अब विदा हो बे -गुणा
बर्बादे गुलिस्तान के खातिर बस एक ही उल्लू काफी था , हर साखपे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्ता क्या होगा ?एक नेता को हटाकर किसका भला होने बाला है केंद्र से लेकर पंचायत स्तर तक , सत्ता से लेकर विपक्ष तक शासन से लेकर प्रशासन तक गिद्ध बेठे है जिनकी चोंच बड़ी लम्बी है पर अंडे नही देते | उत्तराखंड आपदा के समय राजनीतिक , प्रशसनिक और आपदाप्रबंधन के साधन पूर्णतया विफल हुए अब जनता किससे क्या उम्मीद करे जो उनके बारे मे सोचे | भारतीय समाज स्वकेंद्रित और बेशर्म हो गया है |अधिकतम वेयक्तिगत लाभ के लिए ही पद दोहन किया जाता है अब आम जनता को सोचना है की भारत को किस और ले जाना है |यहा तो हर तरफ बे गुणा ही है |फिर भी उम्मीद अभी बाकि है |ये चमत्कारों का देश है |
बर्बादे गुलिस्तान के खातिर बस एक ही उल्लू काफी था , हर साखपे उल्लू बैठा है, अंजामे गुलिस्ता क्या होगा ?एक नेता को हटाकर किसका भला होने बाला है केंद्र से लेकर पंचायत स्तर तक , सत्ता से लेकर विपक्ष तक शासन से लेकर प्रशासन तक गिद्ध बेठे है जिनकी चोंच बड़ी लम्बी है पर अंडे नही देते | उत्तराखंड आपदा के समय राजनीतिक , प्रशसनिक और आपदाप्रबंधन के साधन पूर्णतया विफल हुए अब जनता किससे क्या उम्मीद करे जो उनके बारे मे सोचे | भारतीय समाज स्वकेंद्रित और बेशर्म हो गया है |अधिकतम वेयक्तिगत लाभ के लिए ही पद दोहन किया जाता है अब आम जनता को सोचना है की भारत को किस और ले जाना है |यहा तो हर तरफ बे गुणा ही है |फिर भी उम्मीद अभी बाकि है |ये चमत्कारों का देश है |
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