Wednesday, August 21, 2013

यादे ...........

मेरी दीदी  नीरू .........
बहेने तो छोटी माँ के समान होती है , माँ के काम मे हाथ बटाना रसोई और पढाई दोनों को संभल लेना , माँ को कहा ? कभी छोले - भटूरे , इडली -डोसा ,आलू छोले की चाट , लिट्टी - चोखा , केक , शाही - पनीर ,नमकीन के परांठे , रस्गूले , तमाम गुजराती पंजाबी भोजन बनाने मे रूचि थी ? वो तो  ही दीदी थी जो हमे ये सब कभी भी खाने को मिल जाता था |
दुपहर की चाये बस हम दोनों भाई इतना बोलते थे की " बना ले " और वो बना कर ले आती , कभी कभी समस्या होती जब वो सो रही होती .........हम बाल खीच कर परेशान करते बना ले , 
बस वो जोर से बोलती मम्मी .....!...........!..................
मम्मी डंडा लेकर हमारे पीछे , पर चाय बन जाती थी|
घर के समान का नक्शा हर सप्ताह बदलना उसकी आदत थी सब बहेने की होती है 
था | घर की आंतरिक सज्जा मे अपना कौशल दिखाने की |
शादी के बाद अपना बुटिक भी खोला , अच्छा चल निकला उनकी  सरल आदत के कारण , पर बच्चो के चलते बंद भी कर दिया |बिना मुनाफा सोचे !
पा - माँ ने सदा दीदी को जाएदा प्यार किया हम तीनो भाइयो से ,\सबसे बड़ी जो है हमसे .....
आज तो खुल कर बोलते भी है ये बात !
आज भी पा-माँ कही भी हो रोज़ ३० मिनिट बात फ़ोन पर दीदी से ही होती है बाकि हम लोग खुद उनसे बात करते है ,,,,,
याद आता है! उनकी शादी मे टेंट लगाने के लिए पड़ोसियों से हुए जगड़े मे , 
मर -पीट के दौरान ,जब  अचानक दीदी भागती आई और एक लम्बा डंडा पूरी ताकत से  उनके सर पर दे मारा ..........
हम लड़ाई भूल कर हसने लगे ! 
हर रक्षा बंदन पर भैया से उनका किसी न किसी बात झगड़ा होता और हम मनाते थे दोनों को , आज तक यही होता है |भोपाल शादी को उनके १६- १७ साल हो गए है |
पर जब वो भोपाल से नही आ पाती तो फ़ोन के बाद फौजी अफसर भाई सहित सबकी आँखे गीली होती देखी है मैंने !
अब तो लगता है हम सब के बीच का बन्धन है वो .......परिवार का फेविकोल का जोड़ !.......
पता नही , मम्मी ने बताया या अपने आप ,अपने परिवार को उन्होंने जोड़ा है सुसराल मे बड़ी भू के रूप मे इज्जत कमाई ,नही तो हमारे पापा जी का दबंग स्वभाव भोपाल शहर तक , हर  रिश्तेदार को मालूम था |
सदा आगे .रही है वो लोगो के साथ मे ................ 
प्यार मे , एस बार भी अकेली बच्चो के साथ भोपाल से रूडकी आ गयी . अपनी लक्ष्मी बाई ! 
दोनों भाइयो की शादी का काम , हो या किसी का कोई दुःख सब जगह ,,,,होती थी वो !भाइयो की ख़ुशी के लिए ज़माने से लड़ी और जीती , दोनों के प्रेम विवहा का एक मात्र सहारा वो ही तो थी ......
भाइयो के लिए पेडुलम बनी रहेती पा - माँ और हमारे बीच , 
आज भी इतनी उष्मा भरा रिश्ता है की अपने को भूल कर जीती है वो हमारे लिए ....
जब भी भोपाल जायो पेट मे और दिल मे स्थान नही रहेता | किसी और के लिए ......
आज भी जब पा- माँ से कुछ कहेना हो तो ...... माध्यम दीदी ही है .......उनको वो कभी नही कुछ कहेते !उनकी मान भी लेते है ............. अब की बार राखी , तिलक सब आया है पोस्ट से ....
दिल भर आता है |उसकी याद मे .......
रक्षा बन्धन की ढेरो मुबारक बाद .......

Monday, August 19, 2013

रिक्शा वाला .....

कल तक, तो सुबह   ही खटर - पटर ,ची . चु  की आवाज़ सुनकर ही पता चल जाता  था कि बच्चो को लेने रिक्शाबाला  आ गया है | उम्र 50 से एक -आध साल ही उपर होंगी , पर गरीब जल्दी  बढता है , और जल्दी ही मरता है  इसलिए लगता 70 साल का था  | नाम कभी पता नही किया मैंने , होंगा कोई राजा राम  या बादशाह खान क्या फर्क पड़ता है नाम से ?
 दाढ़ी भी  पता नही किस दिन बनाता था ? जब भी देखा  ,उतनी की उतनी , सफ़ेद काली , मिक्स वेज जैसी , न कम न ज्यादा ! पोशाक बिलकुल , भारतीय पजामा कुर्ता ,कभी चेक का हरा - नीला तहमद  ,जिससे उसके धर्म का पता चलता था , पर गरीब का धर्म नही , पेट होता है , क्या पता ? किसी बड़े सहाब ने खुस होकर दिलवाया हो या सस्ता पड़ता हो, इस महगाई मे तहमद से तन को ढकना ,या मनरेगा योजना के जॉब कार्ड को अपने पास  जमा करने के बाद ,प्रधान जी ने इनाम मे दिया हो |

कभी कभी चढ़ाई पर बच्चो को नीचे उतर कर रिक्शा मे  धक्का मारते हुए देखा था मैंने | जिससे पता चलता था की सरकार की किसी योजना से उसे भरपेट खाना न मिला ,  फिर शरीर मे ताकत कहा  होती ? कभी कभी बारिश तेज़ होने पर वो नही आता था ," बच्चे स्कूल नही जा पाए" इसलिए पैसे काट लिए जाते उसके , भले ही उस दिन स्कूल बंद हो जाता हो रैनी डे के नाम पर |

उस दिन अचानक उसकी मुर्गे के बांग जैसी रिक्शा की आवाज़ नही आई , बल्कि हलके  से सु - सु जैसी आवाज़आई मानो बिल्ली दवे पाव घर मे घुस  रही हो हडबडाहट मे अजीब से आवाज  सुनकर मे उठा , और बहार आकर देखा की एक नया प्रकार का रिक्शा खड़ा था , लाल रेक्सीन की छत बेठने की 8 लोगो की  सुंदर मजबूत सीट और आगे मोटरसायकिल जेसा हेंडिल , और मुस्कराता साफ सुथरा  नोजवान  चालक ,मानो हो रहा भारत निर्माण !
पूछने पर पता चला की दिल्ली मे १ लाख मे मिलता है और बेटरी से चलता है |बस रात मे चार्ज करो दिन मे पैसा कमायो |
अमर सिंह जी से पूछना ही पड़ा " पुराने को क्यों हटा दिया "
"भाई सहाब कई बार दारू पीकर रिक्शा चलाता था जी "
 "खुद मैंने पकड़ा उसको "
"छुट्टिया इतनी करता था की बस " ..गहरी साँस ली
भाभी जी भी  चुप न रही ,बोल ही  गयी " कई बार लेट कर दिया बच्चो को "
 "अजी चढ़ाई पर बच्चो से धक्के लगवाता था |"
 " पैसे भी जाएदा थे ६०० ले रहा था ये ५०० मे है "
अब मेरी बारी थी बोलने की " जब इतनी कमिया थी तो ४ सालो से क्यों नही बदल  दिया उसको "?
उनकी चुप्पी ने सब बोल दिया |मे बापस आ गया ||सोच रहा था की टी बी की सरकारी  दवाई पीने बाला गरीब , दारू कहा से पियेंगा ? महेनत कश लोगो के लिए अब क्या बचा ?
मै चुप रह कर भारत निर्माण देख रहा था |
मौलिक एवं अप्रकाशित 

Friday, August 16, 2013

भारत निर्माण की राह... नारी शिक्षा !

शिक्षा हर देश , समाज , परिवार के लिए आवश्यक तत्व है किन्तु भारत के लिए ये अनेको समस्याओ का हल भी है |
शिक्षा ही मानव को मनुष्य बनती है और साक्षरता तो शिक्षित  नही मान सकते |मनुष्य की चेतना का निर्माण शिक्षा से ही होता है सबसे जरुरी है नारी शिक्षा क्युकी भारत मे नारी शिक्षा दर वास्तव मे काम ही है क्युकी जरुरत है उच्च शिक्षा की और यहा माध्मिक शिक्षा को ही शिक्षा का पैमाना मन जाता है |

अगर परिबार की महिला उच्च शिक्षित हो तो उसका प्रभाव सर्वप्रथम परिवार की नई पीढियों पर तदुपरांत समाज औरआस - पास के  इलाके पर क्रन्तिकारी रूप से पड़ता  है | एक नारी को दी शिक्षा  सामाजिक विकास एवं परिवर्तन के नये  रास्ते खोलते है |क्युकी उसका प्रभाव उसके बालको पर पड़ता है उनकी शिक्षा देना सरल हो जाता है |

भारत की वर्तमान मुख्या समस्या है एकता और अखंडता पर मडराता खतरा और दिल्ली से दूर राज्यों मे अलगावबाद की फैलती विचारधारा बास्तव मे  असिक्षित या  अल्प शिक्षित को ही जूठे नारों और उद्देश्यों से सरलता पूर्वक   बहलाया जा सकता है |और बहलाया जाता है | जबकि  शिक्षित युवा क्रांति नही , अपना भविष्य देखता है अपना और परिवार का विकास करना उसका उद्देश्य बन जाता है |
कश्मीर  घाटी, नक्सल प्रभावित भूमि और उत्तर पूर्व राज्यों  पर बनी बिकास एवं कल्याण  योजनाओ पर अरबो रुपए पानी की तरह बहाने के बाद भी एन इलाकों  मे  उतना प्रभाव नही पड़ा जितना होना चाहिये था | अगर बहा के युवा समाज को रोजगार और शिक्षा के लिए भारत के अन्य भागो  मे विशेष सुबिधा एवं प्रोत्सहान  दीया  जाये तो सांस्क्रतिक मिलन , रोजगार के सामान अबसर , निवास की सुविधा दी जाये एवं  परस्पर अविश्वास का खात्मा करके उन्हें आगे बदने का मोका दिया जाये तो उन्हें  मुख्य धारा और धरा से जोड़ा जा सकता है |और भारत को अखंड रखा जा सकता है  |
 समस्या  प्रभावित इलाकों के साथ ही सम्पूर्ण देश  मे  टोटके के रूप मे बालिकायो की   उच्च  शिक्षा सुविधा के लिए सरकार को तुरंत प्रभावी  योजनाये बनानी चाहिये |एवं सांस्क्रतिक प्रवास पर बल भी  देना आवश्यक है | ताकि सबको ,  सब जगह अपना देश लगे |
शिक्षा मे जरुरी है एक समान पाठ्यक्रम एक देश एक सी शिक्षा होना आवश्यक है |साथ ही उच्च शिक्षा को निजी करण से दूर किया जाये क्युकी अब ये एक व्यापार बन गया है गुणबत्ता काम हो गयी है ! गरीबो से दूर हो गयी है |और प्रतिभाशाली छात्र अब भी बंचित ही  है |
विषय विस्तृत होने के कारन मंच के प्रबुद्ध सहयोगियों से  चर्चा की अपेक्षा है .........

Thursday, August 8, 2013

जज्बात !

मै अपनी तक़दीर पर कभी , रोया या नही रोया 
पर मेरे जज्बातों पर आसमा टूट के रोया |
मै क्या क्या बताऊ मे क्या क्या गिनाऊ ,
क्या नही पाया मैंने क्या नही खोया |
मेरी हर रात कटी है सो वीमारो के जैसे 
दर्द से जुदा होकर मै एक पल नही सोया |
मेरे जीने पे  जो जालिम , मातम मनाता रहा ,
मेरे मरने  पर वो जी भर के क्यों रोया |
मेरे दिल के जख्म फूलो से निखरते रहे   
मैंने कभी इनको मरहम से नही  धोया |
बडो की ये बड़ी बाते ,हमे देती रही है ये  नसीहत
अब काटो  बही जो  बीज वो तुमने था जो बोया |

Monday, August 5, 2013

भारतीय राजनीति के मिल्खा सिंह मोदी

आज निर्विवाद रूप से , मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता  तो है | जिनमे देश के प्रधानमंत्री बनने के अनेको गुण है किन्तु समस्त अव्यस्यक गुण अभी तक उनमे नही आ पाए है |एक तरफ तो उनकी बिखरी हुई  बीजेपी पार्टी है ,जिसे आजकल राजनीतिक रूप से अछूत दिखाया जाता है ,और  जिस कारण उसके साथ समान विचारधारा बाले कुछ दल ही है और संसद मे बहुमत के लिए गड्बंधन की बिना कोई  भी सरकार  बननी नही  है | उनको एस दल से  प्रधान मंत्री बनने के लिए , अटल बिहारी बाजपेई जी जैसी सर्वस्वकरती , नेतर्त्व के गुण , भाषण की वो कला जिस को  विपक्षी भी सुनना चाहे , और सबको साथ लेकर आगे चलने की स्पस्ट दिखती  सोच दिखानी होंगी  |और दूसरी तरफ आपस में उलझे उनके दल के नेता, सत्ता को  करीब पाकर कही उस टिड्डे की तरह न हो जाये जो भूख लगने पर अपने परो को  ही खाने लगता है |कई बार होता है की आदमी का गुण ही उसके लिए अवगुण बन जाता है |उत्पत्ति के कारण ही विनाश हो जाता है अब देखना यह है की मोदी एन सब समस्याओ पर कितनी जल्दी विजय प्राप्त करते है नही तो सत्ता की गाँधी नगर से दिल्ली ये बाधा  दोड़ जिसमे बाधा ही बाधा है , जीतना तो दूर पूर्ण करना ही मुस्किल होंगा  |और देश को इसका खामियाजा भुगतना होंगा 
अमन अन्गिरिशी