Sunday, September 22, 2013

मुज्फ्फर नगर दंगा .लाशो की राजनीति

मुज्फ्फर नगर दंगा


 नारी अपराध के प्रतिशोध मे पहेले एक हत्या फिर दो हत्या फिर एक टी वी पत्रकार की हत्या पंचायत से लोटते लोगो पर सुनियोजित  हमला , और उसकी प्रतिकिर्या से उपजे दंगे  फिर तो  आकड़े ही नही मिलते है की कहा पर ? कितने लोग मरे ? किसने मारे ?कितने गायब है ? क्यों मारे ? खबरों पर रोक जो लगी थी |
प्रशन यह है की क्यों लोग ऐसा करते है और कोन है बे  लोग जो हमला करके छुप जाते है ?और मरते निर्दोष ही है | सारे दलों के नेताओ की भूमिका इस मामले मे दोषी है , किसी ने  समाज को जोड़ने की बात नही करी सब मरने बालो के कफ़न , और बचने बालो के वोट  का इंतजाम करते देखे गए पर सही बात किसी ने नही उठाई |दिल को जोड़ने के नाटक होते रहे , 
लोकतंत्र के कितना गलत फायदा उठा रहे है लोग , मुद्दो की नही , लाशो की राजनीति हो रही है गद्धी के लिए |
इस  देश का यह दुभाग्य ही है की एक बिभाज़न होने के बाद भी जनमानस को धर्म की  राजनिति के चलते आज भी लड़ाया जा सकता है | जबकि  नुकसान दोनों वर्गों के निर्बल बर्गो  को ही झेलना पड़ता है ।जिसका  फायदा तथाकथित रहनुमा राजनितिक दलों  को चुनावो मे  मिलता है । प्रसाशन की असंवेदनशीलता , चुक और तुस्तिकर्ण  के चलते और सरकार के दबाब के कारण , सही समय पर उचित प्रसाशनिक   कार्य बहाई  नही करी गयी और ये सुनियोजित  दंगा फेला , जिससे  जगल राज कायम हुआ पर अभी तक किसी स्तर से  कोई ठोस कदम नही उठाया गया है । जिससे आपसी  विस्बास बड़े और अपराधियों पर निस्कपक्ष कार्यबही  हो  इसलिए ये मामला अभी ख़तम नही माना  जा सकता। अब भी अगर जनता नही जागी  अब तो चुनाव तक यही सब होना , इस प्रदेश की नियति बन गयी है । जरुरत यह है की जनता ही धर्म आधरित राजनीती का बहिष्कार करे और विकास, रोजगार , रोटी , कपडे और मकान इमानदारी की बात पर नेता चुने नही तो अब इस देश का लोकतंत्र ही इसके लिए घातक सिद्ध होंगा !लाशो पर राजनीती की रोटिया सेकने से बात आगे बाद गयी है अब तो बोटिया सकी जा रही है |

No comments:

Post a Comment