यह सच है की अब नई उम्र के लड़के बड़े अपराध कर रहे है । इसके क़ानूनी ही नही सामाजिक पहेलु भी देखना होंगा ।समाज ,मानवता सिखाने मे नाकाम शिक्षा ,ऐश गहा बने स्कूल - कॉलेज का महोल ,एकाकी परिवार और पश्चिम से आई खुली हवा ने देश का सारा सामाजिक ढाचा बिगड़ दिया है ।अपराध करना अब रोमांच का विषय बन गया है ।इसमे परिवार और समाज के साथ ही सरकार का भी दोष है ।शिक्षा और करियर निर्माण मे व्यस्त रहेने के साधन बहुत कम है ।परिवार एकाकी है , इन्टनेट ने सब प्रकार की शिक्षा घर बेठे प्रदान की है माता पिता पर समय नही है बच्चो के लिए । जरुरत है समाजिक परिवर्तन की न की कानून बदलने हा अपराधी को कठोर सजा जरुर दी जाये ।
अमन कुमार
मेरठ
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