भारत के आम नागरिक इतिहासिक रूप से गरीब रहे है |इसलिए आज भी आजीविका के रूप मे मिली सरकारी नोकरी हो या कोई अन्य सावर्जनिक पद , वे उस को हर प्रकार से अपने फायदों के लिए अधिकतम और सम्पूर्ण उपभोग करने के विशेष प्रवत्ति रखते है | और सेवा भाव के स्थान पर मेवा भाव आ जाने के कारण लापरवाही और भारस्ताचार का बोलबाला चारो और है |मिड डे मील जैसे कार्यक्रम शिक्षा देने और शिक्षित करने मे कितने सफल है ये तो बक्त बतायेंगा, पर एसी योजनायो से कितने सलंग्न लोगो के लेट नाईट डिनर बन रहे है यह सोच का विषय है !जिसका खामियाजा इन मासूमो को अनचाये भुगतना पड़ा | दुःख तो यह है की योजना की कमियों , बच्चो की मौत से जाएदा जरुरी वोटो की राजनीती हो गयी है |उसी के लिए सारी कवायत होती दिख रही है !
Thursday, July 25, 2013
लेट नाईट डिनर
भारत के आम नागरिक इतिहासिक रूप से गरीब रहे है |इसलिए आज भी आजीविका के रूप मे मिली सरकारी नोकरी हो या कोई अन्य सावर्जनिक पद , वे उस को हर प्रकार से अपने फायदों के लिए अधिकतम और सम्पूर्ण उपभोग करने के विशेष प्रवत्ति रखते है | और सेवा भाव के स्थान पर मेवा भाव आ जाने के कारण लापरवाही और भारस्ताचार का बोलबाला चारो और है |मिड डे मील जैसे कार्यक्रम शिक्षा देने और शिक्षित करने मे कितने सफल है ये तो बक्त बतायेंगा, पर एसी योजनायो से कितने सलंग्न लोगो के लेट नाईट डिनर बन रहे है यह सोच का विषय है !जिसका खामियाजा इन मासूमो को अनचाये भुगतना पड़ा | दुःख तो यह है की योजना की कमियों , बच्चो की मौत से जाएदा जरुरी वोटो की राजनीती हो गयी है |उसी के लिए सारी कवायत होती दिख रही है !
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