भारत बनाम इंडिया ....
हमारे संविधान में अनुछेद 1 मे ही कहा गया है इण्डिया दैट इज भारत . संवैधानिक रूप से हमारे देश के दो नाम है जिसका औचित्य समज से परे है भारत की सरकार आज तक भी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया लिखती हैं । शाइनिंग इंडिया का नारा भी 9-10 साल पहेले बीजेपी को डूबा गया था ।पर अब तक इंडिया चमका ही नही अब आरएसएस प्रमुख मोहन भगबत का कहना है की बलात्कार भारत मे कम इंडिया मे जाएदा होते है । जबकि इस कुकृत्य का इंडिया या भारत से कोई मतलब नही है पर इस मुद्दे को बहस के लिए जंक्सन फोरम ने सही चुना है । हर समाज की तरह भारत भी अनेक प्रकार के वर्गों मे बटा है । एक तो जहा इतना पैसा है की रोटी खाने की भूख नही है तो दूसरी तरफ भूख ही भूक है पर रोटी नही है ।बीच मै वो लोग है जिनपर रोटी है भूक है और कुछ नही है ।विकास का बहुत असंतुलन है यहा कार्लमार्क्स बाला वर्ग संघर्ष भी नही है तो पश्चिम का खुला भोतिकबाद अभी तक जड़े नही जमा पाया है अधीसख्यक जनता सामाजिक रूप से सक्रमण काल मे चल रही है ।जो पेदुलम की गति कर रहा है ।दैनिक जागरण मई छपी भारत सरकार की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 वर्षो मे किशोरों के दुआर किये गए दुष्कर्म के मामले 4 गुना बढ गए है । और तथाकथित भारत मे इंडिया से दोगुना नारी अपराध होता है पर सोचने का विषय यह है की भारत मे नारी विरुद्ध होने बाले अपराध अशिक्षा जातिगत आधार पर , आथिक एवं सामाजिक विसमता के कारण और विधि के असमानता के कारण है ।भले ही डैय्सी के विधि के शासन के तत्व भारत के सबिधान में अनुछेद 14 मे रखे गए हो पर वास्तव मे ऐसा हुआ कहा है सब के लिए कानून अलग होता है ?
सबसे पहले पुलिस – प्रसाशन को पूरा बदलना होंगा |अपराध की जिम्मेदारी तय करनी होंगी | अगर पुलिस चाहे तो कोई अपराध न हो साथ ही पुलिस बल मे भी दुगनी ब्रद्धि हो | पुलिस और अन्य बलो मे महिलायों की सख्या बड़े और अंग्रजी ज़माने के चली आ रही पुलिस ट्रानिंग मे बड़ा बदलाव हो |नवीनतम तकनीको का प्रयोग अपराध रोकने मे किया जाये | मनोविज्ञान, मानवाधिकार ,नैतिक सिक्षा , मानविकी जैसे विषय भी हो | सबकी ट्रेनिंग एक ही बार नही हर ५ वर्ष मे हो ! और जो लोग इन विषयो की परीक्षा पास करे , वो ही तरक्की पाए |पुलिस को मानसिक रूप से भी ट्रेंड किया जाये |महिला थाना पद्दति बढाई जाये |
२ . देह का बिकना-खरीदना बिलकुल बंद हो !समाज भारतीय तरीके पर चले |अश्लीलता के सारे साधन इन्टरनेट / फिल्मे / पुस्तके /mms /खेलोने ख़त्म किये जाये |सख्त क़ानूनी कर्येवाही की जाये , कड़ी सजा हो |
३ और अधिक फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट बनाये जाये | फेसला तुरंत हो | इसकी भी समय सीमा बने |महिला जज ही महिलाओ के मामलो को सुने |
४ असंगथित रोजगारी पर नियंत्रण हो |यातायात के साधनों , सवेर्जनिक स्थानों ,अन्य सभी स्थानों की निगरानी करी जाये | बेरोजगारी को कम किया जाये | समाज का निर्माण नये सिरे से , क्रांति की तरह तुरंत किया जाये |
5 . ओनर किलिंग पर तुरंत कार्यवाही हो |“Justice delayed is justice denied.” जातियों पर आधरित राजनीती बंद हो |सरंक्षण और सजा दोनों को लागु किया जाये |
कानून होना ही जरुरी नही | दिखना भी चहिये |
६ . आथिक रूप से समाज के हर वर्ग को सबल बनाना होंगा |
७ .देश के अस्पतालों मे महिला अपराध से पीडिता
को सरकारी मद्त मिले | इलाज़ मुफ्त हो |सरकारी सहायता मिले |
८.बालिका सिक्षा मुफ्त तो है पर अनिवार्य करके, उसे प्राप्त करने की हर प्रकार की सुविधा भी परदान करनी होंगी ताकि दूर -इलाकों की बालिकाए भी सुरक्षित रह कर सिक्षा प्राप्त कर सके |और सिक्षा का हथियार प्राप्त करे |
९ युवाओ को यौन सिक्षा दी जाये |स्कूलों मे योग /धयान /कसरत / खेल एवं अन्य गतिबिधिया बड़ाई जाये |
१०. सिक्षा मे अमूल-चुल परिवतन करके नैतिक सिक्षा / सामाजिक विषय अनिवार्य हो |केर्रियर निर्माण की और सभी वर्गों के युवाओ को अग्रसर किया जाये |बेरोजगारी ख़तम हो / क्युकी खाली दिमाग ही अपराध को जन्म देते है |
११. भारतीय दंड सहिता १९६० मे सेक्सन २९९- ३०२ , ३७५ – ३७७और 511 मे परिवतन करना होंगा | नारी के सरीर से सम्बंदित सभी अपराध कठोर कानून मे आये जाये |
१२ किशोर अपराध कानून की समीक्षा हो |
१३ अगर दुष्कर्म के साथ ही हत्या / या शिशु – बालिकाओ के साथ गलत हरकत हो तो इसे अलग कानून से निपटा जाये |
१४ कई बार दुश्मनी /दबाब के कारन भी महिलायों से फ़साने बाली रिपोर्ट्स लिखबा दे जाती है | गलत रिपोर्ट्स पर जिम्मेदार लोगो पर भी कार्येव्हायी हो |
१५ हर प्रकार की नोकरी – काम सुरक्षा
बल / निजी कंपनियों मे महिलाओ की हिस्से दारी हर स्तर पर बढ़ानी होंगी |
१६ आधार UIDAI जैसे योजना तुरंत पूर्ण हो ताकि देश के सभी नागरिको का डाटा बेस बने और कही भी अपराधी बच न पाए |
१७.मोबिल के प्रचलन का प्रयोग सुरक्षा हेतु किया जा सकता है | आपात पालिक no , या जीपीएस तकनिकी के प्रयोग से अपराध से सुरक्षा हो सकती है |
२ . देह का बिकना-खरीदना बिलकुल बंद हो !समाज भारतीय तरीके पर चले |अश्लीलता के सारे साधन इन्टरनेट / फिल्मे / पुस्तके /mms /खेलोने ख़त्म किये जाये |सख्त क़ानूनी कर्येवाही की जाये , कड़ी सजा हो |
३ और अधिक फ़ास्ट ट्रेक कोर्ट बनाये जाये | फेसला तुरंत हो | इसकी भी समय सीमा बने |महिला जज ही महिलाओ के मामलो को सुने |
४ असंगथित रोजगारी पर नियंत्रण हो |यातायात के साधनों , सवेर्जनिक स्थानों ,अन्य सभी स्थानों की निगरानी करी जाये | बेरोजगारी को कम किया जाये | समाज का निर्माण नये सिरे से , क्रांति की तरह तुरंत किया जाये |
5 . ओनर किलिंग पर तुरंत कार्यवाही हो |“Justice delayed is justice denied.” जातियों पर आधरित राजनीती बंद हो |सरंक्षण और सजा दोनों को लागु किया जाये |
कानून होना ही जरुरी नही | दिखना भी चहिये |
६ . आथिक रूप से समाज के हर वर्ग को सबल बनाना होंगा |
७ .देश के अस्पतालों मे महिला अपराध से पीडिता
को सरकारी मद्त मिले | इलाज़ मुफ्त हो |सरकारी सहायता मिले |
८.बालिका सिक्षा मुफ्त तो है पर अनिवार्य करके, उसे प्राप्त करने की हर प्रकार की सुविधा भी परदान करनी होंगी ताकि दूर -इलाकों की बालिकाए भी सुरक्षित रह कर सिक्षा प्राप्त कर सके |और सिक्षा का हथियार प्राप्त करे |
९ युवाओ को यौन सिक्षा दी जाये |स्कूलों मे योग /धयान /कसरत / खेल एवं अन्य गतिबिधिया बड़ाई जाये |
१०. सिक्षा मे अमूल-चुल परिवतन करके नैतिक सिक्षा / सामाजिक विषय अनिवार्य हो |केर्रियर निर्माण की और सभी वर्गों के युवाओ को अग्रसर किया जाये |बेरोजगारी ख़तम हो / क्युकी खाली दिमाग ही अपराध को जन्म देते है |
११. भारतीय दंड सहिता १९६० मे सेक्सन २९९- ३०२ , ३७५ – ३७७और 511 मे परिवतन करना होंगा | नारी के सरीर से सम्बंदित सभी अपराध कठोर कानून मे आये जाये |
१२ किशोर अपराध कानून की समीक्षा हो |
१३ अगर दुष्कर्म के साथ ही हत्या / या शिशु – बालिकाओ के साथ गलत हरकत हो तो इसे अलग कानून से निपटा जाये |
१४ कई बार दुश्मनी /दबाब के कारन भी महिलायों से फ़साने बाली रिपोर्ट्स लिखबा दे जाती है | गलत रिपोर्ट्स पर जिम्मेदार लोगो पर भी कार्येव्हायी हो |
१५ हर प्रकार की नोकरी – काम सुरक्षा
बल / निजी कंपनियों मे महिलाओ की हिस्से दारी हर स्तर पर बढ़ानी होंगी |
१६ आधार UIDAI जैसे योजना तुरंत पूर्ण हो ताकि देश के सभी नागरिको का डाटा बेस बने और कही भी अपराधी बच न पाए |
१७.मोबिल के प्रचलन का प्रयोग सुरक्षा हेतु किया जा सकता है | आपात पालिक no , या जीपीएस तकनिकी के प्रयोग से अपराध से सुरक्षा हो सकती है |
तो ये प्रश्न उठाने का क्या औचित्य शेष रह
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