वर्तमान युग मे जहा किताबो से दूर होते पाठक और , पाठको तक न पहुच पाने बाले लेखक, धन और संशाधनो की कमी , पत्र - पत्रिकाओ के लेखको और मालिको के पद्युक्त बोधिकता से अपमानित होकर हिंदी भाषा को मन दिलाने मे पिछड़ते जा रहे थे बही हिंदी मे नाममात्र के लेखक और पाठक हिंदी की सेवा कर पा रहे थे |पत्रिकाए न बिकने के कारण बंद हो रही थी तो गरीब पाठक कहा जाये ?
एन हालातो मे उम्मीद की एक किरण नही पूर्ण सूरज उगा , वो है इन्टरनेट पर हिंदी ब्लोगिंग का , जिसने हिंदी भाषा को वो मान दिलबाया है जो विशेष है |
आज की तारीख मे हिंदी भाषा में लगभग २५००० के आसपास ब्लोग्स हैं जिनमे २०००० के लगभग रोज साँस लेते है जबकि ५००० के लगभग कभी - कभी जिन्दा हो जाते है ,तब भी यह संख्या अंग्रेजी की तुलना में बहुत कम है . अंग्रेजी भाषा में तो पाच करोड़ के लगभग ब्लोग्स चल रहे है .दुनिया भर मे चलने बाले ब्लोग्स मे जिसमे अंग्रेजी में, जापानी भाषा मे और चीनी भाषा मे अधिकतम प्रयोग हुए है . अभी तुलनात्मक रूप से भले ही हिंदी ब्लॉग का विस्तार काफी कम है किन्तु हिंदी ब्लोगों पर एक से बढकर एक विद्या प्रस्तुत की जा रही हैं ! समाज, राजनीति, मीडिया और साहित्य से संबंधित उच्च स्तरीय सृजन हिंदी ब्लॉग पर पर हो रहा है !हिंदी में ब्लॉग कम होने का एक कारण यह भी हो सकता है, कि अंग्रेजी में ब्लोगिंग १९९७ में ही शुरू हो गयी थी, ऐसा मन जाता हैं की हिंदी का पहला ब्लॉग ०२ मार्च २००३ को लिखा गया जिसे हिंदी के पहले ब्लोगर के रूप में आलोक कुमार ने लिखा और जिनका ब्लॉग है नौ दो ग्यारह जबकि यह हिंदी ब्लोगिंग के विस्तार न होने का तथ्यपूर्ण तर्क नहीं है, क्योंकि समय के लिहाज से अंग्रेजी और हिंदी के बीच मात्र छ: साल की दूरी है लेकिन ब्लॉग की संख्या के लिहाज से दोनों के बीच पीढियों का अंतर है !
साहित्य रचना के छेत्र मे ब्लोग्स अब अति महतवपूर्ण साधन बन गए है तो आज का हिन्दी ब्लॉग प्रोयोगाताम्क दौर में है , जिसमे नित नए प्रयोग होते हैं। जैसे समूह ब्लाग का चलन ज़्यादा हो गया है। ब्लागिंग प्रसिद्ध होने का माध्यम भी बन रहा है।पर अब लिखने की मर्यादा पर भी सवाल उठाए जाने लगे हैं। ब्लाग लेखन को एक समानान्तर मीडिया का दर्ज़ा भी हासिल हो गया है। हिंदी साहित्य के अलावा विविध विषयों पर विशेषज्ञ की हैसियत से भी ब्लाग रचे जा रहे हैं ।साहित्य ,समाज विज्ञान , कला ,सूचना , तकनीक , स्वास्थ्य और राजनीति कुछ भी अछूता नहीं है।
जिस प्रकार हिंदी ब्लॉगर साधन और सूचना की कमी के बावजूद भाषा - समाज और देश के हित में जन चेतना को विकसित करने में सफल हो रहे हैं बह भी बड़ी उपलब्दी ही है । अपनी सामाजिक भूमिका को निभाने की प्रतिबद्धता के कारण आज हिंदी के अनेक ब्लोग्स सामाजिक मीडिया की दृष्टि से समाज में सार्थक भूमिका निभाने में सफल रहे हैं । हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्वरुप देने में हर ब्लॉगर की महत्वपूर्ण भूमिका है | जो बोल्गर अपने बेहतर प्रस्तुतिकरण,सधी हुई भाषा गंभीर चिंतन, समसामयिक विषयों पर सूक्ष्मदृष्टि, सृजनात्मकता, समाज की कुसंगतियों पर प्रहार और साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी बात रखने में सफल हो रहे हैंबो एक मायने मे समाज सेवी ही है । ब्लॉग लेखन और वाचन के लिए सबसे सुखद पहलू तो यह है कि हिन्दी में बेहतर ब्लॉग लेखन की शुरुआत हो चुकी है जो हिंदी समाज के लिए शुभ संकेत का है । आने बाला समय हिंदी ब्लॉगिंग को एक नया आयाम मिलेंगा ऐसी उम्मीद की जा रही है ।अनेक समाचार पत्रों के ब्लोग्स है जो अच्छे ब्लोगर्स को अपने पत्र मे स्थान देते है मंच प्रदान करते है |
माना जाता है कि ब्लोगिंग की दुनिया पूरी तरह आजाद ,आत्म निर्भर और खिलंदड है ! यहाँ हर कोई यहा लेखक, प्रकाशक और संपादक की भूमिका में खुद ही होता हैं ! ब्लॉग की दुनिया अत्यंत विस्तृत और व्यापक है !यहाँ केवल राजनीतिक कहानियों और साहित्यिक रचनाएँ ही नहीं प्रस्तुत नही है वल्कि स्तरीय पुस्तकों का ओन लाइन प्रकाशन तथा अन्य सामग्रियां भी प्रकाशित की जाती है .आज हिंदी में भी फोटो ब्लॉग, म्यूजिक ब्लॉग, विडिओ ब्लॉग,समाचार पत्र ब्लोग्स बिज्ञान ब्लॉग ज्ञान ब्लॉग, प्रोजेक्ट ब्लॉग, कारपोरेट ब्लॉग आदि का प्रचलन तेजी से बढ़ा है ! यानी हिंदी आज मानवीय संवेदनात्मकता के विकास के दौर में है |
अर्थात हिंदी ब्लोगिंग का भविष्य उज्जवल है और ये बाज़ार का हिस्सा नही है क्युकी इसमे वो लोग जुड़े है जो हिंदी प्रेमी है जीन को सही मंच की तलाश थी जो मोका अब मिला हुई और आने वाले दिनों में अंग्रेजी भाषा की तरह इसका भी एक बड़ा और समृद्ध संसार होगा,इसमें कोई संदेह नहीं है ! सबसे सुखद बात तो यह है कि आज हिंदी ब्लोगिंग समानांतर मीडिया का स्वरुप ले चुका है , आने वाले समय में निश्चित रूप से इसका एक वृहद् संसार देखने को मिलेगा इसमें कोई संदेह नहीं !जरूरत केवल इस बात की है सकारात्मक नव लेखन को बढ़ावा दिया जाए और नकारात्मक लेखन को महत्व न दिया जाए,क्योंकि हिंदी ब्लोगिंग में ऐसे लोगों बहुत अधिक है जो अशुद्ध भाषा और तकनिकी अकुशलता के कारण अभी तक अपने को मन से जोड़ नही पाए है | हमें इस ओर विशेष ध्यान देना होगा , तभी हम हिंदी ब्लोगिंग के माध्यम से एक सुन्दर और खुशहाल संसार के निर्माण को रूप देने में सफल हो सकेंगे |
अत स्पस्ट है हिंदी ब्लोगिंग ही अब हिंदी को मुख्य धारा मे मान दिलबा सकती है |नही तो पुराने तौर - तरीको से हिंदी अब अधोगामी दिशा मे ही जा रही है .....
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