Friday, June 22, 2012

गर्मी

दोस्तों !
            बहुत  गर्मी हो रही है आजकल , मानसून अभी भी पश्चमी उत्तर प्रदेश से रुठा   है !बिजली तो आती ही नही ! आये भी तो . क्या गरीब पंखा ही तो चला पाता  है , वो तो हाथो बाले पंखो  से ही काम चला लेता है पर आमीर  को  जनरेटर  का सहारा है अपने कूलर और A .C के लिए ?और एस गर्मी में  चुनाव ? एक तो करेला उपर से नीमचढ़ा , दिनाक 24/06/2012 को नगर निगम एवम नगरप्रमुख के चुनाव होने थे ।में  वोट डालने के लिए 23 को ही चला सुबह 6.30 के बस मै रूडकी से मेरठ के लिए !
 ,ये चुनावी  मेला यु तो 5 सालो में ही  लगता है पर अब तो हर दो सालो में  कोई न कोई सा इलेक्शन होता ही है ।बस चल पड़ी काफी तेज गति से , पर मंगलौर में अचानक एक मुल्ला जी बस से उतरे और मोबाइल पर जोर जोर से बोलने लगे .बस रुक गयी थी ।लगभग 5 मिनट तक यही होता रहा , लोगो ने पुछा  तो परिचालक बोला इनकी सबारी आ रही है उनका टिकट लिया है ।एक भाई बोला मुझे रेल का टिकट दिलवादे में  रेल घर तक ले जाऊंगा ।अभी तक सब हस रहे थे ,पर एक तकड़ा,( लड़के से कुछ जायदा ,आदमी से कुछ कम )पुरुष जिसे सन्नी देयोल  का U .P . रूपांतरण  कहना  उचित होंगा ,5.10" की लम्बाई  . तकड़ा सरीर , ढाडी . और सर पर टोपी सब कुछ था सन्नी भाई जैसा  , उठकर जोर जोर से लड़ने लगा ।परिचालक को धक्का लगा वो नीचे गिर गया ।
बस खड़ी  थी, में  चुप था ,बात बड  गई ,स्त्रीलिंग सूचक सब्दो का प्रयोग होने लगा !जोह्नी लीवर टाएप  चालक भी आया और मारपीट मे उतारू  होने लगा पर उस पुरुस को देखकर चुप रह गया शायद डर  गया  ।उसने दोनों को पीछे दकेल दिया कुछ  लोग  समझाने लगे , कुछ चुप  थे  ,में  भी चुप था ।उसका कोई रिश्तेदार हॉस्पिटल में  था तो जल्दी थी ...परिचालक बोला। थाने  चलो ! इसने कैश लूटा है मेरा !( पर आत्मविश्वास नही था ) उसने अपना सबसे बड़ा हथियार चला दिया ।पर सन्नी पर कोई फर्क नही पड़ा ।सबको लगा देर हो सकती है ,एसलिये  सब लोग  दोनों तरफ समजाने  लगे,अब मुल्ला जी के परिजन भी आ गये , बस चल पढ़ी पर गति आधी रह गयी ।चालक अपनी पिटाई का बदला अपने तरीके से ले रहा था ।मुझे लगा गरीबो में अपनी अलग ताकत होती है बस प्रयोग करने की बात है जो चालक ने बस चलाने में दिखा दी है ।बस मंसूरपुर मै  आई तो सन्नी  उतरने को बहार निकल कर  आया ।
पता नही क्यों ? अब में बोला कोन  बीमार है ? वो चकित रह गया ,और में भी चकित था बोल कर ।वो  हडबडा कर  बोला ताऊ जी ? सबने मुझे देखा ,मुझे देखा मानो  किसी आतकवादी से बात कर रहा हु।  और मुझे लगा की चालक -परिचालक और सन्नी
इन  सबका मवाद का रिसना जरुरी है ,नही तो नासूर बना रहँगा ,जिन्दगी भर ,और.......पर  दोनों फिर लड़ने लगे ।पर अब मेने दोनों को डाट दिया ! और भाषण की घुट्टी पीलाने लगा , सही बक्त पर चोट की थी मेने ।फिर सन्नी उतर गया ।मुझे पता था अगर एस लड़ाई में संन्नी  की पिटाई होती तो इसी रस्ते मे 5-10 लड़के जरुर मिलते जो उसका बादला  तत्काल सेवा में लेते ।बस के शीशे टूटते ! हमें दूसरी बस में जाना पड़ता ,पर अच्छा हुआ जो ऐसा न हुआ ,उसके जाने पर मैंने कंडक्टर को डराया ,की एक रूपये के लिए कैसे एक बूढ़े  शरीफ आदमी ने फ़ोन पर ,लड़के बुला कर कंडक्टर की पिटाई करवाई थी । रोडवेज़ के सामने मुजफरनगर में , कोई यूनियन काम  न आई ।सब चुप रहे ! मेरी इज्ज़त बड  गयी । रोब जम गया ।सबको इस इलाके के खेती ओर पैदावार के इतिहास  की जानकारी जो थी ।
अब बस ढाबे पर रुकी तो कंडक्टर ने मुझे चाय के लिए कहा !" धन्यबाद कह  कर में  बुक्स देखने लगा ।
                        गर्मी मोसम में  कम  दिमाग में जायदा रहती है !

                                                   WAR BEGIN IN THE BRAIN OF THE MEN 



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