Tuesday, July 9, 2013

अब विदा हो बे -गुणा

अब विदा हो बे -गुणा  
    बर्बादे गुलिस्तान के खातिर बस एक ही उल्लू काफी था , हर साखपे उल्लू बैठा हैअंजामे गुलिस्ता क्या होगा ?एक नेता को हटाकर किसका भला होने बाला है केंद्र से लेकर पंचायत स्तर तक , सत्ता से लेकर विपक्ष तक शासन से लेकर प्रशासन तक गिद्ध बेठे है जिनकी चोंच बड़ी लम्बी है पर अंडे नही देते | उत्तराखंड आपदा के समय राजनीतिक , प्रशसनिक और आपदाप्रबंधन के साधन  पूर्णतया विफल हुए  अब जनता किससे  क्या  उम्मीद करे जो  उनके बारे मे सोचे  | भारतीय समाज स्वकेंद्रित और बेशर्म  हो गया है |अधिकतम वेयक्तिगत लाभ  के लिए ही पद दोहन किया जाता है अब आम  जनता को सोचना है की भारत को किस और ले जाना है |यहा तो हर तरफ बे गुणा ही है |फिर भी उम्मीद अभी बाकि है |ये चमत्कारों का देश है |



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