Monday, June 18, 2012

गर्मी की छुट्टिया !

गर्मी की छुट्टिया !
बच्चो ही नही ,बड़ो को भी बहुत  राहत देती है ।पापा जी को अब स्कूल छोड़ने नही जाना , मम्मी को जल्दी उठकर ब्रेकफास्ट के साथ लंच नही बनाना , ड्रेस ,जूते , P .T .M . का जंजाल भी अब नही ,रोज़ जाने का तनाव ,लेट होने के समस्या रोज़ रोज़ की जिख -जीख लड़ाई - जगड़े अब चलो कही  चलते है जहा दिल को अच्छा लगे , या तो खी घुमने, या अपने परिवार के पास, अपनों के पास ,
नानी के घर के मज़े आज भी याद आते  है हमे , दादी-दादा , बुआ- फूफा ,मौसा मौसी  चाचा चाची  ताऊ जी - ताई जी  सब से मिलना , हसने रोने याद करने ,शादी बर्वादी सब की बाते हो जाती है ,सबकी सहूलियत  बलि तारीखे तय  हो जाती है ।

हमारी भी बहन घर पर आई ,थोरी मोटी है , पता नही क्यों ?शादी के कुछ टाइम बाद बहन मोटी  क्यों हो जाती है? या जितनी भी मोटी महिलाये है ,वो किसी न किसी भाई  की बहन है ,ऐसे  ही मौसा जी भी मोटे होते है , मेरे हो या किसी बच्चे के ,जीजा जी सबके पतले ही होते है ( क्या मोटे लोग किसी  के जीजा नही होते?
कभी कभी लगता है मंटो सहाब बोल रहे है में  लिख नही रहा, उनकी किसी रचना को पड़ रहा हु । )पर हम भी तो मेहमान ही थे मम्मी के घर ,क्योकि 6 सालो से बाहर  ही रहते है ।
भी पुराने तरीके , कभी ताई जी छोले भटूरे बना रहे होती है तो कभी छोटी चाची ब्रेकफास्ट  बेर्गेर। बच्चे किताबे जरुर ले जाते है ,ये होलीडे  होमवर्क क्या होता है जी ? खोलते कभी नही, अगर कुछ बोला तो अम्मा जी, बाबाजी होते ही है ।काश ! हम भी छोटे हो जाये ! और किसी बड़े के आचल में छुप  जाये ! और मांगने पर आपनो से सब कुछ जरूरत से जाए दा  मिल जाये !
पर यारो इस  बार गर्मी बहुत  है। सबके साथ गोल मार्किट जाकर डोसा , पस्ट्री केक का छोटा चेतन  ,चोवमिन ( भारतीय चाट के स्वाद बाली ) मोमोस  (ये क्या होते है? बस सुना ही है, बच्चो के मुख  से,ये   अमृत , अभी तक मुझ  जैसे मनुष्य को नही मिला  ) पेटिस - समोसा , इनमे मेल नही पर आलू खाने के वेदेशी - देशी तरीके है ,30 साल से निचे बाले लोगो के लिए पेटिश सास  उसके बाद बाले समोषा चटनी के साथ , आदि आदि ।खाने थे पर ये सरीर के दुश्मन बहार की गर्मी पर भरी पड़े !
  अब   खूब खाने के दिन खा रहे ?अब तो खाना पचाने के लिए भी योजना बनानी पड़ती है ।.........
पर स्कूल बालो ने छुट्टिया कम कर दी है ।उनको भी पता है की न अब जाने का टाइम है न न आने बाले को रखने का दिल ! न हम जाये , न तुम आओ , शादी -विवहा एक दिन में  निबटाओ !
नाना जी नानी जी को खुद अपने घर में कोई नही पूछ  रहा बेटी को क्या कहे ?
दादा जी- दादी जी जिस भाई के पास है वो ही परेशान है रोता रहेता है ?


1 comment:

  1. बहुत खुब ....सच मे गर्मीयो की छुटियो की तो बात ही कुछ और है मगर अब शायद ये मजे भी दुर्लभ से लगते है :( :'(

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