कहानी .
आजाद लड़की ! भाग - 1
ये कहानी भी आपको असली सी लगेगी ,यही आपकी जर्रानावाजी होंगी ।
ख़ुशी ,यही तो नाम है उसका जो हमारे सरकारी आवास परिसर में रहने आई है।किसी छोटे कस्बे से , पर देखने में मेट्रो गर्ल थी । यु तो तो मात्र वो कुछ माह के लिये प्रशिक्षण के लिए ही आई है हमारे सिचाई बिभाग में ,पर सहाब क्या खूब आई है ? मानो गर्मियों के मौसम में भी गार्डन रंगीन हो गया हो फूलो से ...
कुछ युवा बूढ़े तो अपने ही सुपुत्रों से चिढ़े हुए थे ,अपने नये कपडे देने बंद कर दिए सा ........ आवारा हो गया है कह कर।
उधर परिसर के सभी जवान लड़के भी नहा धोकर अपनी ,मांगी हुई bikes पर चक्कर लगा रहे थे .पर वो सब बचपन से ही एक दल में रहे थे ।
bikes /"विशेष किताबे /क्रिकेट बेट /G .F / खाली कमरा /पॉकेट मनी /सिगरेट /दारू /जींस /खाना सब एक साथ ही प्रयोग करते थे ।कद्दू कटेगा सब में बटेगा , टाइप कांट्रेक्ट था उनका ।
सबसे बड़े काले कुत्ते तो वो थे ,जो किसी कद्दू को खा नही पा रहे थे ,उनकी अपनी बीबी /या माता जी जेम्स बोंड की दादी जो थी ? या वो भी आजाद थे ,।
अचानक आवास परिसर में सुनामी आ गयी ,हर कोई तबहा हो गया था हुआ ये की बसंत पंचमी के दिन किसी हुए प्रोग्रम्म में ,एक - काले कुते बाले दल के मुखिया ने ख़ुशी को कुछ बोल दिया पर, छेड़ा नही था !जब वो , कुछ उम्र को धोका देती माताजी टाइप महिलायों के साथ MARRY -GO -ROUND खेल रही थी ।पर बोला क्या था ?शायद उसे भी नही पता है .अगले ही दिन लिखित मै शिकायत कार्यालय में आ गयी।पर उस दिन एक बड़ी उम्र के सहयोगी भी जोर जोर से चिल्ला रहे थे माताजी टाइप पर , उनकी किसे ने सिकायत न की क्यों ?साथ ही ख्स्बू के अधिकारी महोदय, ललवानी सहाब भी बहुत लाल -पीले हुये प्रसासनिक अधिकारी पर ।इस मुद्दे पर ।
6-7 लडको / पुरुषो के नाम थे। कुछ तो एसे नाम थे जो लोग उस दिन शहर में ही नही थे ,और कुछ तो उस इलाके में पैदा ही नही हुये अभी तक । अरे हम गरीबो के नाम तो बस भगवान ही जानता है दुःख देने को ।इसलिए मामला उलझ गया । किस को किस अपराध में क्या सजा दे ? मामला द्वा दे या सजा - ए - मौत दे डाले , फिर बड़े लोगो ने समझाने के नाम ,पर उसके साथ चाय -पानी की और PROBATION में चल रहे तीन चार नये लोगो को बुला कर पहले डाटा फिर माफ़ी मंगवा दी, और उनमे जो लोग बहा पर थे भी नही। उन्हें भी मांगनी पड़ी मज़बूरी में ! ।अगर किसी PERMANENT कर्मचारी से कहते तो चपरासी भी माफ़ी न मांगता । यूनियन बाले भी हंगामा कर डालते बात उपर तक जाती ! साम-दाम-दंड-भेद के बिना कहा कोई अफसर बना रहे सकता है ?राज्य सरकार में ? तो मामला ठीक से बेठा दिया गया ।सब अफसर खुश हो गए, मानो सरकार ने महगाई को काबू कर लिया हो। विदेश से काला धन बापस ले आये हो !
अब लड़की अपने को हिलेरी क्लिंटन जितनी ताकतवर समजने लगी थी ,सारे शहोदे डर गए थे ,ऐसे घूम रहे थे जैसे कुत्तो को रेबीज हो गयी हो, ये हालत थी उनकी । उधर अफसर हालचाल पूछते थे , कोई सलेब्रेटी हो जैसे !आमजन उसके चरित्र पर जीवनी लिखने लगे थे। पर पता नही क्यों हर सुख के बाद दुःख ! अच्छाई के बाद बुराई क्यों मिलती है ?
सभी काले कुत्तो ने अपने विशेष स्थान पर अति गोपनीय मिटिंग बुलाई !जिसमे वो ही लोग बुलाये गए थे। जो मर्दों की इज्ज़त के लिए जान पर भी खेल जाये !पर कोई हल न निकला ..............
पर अचानक 14 feb के महान फेस्टिवल पर ,अरे ! अपना valentine day !ख़ुशी की सारी खुशी पर पानी पड़ गया !
और पिटे हुए मोहरों को चेक के बिना ही मेट देने की चाल मिल गयी ।
ऐसा क्या हुआ यू। तो वेलेंटाइन पर किसी को टाइम नही होता पर जो लोग दुसरो को देख कर रोते है। उन पर टाइम की कमी नही होती।बैठे थे कुछ दिलजले 8pm के साथ ,तभी ख़बरी ने आकर लाखो की खबर दी की "खुशबू के साथ कोई बहार का लड़का है और दोनों कालोनी में अकेले है !घर जा रहे है ।
सुनते ही नशा चड़ने लगा ,तुरंत योजना बनी ,सबकी सहमति फ़ोन पर ले ली गयी ।
फील्डिंग लगा दी गयी ,युवराज सिंह जैसे अच्छे फिल्डर मेन गेट कालोनी गार्ड के साथ और बेदम फील्डर मनिंदर जैसे उसके घर पर दूरबीन लगा कर, सिगरेट जला कर बेठेगे ।हर हालत में सबको 10.30 पर रूम पर मिलना था रात को 10 बजे गेट बंद होना है विजिटर के लिए ,दुआ सब यही कर रहे थे की वो चला न जाये !उसे जाना भी कहा था ?सो वो न गया , मोका ही ऐसा था , फिर क्या हुआ ? अंदर क्या हुआ ये तो पता नही पर बहार फरबरी के महा में भी गर्मी कड़ी थी सारा प्लान तेयार था पर कुछ लोग ये जता रहे थे की कुछ नही होंगा उसका , कोई और फाएदा उड़ा लेंगा , चलो छोड़ो मरने दो जो करते है करने दो !फिर रात को 11 बजे सुरक्षा बल को बता दिया गया की परिसर का महोल गन्दा हो रहा है ।बच्चे बि ग ड़ रहे है।( ये बही बच्चे है जो बचपन से सलमान खान है )आदि आदि ।
तुरंत कार्यवाही हुई सुरक्षा दल के सब लोग छापा मारने को पहुच गए मानो इसी काम के लिए खाली बेठे थे ।बैसे भारत में हर आदमी इस टाइप के काम को खाली रहेता है ।
बस सहाब ! मकान को चारो तरफ से घेरे में ले लिया गया। मानो अंदर लादेन टाइप कोई पाकिस्तान में हो !गलती ये हुई की गार्ड के साथ में कोई महिला नही थी ।बैसे आमतोर पर महिला गार्ड होती कहा है ? अगर होती , तो कोई गार्ड बहा नही होता रात को 11 बजे !पर उन्हें तो डर था की मामला बड़े सहाब तक न पहुच जाये ।
कुछ तो करना ही था ।पर मामला लड़की का था तो सोच समझ कर करना था जो करना था पर करे क्या ? दिलजले अपनी सासे बस सिगरेट पीने के लिए ही ले पा रहे थे बाकि समय सासे रुकी थी उनका मोर्चा बिलकुल सही जगह पर था सब साफ - साफ देखाई दे रहा था .टाइम ओर कोहरा बढता जा रहा था ठण्ड तो जवानों को लगती नही है न फिर बोतले भी थी ही ।
काफी देर तक कुछ न हुआ। फिर दो गार्ड़ हिम्मत करके आगे बढे और दरवाजा खुलवाया तथा पांच मिनट तक बात चीत की , कमरे की लाइट बंद थी . अचानक सब लोग अन्दर चले गए और लाइट जल गयी और पन्द्र मिनट बात खाली हाथ वापस आ गए । और अपनी गश्त पर निकल गए ।पर गश्त बार बार उसी स्थान पर लागते रहे । दिलजलो का तन और मन दोनों जल गए । मोर्चे से बहार निकलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। उस रात सभी को वहीँ पर रहना पड़ा सिगरते और दो बोतल माँगा ली गयी खाने की बात भूल ही गए पूरी रात एक दुसरे को योजना की विफलता पर दोष देकर काटी सबसे बड़ा दुःख तो इस बात का था कि valentine मानाने से खुशबू को रोक नहीं पाए।|ये सबने देखा की पर पूरी रात उसकी लाइट बंद ही रही थी ।बाद में पता चला की वो रेस्ट रूम में छिप गया था ।
मनहूस सुबह, खुशखबरी लेकर, गुलाबी बनकर आई। जबकि सभी लोग अँधेरे में ही अपने मुह छिपा कर अपने अपने घर चले गए थे। योजना सफल रही थी परन्तु दुसरे तरीके से , सुबह पांच बजे ही खुशबू के मोबाइल से बॉस पर फ़ोन आया और उसने अपने valentine को आवास परिसर से बहार निकलने के लिए रोना धोना किया , मांफी मांगी और "मैं अभी तुमसे मिलने को तैयार हूँ कह कर हथियार डाल दिए । सभी के दिमाग के fuse उड़ गए । तत्काल में कबिनेट की बैठक बुलाई गयी गहन बाते हुई । जिसमे फिर वही गलती करी गयी जो हर गरीब करता है अपने को मिले मोके पर ! दया और माफ़ी । और valentine महोदय को खुद अपनी गाडी में बिठा कर बहार तक छोड़ दिया गया।अगले ही दिन ,लिखित मै माफ़ी सहित पुराना आरोप बापस ले लिया खुशबू ने ।बिल्ली के भाग से कुछ बंदर लोगो का छिका टूट ही गया ........उस बारे में कहानी के भाग - 2 में जरुर पड़े ..........................अगर आप लोग इस पर अपनी राय दे तो कहानी मे भाग 2 लिखने में मज़ा आजाये ........... अमन
आजाद लड़की ! भाग - 1
ये कहानी भी आपको असली सी लगेगी ,यही आपकी जर्रानावाजी होंगी ।
ख़ुशी ,यही तो नाम है उसका जो हमारे सरकारी आवास परिसर में रहने आई है।किसी छोटे कस्बे से , पर देखने में मेट्रो गर्ल थी । यु तो तो मात्र वो कुछ माह के लिये प्रशिक्षण के लिए ही आई है हमारे सिचाई बिभाग में ,पर सहाब क्या खूब आई है ? मानो गर्मियों के मौसम में भी गार्डन रंगीन हो गया हो फूलो से ...
अब फूल खिला है ।तो भवरे तो आयेंगे ही . बहुत दिनों से खाली जो थे .15 से 75 साल वाली उम्र के हर पद /जाति /धर्म /काले -सफ़ेद /कमजोर /ताकतवर /विधुर /विवहित /सफल/ असफल /S .C /S ,T /O .B .C बिना किसी भेद -भाव के नये -नये से लग रहे थे ,सबको पता था मुकबला बड़ा मुश्किल है ..".ये सा... लड़के बड़े बेकार है सहाब !;कुछ कम नही है ।बस खाली घूमते रहते है अपनी मोटर साईकिल पर ,हर बुड्ढा दीवाना यही सोच रहा था इन लडको को कालोनी से बहार होना था । (जबकी उनकी अपनी कन्याए बहार ही घुमती रहती थी )?
कुछ युवा बूढ़े तो अपने ही सुपुत्रों से चिढ़े हुए थे ,अपने नये कपडे देने बंद कर दिए सा ........ आवारा हो गया है कह कर।
उधर परिसर के सभी जवान लड़के भी नहा धोकर अपनी ,मांगी हुई bikes पर चक्कर लगा रहे थे .पर वो सब बचपन से ही एक दल में रहे थे ।
bikes /"विशेष किताबे /क्रिकेट बेट /G .F / खाली कमरा /पॉकेट मनी /सिगरेट /दारू /जींस /खाना सब एक साथ ही प्रयोग करते थे ।कद्दू कटेगा सब में बटेगा , टाइप कांट्रेक्ट था उनका ।
सबसे बड़े काले कुत्ते तो वो थे ,जो किसी कद्दू को खा नही पा रहे थे ,उनकी अपनी बीबी /या माता जी जेम्स बोंड की दादी जो थी ? या वो भी आजाद थे ,।
अचानक आवास परिसर में सुनामी आ गयी ,हर कोई तबहा हो गया था हुआ ये की बसंत पंचमी के दिन किसी हुए प्रोग्रम्म में ,एक - काले कुते बाले दल के मुखिया ने ख़ुशी को कुछ बोल दिया पर, छेड़ा नही था !जब वो , कुछ उम्र को धोका देती माताजी टाइप महिलायों के साथ MARRY -GO -ROUND खेल रही थी ।पर बोला क्या था ?शायद उसे भी नही पता है .अगले ही दिन लिखित मै शिकायत कार्यालय में आ गयी।पर उस दिन एक बड़ी उम्र के सहयोगी भी जोर जोर से चिल्ला रहे थे माताजी टाइप पर , उनकी किसे ने सिकायत न की क्यों ?साथ ही ख्स्बू के अधिकारी महोदय, ललवानी सहाब भी बहुत लाल -पीले हुये प्रसासनिक अधिकारी पर ।इस मुद्दे पर ।
6-7 लडको / पुरुषो के नाम थे। कुछ तो एसे नाम थे जो लोग उस दिन शहर में ही नही थे ,और कुछ तो उस इलाके में पैदा ही नही हुये अभी तक । अरे हम गरीबो के नाम तो बस भगवान ही जानता है दुःख देने को ।इसलिए मामला उलझ गया । किस को किस अपराध में क्या सजा दे ? मामला द्वा दे या सजा - ए - मौत दे डाले , फिर बड़े लोगो ने समझाने के नाम ,पर उसके साथ चाय -पानी की और PROBATION में चल रहे तीन चार नये लोगो को बुला कर पहले डाटा फिर माफ़ी मंगवा दी, और उनमे जो लोग बहा पर थे भी नही। उन्हें भी मांगनी पड़ी मज़बूरी में ! ।अगर किसी PERMANENT कर्मचारी से कहते तो चपरासी भी माफ़ी न मांगता । यूनियन बाले भी हंगामा कर डालते बात उपर तक जाती ! साम-दाम-दंड-भेद के बिना कहा कोई अफसर बना रहे सकता है ?राज्य सरकार में ? तो मामला ठीक से बेठा दिया गया ।सब अफसर खुश हो गए, मानो सरकार ने महगाई को काबू कर लिया हो। विदेश से काला धन बापस ले आये हो !
अब लड़की अपने को हिलेरी क्लिंटन जितनी ताकतवर समजने लगी थी ,सारे शहोदे डर गए थे ,ऐसे घूम रहे थे जैसे कुत्तो को रेबीज हो गयी हो, ये हालत थी उनकी । उधर अफसर हालचाल पूछते थे , कोई सलेब्रेटी हो जैसे !आमजन उसके चरित्र पर जीवनी लिखने लगे थे। पर पता नही क्यों हर सुख के बाद दुःख ! अच्छाई के बाद बुराई क्यों मिलती है ?
सभी काले कुत्तो ने अपने विशेष स्थान पर अति गोपनीय मिटिंग बुलाई !जिसमे वो ही लोग बुलाये गए थे। जो मर्दों की इज्ज़त के लिए जान पर भी खेल जाये !पर कोई हल न निकला ..............
पर अचानक 14 feb के महान फेस्टिवल पर ,अरे ! अपना valentine day !ख़ुशी की सारी खुशी पर पानी पड़ गया !
और पिटे हुए मोहरों को चेक के बिना ही मेट देने की चाल मिल गयी ।
ऐसा क्या हुआ यू। तो वेलेंटाइन पर किसी को टाइम नही होता पर जो लोग दुसरो को देख कर रोते है। उन पर टाइम की कमी नही होती।बैठे थे कुछ दिलजले 8pm के साथ ,तभी ख़बरी ने आकर लाखो की खबर दी की "खुशबू के साथ कोई बहार का लड़का है और दोनों कालोनी में अकेले है !घर जा रहे है ।
सुनते ही नशा चड़ने लगा ,तुरंत योजना बनी ,सबकी सहमति फ़ोन पर ले ली गयी ।
फील्डिंग लगा दी गयी ,युवराज सिंह जैसे अच्छे फिल्डर मेन गेट कालोनी गार्ड के साथ और बेदम फील्डर मनिंदर जैसे उसके घर पर दूरबीन लगा कर, सिगरेट जला कर बेठेगे ।हर हालत में सबको 10.30 पर रूम पर मिलना था रात को 10 बजे गेट बंद होना है विजिटर के लिए ,दुआ सब यही कर रहे थे की वो चला न जाये !उसे जाना भी कहा था ?सो वो न गया , मोका ही ऐसा था , फिर क्या हुआ ? अंदर क्या हुआ ये तो पता नही पर बहार फरबरी के महा में भी गर्मी कड़ी थी सारा प्लान तेयार था पर कुछ लोग ये जता रहे थे की कुछ नही होंगा उसका , कोई और फाएदा उड़ा लेंगा , चलो छोड़ो मरने दो जो करते है करने दो !फिर रात को 11 बजे सुरक्षा बल को बता दिया गया की परिसर का महोल गन्दा हो रहा है ।बच्चे बि ग ड़ रहे है।( ये बही बच्चे है जो बचपन से सलमान खान है )आदि आदि ।
तुरंत कार्यवाही हुई सुरक्षा दल के सब लोग छापा मारने को पहुच गए मानो इसी काम के लिए खाली बेठे थे ।बैसे भारत में हर आदमी इस टाइप के काम को खाली रहेता है ।
बस सहाब ! मकान को चारो तरफ से घेरे में ले लिया गया। मानो अंदर लादेन टाइप कोई पाकिस्तान में हो !गलती ये हुई की गार्ड के साथ में कोई महिला नही थी ।बैसे आमतोर पर महिला गार्ड होती कहा है ? अगर होती , तो कोई गार्ड बहा नही होता रात को 11 बजे !पर उन्हें तो डर था की मामला बड़े सहाब तक न पहुच जाये ।
कुछ तो करना ही था ।पर मामला लड़की का था तो सोच समझ कर करना था जो करना था पर करे क्या ? दिलजले अपनी सासे बस सिगरेट पीने के लिए ही ले पा रहे थे बाकि समय सासे रुकी थी उनका मोर्चा बिलकुल सही जगह पर था सब साफ - साफ देखाई दे रहा था .टाइम ओर कोहरा बढता जा रहा था ठण्ड तो जवानों को लगती नही है न फिर बोतले भी थी ही ।
काफी देर तक कुछ न हुआ। फिर दो गार्ड़ हिम्मत करके आगे बढे और दरवाजा खुलवाया तथा पांच मिनट तक बात चीत की , कमरे की लाइट बंद थी . अचानक सब लोग अन्दर चले गए और लाइट जल गयी और पन्द्र मिनट बात खाली हाथ वापस आ गए । और अपनी गश्त पर निकल गए ।पर गश्त बार बार उसी स्थान पर लागते रहे । दिलजलो का तन और मन दोनों जल गए । मोर्चे से बहार निकलने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी। उस रात सभी को वहीँ पर रहना पड़ा सिगरते और दो बोतल माँगा ली गयी खाने की बात भूल ही गए पूरी रात एक दुसरे को योजना की विफलता पर दोष देकर काटी सबसे बड़ा दुःख तो इस बात का था कि valentine मानाने से खुशबू को रोक नहीं पाए।|ये सबने देखा की पर पूरी रात उसकी लाइट बंद ही रही थी ।बाद में पता चला की वो रेस्ट रूम में छिप गया था ।
मनहूस सुबह, खुशखबरी लेकर, गुलाबी बनकर आई। जबकि सभी लोग अँधेरे में ही अपने मुह छिपा कर अपने अपने घर चले गए थे। योजना सफल रही थी परन्तु दुसरे तरीके से , सुबह पांच बजे ही खुशबू के मोबाइल से बॉस पर फ़ोन आया और उसने अपने valentine को आवास परिसर से बहार निकलने के लिए रोना धोना किया , मांफी मांगी और "मैं अभी तुमसे मिलने को तैयार हूँ कह कर हथियार डाल दिए । सभी के दिमाग के fuse उड़ गए । तत्काल में कबिनेट की बैठक बुलाई गयी गहन बाते हुई । जिसमे फिर वही गलती करी गयी जो हर गरीब करता है अपने को मिले मोके पर ! दया और माफ़ी । और valentine महोदय को खुद अपनी गाडी में बिठा कर बहार तक छोड़ दिया गया।अगले ही दिन ,लिखित मै माफ़ी सहित पुराना आरोप बापस ले लिया खुशबू ने ।बिल्ली के भाग से कुछ बंदर लोगो का छिका टूट ही गया ........उस बारे में कहानी के भाग - 2 में जरुर पड़े ..........................अगर आप लोग इस पर अपनी राय दे तो कहानी मे भाग 2 लिखने में मज़ा आजाये ........... अमन
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