरफ भाग रहा है , असली सकल सामने आ रही है .......

Thursday, August 2, 2012

रक्षाबंदन - उत्सव

Rakhi
RAKSHA SUTRA . LOVE OF SISTERS...

रक्षाबंदन एक ऐशा  उत्सव है जो हिन्दू धर्म की एक विशिष्ट  भावना को दिखाता है !शास्त्रों के अनुसार पहेली बार देवता इन्र्द को उनकी पत्नी ने रक्षा सूत्र बंधा था दानवो  से बचने के लिए । फिर माध्य काल में गुजरात की  रानी कर्णावती ने मुग़ल बादशा हुमायु को राखी बेजी और उसने भी उसकी लाज रखी ।ये धागा विस्वास और रक्षा का प्रतीक है ।रिश्ते ही तो है जो हमें सब कुछ देते है ये भाई -बहेन के बीच पवित्र रिस्ते को मजबूत करता है ! दूरिया कितनी भी हो पर  भावना तो रहेती ही है ।
यु तो हर रिश्ते का अपना महत्व होता है पर जब बहेन  बेटी की बात आती है तो सबका दिल भर जाता है ।
माँ के साथ  बहेन  ही तो होती है जो घर को संभालती है ,याद !!..........है जब हम छोटे थे ! हम सोती हुई बहेन  को बार बार परेशान  करने को बोलते की " बना ले " फिर थोरी देर में  हलके से हिला देते "  की बना ले ! वो कहेती मम्मी ............... देख लो !!इनको, अब चाए की तो मम्मी भी शोकिन है हमारी ...तो वो बस पेले पीले दंत दिखाती रहती। पर कहती कुछ नही थी  ! बैसे आमतोर पर चाय का नाम लेने की जरुरत नही पड़ती थी । बस चाये तैयार !और हर घर में इडली डोसा , छोले -भटूरे ,चाट, दाल मखनी ,चोव्मीन ,मेग्गी , हलवे, दाल बाटी-
पानी पूरी , आलू की टिक्की, बेसन के चीले , पिज्जा कोल्ड, कॉफ़ी , मांगो शेक , मिक्स -जूस ,पनीर टिक्का ,पनीर कबाब , ICE -CREME जैसी चीज़े बहेने ही बनती है । मम्मी तो बस खाना बनाने में ही निपुण होती है ।


पापा जी को  पहली बार उसकी शादी में ही आंसू भरे देखा था मैंने !  आज मै कही  भी हो पर गर्मियों की छुट्टियों में उसका इंतजार तो रहेता ही है उसके हाथ  का खाना 15 -20 साल पुरानी  यादे ताज़ा कर देती है ।एक बार लड़ाई  भी होती है में कभी माफ़ी   नही मांगता किसी से, पर उससे मांगने मे कभी शर्म नही आती !पिछली बार भी उसका   हमारे "भैया " को फ़ोन करने के कारन लड़ाई हुई ! उससे पिछली बार "मै " के कारण बहस हुई ।हमारी लड़ई को बच्चे नही समझ पाते  तो सब मुझ  से ही लड़ने लगते है । बच्चे , बीबी , मम्मी और पापा  सब उस तरफ थे मे अकेला टक्कर ले रहा था ! पर कहा तक ?  मेरी बकालत के सामने कोन  आता ?
फिर वो रोने लगी में ये  केस बिना सबूत हार  गया । माफियो - सॉरी का दोर  हुआ और  में बहा से निकल गया नही तो ..........सब मुझे जान से ही मर देते । शाम को बाहर पार्टी का जुरमाना मुझे देना पड़ा गोल मार्केट में!आज भी हम रोज़ बाते करते फ़ोन पर .....सच iहै बचपन   बापस नही आता 
बड़ी याद आती है वो लड़ाईया ! हैप्पी रक्षा बंदन बहेनो - भाईओ ..........................










Thursday, July 19, 2012

भईया ! - 1

भईया !
          यही तो नाम होता है घर में  । घर के बड़े पुत्र का , उत्तर प्रदेश मे। प्रकाश का भी है जो रघुबंश  जी के तीनो पुत्रो में सबसे बड़े है ।पर सबसे बड़े पुत्र होने के कारण , लाडले भी रहे  है अपने माता -पिता के ,
सच तो ये है परिवार भी देश की तरह तरक्की करते है धीरे - धीरे .. शुरुआत मे नोकरी भी छोटी होती है और खर्चे भी जायदा होते है धीरे धीरे ही तो घर मै  आराम की चीज़े आती है अगर पिताजी सरकारी नोकरी मे हो ।
पर रघु जी तो आदमी भी बड़े अलग टाइप के थे ।बिलकुल आम आदमी से हटकर , उनका सबकुछ अपने लिए होता था वेतन का चोथा हिस्सा भी अगर घर पर देना पड़े तो उनको  जाएदा लगता था । आच्छे  कपडे , सूट  सिगरेट रोज़ का खाना पीना क्या कमी थी उन्हें ?पर घर में tv 30 साल के बाद आया था । यारो के यार है ! उनके दोस्तों के दोस्त भी जब शहर में आते तो खाना ,रहना रघु जी के पास ही होता । चाहे घर किराये का हो या अपना ।
सबसे बड़ा शोंक था शराब का ।जिन्दगी क्या ?  परिवार क्या ? , नोकरी भी दाव पर लगा कर  पीते थे ।बड़े सरकारी पद पर आसीन  थे ।पर शुरुआत तो क्लर्क के पोस्ट से की थी उस समय भी राजनीति ओर उसके दलालों का साथ था अब भी है ! यु तो उनके पांच  बच्चे थे एक बड़ी लड़की  और बाकी सब लड़के थे सबसे बड़ी लड़की का विवहा   समय पर कर दिया था ।वो अपने घर पर खुश  थी ।उसमे पत्नी पुष्पा  देवी के विशेष  प्रयास था। नही तो रघु जी के शही अंदाज़ हर  रिश्ते में भी आड़े आ गए थे ।वो खाली हाथ के राजा है ।
परिवार के शुरुआत के संघर्ष के दिन तो दोनों बड़े बच्चो ने ही देखे और झेले थे ।बाद के पैदा हुए बालक तो ठीक - ठाक बड़े हुए थे ।पर मुख्य रूप से जिन्दगी की लड़ाई तो पुष्पा देवी ने लड़ी थी । उनको शाम को कभी पता नही होता था की आज  रघु जी घर आएंगे भी या नही ? आयेंगे तो रिक्शा में  बैठकर या लेट कर ? कितने बजे ? कितने लोगो का खाना बनाना होंगा अगीठी पर , कितना शोर होंगा ? कितनी गालिया मिलेंगी ? पूरी पूरी रात तीन लोग जागते थे पर भैया को कभी फ़िक्र न हुई अपने पापा की,या बड़े होने के कारण शर्म आती होंगी  ! किस्मत की खास मार ये थी की पुष्पाजी अपने माँ-वाप की अकेली संतान होने के कारण बड़े ही लाड - नाज़ में बड़ी हुई थी ।जिसके शादी भी 15-16 साल की उम्र में ही कर दी गयी थी 45 साल पहले
 ये बात तो 30 - 35 साल पुरानी  है ,पर मोबाइल तो रघु  जी पर आज भी नही है ।मोबाइल के अपने घाटे है जो रघुजी गिनकर बताते थे ।और अब  मोका मिलने पर पुष्पा  जी के फ़ोन से अपने दोस्तों से बतियाते  रहते थे ।
बड़ी मुश्किलो में बच्चे पद रहे थे बैसे तो रघु जी को ये भी नही पता था की कोन  सा बच्चा किस स्कूल में है पर परीक्षा के दिनों मे पता नही कैसे उन्हें पता चल जाता था और खूब रात को अपनी सुरा लीला  दिखाते जरुर थे वो भी पूरे जोर शोर से ।रात को 2 बजे नाटक देख कर सुबह कैसा exam होता होंगा?

इ न सब जीवन के चक्रों से होकर बच्चे बड़े हो रहे थे ।पर उनके मम्मी ने मनो कसम खा रखी थी। उन्हें सफल करने की ! सब कुछ दाव पर लगा रखा था ।बच्चो पर अनुशासन का डंडा मजबूती से चलता था ।इसी के कारण  सभी बच्चे अपने साधनों के अनुसार पदाई राजकीय बिद्यालय में  कर रहे थे ।कई बार लोगो ने उन्हें अपने लडको को बेतहाशा मारते  देखा । डाँडो से / थपकी से जो मिल जाये सब कुछ मा नो दौरा पड़  गया हो !
दमा भी था उन्हें रात - रात भर खास्ती रहती थी । सो नही पाती ... बच्चे भी जगे रहते !पर उनके पापा जी को होश नही होता था !  इन सबके बीच प्रकाश अड़ियल स्वाभाव के कारण कुछ बिगड़ गया था कई बार स्कूल और मोहल्लो के अवंझित जगहों से पुष्पा  जी बेतहाशा मारती हुई घर लाई थी ।कभी स्कूल गोल तो कभी कंचे का खेल !  पिटाई के कारण  प्रकाश में विद्रोही स्वाभाव के भाव आ गए थे । पीटने पर भी नही मानता ।सब को अपना दुश्मन मानने लगा था ।घर खर्च के लिए , मकान  के किराये के लिए पुष्पा  जी ने स्वेटर सिलने का काम भी बहुत छिपा कर किया ।जिसमे सब बच्चो ने सहयोग किया । 

बड़े होने के सारे फाएदे उड़ाते थे भैया जी !छोटे भाई अगर मैथ मई प्रशन नम्बर 5 पूछते तो फेले चार बताने होते थे ।पहला पूछते तो पहाड़े सुनाने पड़ते थे वो भी खास तोर पर 17 और 19 का पहाडा , तो कभी कटवा पहाड़े !क्युकी अपने रागु जी छोटे भाइयो के  टुसन के भी बिरोधी थे ।
के उनके डर  से ही दोनों छोटे भाइयो ने अपने विषय हो परिवर्तित कर डाले   थे  मैथ तुरंत छोड़ दिया और जीव विज्ञानं पकड़ लिया मूर्खो ने ।  पर प्रकाश जी तो पूरे महोल्ले के बड़े भाई थे।क्योकि उस समय हर जगह लडको के  दो या तीन  समूह होते थे।अब तो एक भी समूह नही होता इन्टरनेट पर ही बाते कर लेते है लड़के ! वो आयु और रिस्तो के अनुसार ,बड़े भाइयो का अलग दल होता था जो अपने को मालिक और छोटो को नौकर मानता था ।और बड़े दल में  सभी के बड़े भाई थे ।तो  हर परीक्षा के बाद बापस लोटते लडको को वो गली के बहार ही खड़े मिलते ! बही  पूरा पेपर पूछते  जलील करते , जो गलत होता तो अच्छा  था, सही सवाल होता हो वो घर बुलाकर उसे करवा कर देखते थे । जिन्दगी नरक हो गयी थी !सारा मूड का गोबर बना देते थे ।  युवा होते लडको का । लगता था मर ही जाये ।कोन  से भाई का रिजल्ट कब आरहा है ? स्कूल में  कब टेस्ट है ? ...क्या टाइम है?... कहा घूम रहे थे ?.... आने मे  इतनी देर क्यों हुई ..? ....बाल  क्यों बड़े है.... ? "चल दिए .......तैल फुलेल लगा कर ?ये उनका रोज़ का कथन था । अच्छे कपडे पहनना मुस्किल हो गया था ।पर भगवन के मार देखो ... खुद 12बी कक्षा में  फ़ैल हो गए तब थोरा प्रकोप कम हुआ ।
                        हिसाब में इतने पक्के थे, की रन आउट कभी हुए नही।क्लीन बोल्ड और कैच आउट में भी कुछ कमी निकाल  ही देते थे  और अगर गेंद में  1 रुपए की हिस्सेदारी भी की तो आउट होने पर 1 रुपए  की गेंद ही काट डाली लो सा ....... अब खेल लो !!बाहर चोरहा पर  खड़े लडको को पकड़ के बोलते अबे तुम बदमाश ओ गए हो क्या ? आओ मुझसे लड़ो !और कुश्ती  करने लगते सबसे तकड़े लड़के से  ।पर बड़ा भाई के दोस्त होने का फायेदा तो प्रकाश जी लेते ही थे हर बार तो जीत जाते ।ये बात कभी सामने न आई की 10थ तक वो बिस्टर पर ही पिशाब  करते थे ।जिन्दगी युही चलती रही ..

भैया
पर बहुत सारी  अच्छाई भी है प्रकाश भाई मै , घर के सारा समान लाना , छोटो को एक ही साएकिल पर स्कूल  छोड़ के आना हर मशीन को ठीक करना । सारी रिश्तेदारी निभाना । बाबाजी दादी जी ताऊ जी ताई जी सब को सँभालते थे ।सबसे बाते करते ।छोटे बाले भाई  तो रिश्तेदारों को देख केर छिप जाते थे ।किसी को जरा से चोट लगने पर अंशु उनकी आँखों में होते ।बहार किसी  की मजाल नही थी की घर के तरफ देख भी ले । गुस्सा तो उनकी नाक पर रहता था ।लड़ाई तो अंडर वर्ल्ड डोन से भी कर सकते थे।और कर भी चुके थे  

                    .अब और भी बिद्रोही हो गए थे अपने आप ही बिना किसे बात के ।अब पुष्प जी के त्याग मेहनत रंग आई और प्रकाश जी I  T  I  में  चयनित हो गए .. घर में दो ही लोग गरम खाना खाते थे  जिनके आने पर स्टोव जलता था प्रकाश जी और खुद रघु जी । बाकि सब परिजन  दलित समाज की तरह थे । कैसा भी खाना खा लेते थे ... सबसे जादा लड़ाई होती अपनी बड़ी बहन से , उसको कुंडल, नए सूट,  बालो के क्लि,प फैशन के सभी साधनो  को सक्त  मनाही  थी भैया जी तरफ से, कई बार खुद पीछा करके देखते थे ....दसियों बार पीटाई  भी कर  चुके थे बड़ी बहन की ! बहन कितनी भी बड़ी हो पिटाई खाती ही है भाई से , लड़ाई हो जाने पर !.सारी दुनिया में !..


पुष्पा  जी को देखो ! अगर वो 15 मिनट भी लेट हो जाये तो घर से बहार रोड पर खड़ी हो जाती थी  ।मोबाईल तो थे नही पर छोटे भाइयो को उसके दोस्तों के घर भेजकर पुछवाती  की प्रकाश के दोस्त कही  घर पर लेट आने को तो नही बोल गए  । बड़ी अजीब बात थी .. पर छोटे भाई विशाल ने रोज़ ही अपनी मम्मी को जूठ बोल देने की आदत ही बना ली , की हां ! आज लेट होंगे ,फिर रोज़- रोज़ परेशान होकर मना ही कर दिया पूछने जाने को ।अब ये जिम्मेदारी सबसे छोटे अमर की थी । जो पहेले तो  एक धंटा , घर से  इधर -उधर  रहता की भाई अपने आप आजाये तो पूछना न पड़े ।भाई के आने पर ही चाय और खाना बनता था गर्म गर्म  ।घर में पैसे हो या नही पर  भैया जी को कभी न नही हुई  टुसन को ।और अब अखवार के कागज से लिफाफे भी बनाये जाने लगे जिसे भैया जी कुछ जुट सच बोल कर आस-पास के दुकानदारो को बेच कर आते बनाने में  भी सबसे जाएदा मेहनत  करते  ।ओर पर पता नही क्यों ? पुष्प जी के साथ भी जाएदा नही बनी ?? शायद  पचपन की जरुरी पिटाई उसके दिल पर लिखी रही ।दिमाग तक नही पहुची ।या कभी सोचा ही नही .
फिर अचानक एक दिन उस की नोकरी लग गयी । सेना के तकनीकी कोर में , घर से मानो काले बादल छटने लगे थे । अब वो राजे हो गए खूब पैसे भेजते रहे रघु  जी भी अब कुछ शांत होते जा रहे थे ।  जब घर में दो कमाने लगते है तो पद सोपान बदलते ही रहते है। कैंटीन से अच्छा ब्रांड सस्ता मिल जाता था ।जब वो आता दिल खोल कर  सब .....पर आज भी जब वो जाता है , आंसू आँखों में छुपाने के लिए कैंटीन से ख़रीदा रे -बेन  का चश्मा  लगा लेता है , पर रुमाल से आँखे पूछनी ही पड़ता  है जो पोल खोल देता है ।
 उसके आदेश मानो सबसे जरुरी हो गए थे ।उसकी बातो पर जान देने को मन करता !मानो घर को रघु जी का छोटा पैक मिल गया था । 
इधर रघु जी भी सेवा निवर्त हो गए थे उससे पहेले भैया जी के शादी अच्छे बड़े घर में कर दी बहू भी सेवा करने बाली  थी ।पर........ 
 बाकि कल ....................